अर-रूम · 54/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
۞ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن ضَعْفٍ ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعْدِ ضَعْفٍ قُوَّةً ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعْدِ قُوَّةٍ ضَعْفًا وَشَيْبَةً ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَلِيمُ الْقَدِيرُ ۝٥٤
Allahul lazee khalaqa kum min du`fin summa ja`ala mim ba`di du`fin quwwatan summa ja`ala mim ba`di quwwatin du`fanw wa shaibah; yakhluqu maa yashaaa`u wa Huwal `Aleemul Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
खुदा ही तो है जिसने तुम्हें (एक निहायत) कमज़ोर चीज़ (नुत्फे) से पैदा किया फिर उसी ने (तुम में) बचपने की कमज़ोरी के बाद (शबाब की) क़ूवत अता की फिर उसी ने (तुममें जवानी की) क़ूवत के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा पैदा कर दिया वह जो चाहता पैदा करता है-और वही बड़ा वाकिफकार और (हर चीज़ पर) क़ाबू रखता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِن ضَعْفٍ (कमज़ोरी से): यहाँ अर्थ है नुत्फ़ा (वीर्य) से, जो अत्यंत कमज़ोर और तुच्छ पानी है।
  • قُوَّةً (ताक़त): युवावस्था की पूरी ताक़त और शक्ति।
  • وَشَيْبَةً (और बुढ़ापा): सफ़ेद बाल और वृद्धावस्था की कमज़ोरी।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह हस्ती है जिसने तुम्हें एक बेहद कमज़ोर चीज़ यानी नुत्फ़े (वीर्य की बूँद) से पैदा किया। फिर उसी कमज़ोरी के बाद उसने तुम्हें बचपन की नाज़ुक अवस्था से निकालकर युवावस्था की पूरी ताक़त और शक्ति अता की। फिर उसी ताक़त और जवानी के बाद उसने बुढ़ापे की कमज़ोरी और सफ़ेद बालों का दौर लाया। यह सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है।

अल्लाह जो चाहता है पैदा करता है—कभी कमज़ोरी देता है, कभी ताक़त, कभी जवानी, कभी बुढ़ापा। वह अपनी मख़लूक़ात के हालात को अपनी हिकमत के मुताबिक़ बदलता रहता है। वह सब कुछ जानने वाला है, उससे उसके बंदों की कोई भी चीज़ छिपी नहीं है, और वह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है—उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत इंसान की ज़िंदगी के सफ़र को बड़ी खूबसूरती से बयान करती है। ज़रा सोचिए—हम सब एक कमज़ोर नुत्फ़े से शुरू हुए, फिर अल्लाह ने हमें ताक़त और जवानी दी, और फिर हमें बुढ़ापे की ओर ले जाता है। यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया कभी क़ायम रहने वाली नहीं है। जिस तरह अल्लाह ने हमें कमज़ोरी से ताक़त की तरफ़ बढ़ाया, उसी तरह वह हमें मौत के बाद ज़िंदगी की तरफ़ ले जाने पर भी पूरी क़ुदरत रखता है।

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जो इंसान अपनी पैदाइश के इन मरहलों पर ग़ौर करे, वह समझ जाएगा कि इस कारख़ाने का मालिक कितना महान और हिकमत वाला है। यही अल्लाह हमें रिज़्क़ देता है, हमें बीमारी और सेहत देता है, और वही हमें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी के हर पल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में अपनी उम्र गुज़ारनी चाहिए, ताकि जब हम इस कमज़ोर दुनिया से रुख़्सत हों, तो हम अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनें।

याद रखिए—यह ज़िंदगी के बदलते हालात हमें सिखाते हैं कि असली ताक़त अल्लाह के पास है, और उसी की राह पर चलना ही हमारी कामयाबी है।



📜 आयत 52-56 — सूरा अर-रूम

52فَإِنَّكَ لَا تُسْمِعُ الْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ الصُّمَّ الدُّعَاءَ إِذَا وَلَّوْا مُدْبِرِينَ
(ऐ रसूल) तुम तो (अपनी) आवाज़ न मुर्दो ही को सुना सकते हो और न बहरों को सुना सकते हो (ख़ुसूसन) जब वह पीठ फेरकर चले जाएँ
53وَمَا أَنتَ بِهَادِ الْعُمْيِ عَن ضَلَالَتِهِمْ ۖ إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِآيَاتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ
और न तुम अंधों को उनकी गुमराही से (फेरकर) राह पर ला सकते हो तो तुम तो बस उन्हीं लोगों को सुना (समझा) सकते हो जो हमारी आयतों को दिल से मानें फिर यही लोग इस्लाम लाने वाले हैं
54۞ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُم مِّن ضَعْفٍ ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعْدِ ضَعْفٍ قُوَّةً ثُمَّ جَعَلَ مِن بَعْدِ قُوَّةٍ ضَعْفًا وَشَيْبَةً ۚ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَلِيمُ الْقَدِيرُ
खुदा ही तो है जिसने तुम्हें (एक निहायत) कमज़ोर चीज़ (नुत्फे) से पैदा किया फिर उसी ने (तुम में) बचपने की कमज़ोरी के बाद (शबाब की) क़ूवत अता की फिर उसी ने (तुममें जवानी की) क़ूवत के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा पैदा कर दिया वह जो चाहता पैदा करता है-और वही बड़ा वाकिफकार और (हर चीज़ पर) क़ाबू रखता है
55وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُقْسِمُ الْمُجْرِمُونَ مَا لَبِثُوا غَيْرَ سَاعَةٍ ۚ كَذَٰلِكَ كَانُوا يُؤْفَكُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी तो गुनाहगार लोग कसमें खाएँगें कि वह (दुनिया में) घड़ी भर से ज्यादा नहीं ठहरे यूँ ही लोग (दुनिया में भी) इफ़तेरा परदाज़ियाँ करते रहे
56وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَالْإِيمَانَ لَقَدْ لَبِثْتُمْ فِي كِتَابِ اللَّهِ إِلَىٰ يَوْمِ الْبَعْثِ ۖ فَهَٰذَا يَوْمُ الْبَعْثِ وَلَٰكِنَّكُمْ كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और ईमान दिया गया है जवाब देगें कि (हाए) तुम तो ख़ुदा की किताब के मुताबिक़ रोज़े क़यामत तक (बराबर) ठहरे रहे फिर ये तो क़यामत का ही दिन है मगर तुम लोग तो उसका यक़ीन ही न रखते थे
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
54आयत

अनुवाद — अर-रूम 54

सूरा अर-रूम आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : खुदा ही तो है जिसने तुम्हें (एक निहायत) कमज़ोर चीज़…

सूरा आयत 54/60 — सूरा अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-रूम सुनें, सूरा अर-रूम अनुवाद, सूरा अर-रूम mp3, सूरा अर-रूम pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए