अल-अहज़ाब · 64/73
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अहज़ाब
إِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الْكَافِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا ۝٦٤
Innal laaha la`anal kaafireena wa a`adda lahum sa`eeraa
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • लअना (لَعَنَ): अर्थात रहमत से दूर करना, फिटकारना, अभिशाप देना।
  • सईर (سَعِيرًا): अत्यधिक प्रज्वलित और भड़कती हुई आग।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में काफ़िरों की स्थिति स्पष्ट कर दी है कि उन्होंने जब सत्य को जानते हुए भी उसे ठुकराया और अल्लाह की निशानियों को झुठलाया, तो अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से महरूम कर दिया और उन पर अपनी लानत (फिटकार) भेजी। यह लानत दुनिया और आख़िरत दोनों में उनके साथ है — दुनिया में वे अल्लाह की हिफ़ाज़त और नज़र-ए-करम से वंचित रहते हैं, और आख़िरत में उनके लिए ऐसी आग तैयार की गई है जो सदैव भड़कती रहेगी, कभी ठंडी न होगी और न ही बुझेगी।

यह आग उनका स्थायी ठिकाना होगी — वे उसमें हमेशा रहेंगे, कभी बाहर नहीं निकल पाएँगे। उस दिन उनका कोई मित्र न होगा जो उनकी मदद कर सके, और न कोई सहायक जो उन्हें उस यातना से बचा सके। जब उनके चेहरे आग में पलटे जाएँगे, तब वे पछताते हुए कहेंगे: "काश! हमने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया होता और उसके रसूल की बात मानी होती!" लेकिन वह पछतावा उन्हें कोई लाभ नहीं देगा।

यह आयत उन काफ़िरों के बारे में भी है जिन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ का विरोध किया और उनके खिलाफ साज़िशें रचीं — उन्हें दुनिया में भी सज़ा मिली (जैसे बद्र के मैदान में) और आख़िरत में भी उनके लिए भड़कती हुई आग तैयार है।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक गंभीर चेतावनी है कि अल्लाह की रहमत से महरूम होने से बड़ी कोई हानि नहीं। जिसे अल्लाह ने ठुकरा दिया, उसे कोई अपना नहीं सकता। इसलिए हे मुसलमान! अपने ईमान की हिफ़ाज़त करो, अपने अमल को सुधारो, और उन लोगों की तरह न बनो जिन्होंने सत्य को जानकर भी उसे छोड़ दिया। अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी ओर लौटते हैं, उसके रसूल ﷺ की सुन्नत को थामते हैं, और अपनी ज़िंदगी को उसके हुक्म के अनुसार ढालते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें उस आग से बचाकर जन्नत की ओर ले जाता है — और जन्नत ही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 62-66 — सूरा अल-अहज़ाब

62سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
जो लोग पहले गुज़र गए उनके बारे में (भी) खुदा की (यही) आदत (जारी) रही और तुम खुदा की आदत में हरगिज़ तग़य्युर तबद्दुल न पाओगे
63يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ ۚ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا
(ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते हैं (तुम उनसे) कह दो कि उसका इल्म तो बस खुदा को है और तुम क्या जानो शायद क़यामत क़रीब ही हो
64إِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الْكَافِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا
ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है
65خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
जिसमें वह हमेशा अबदल आबाद रहेंगे न किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे न मद्दगार
66يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَا أَطَعْنَا اللَّهَ وَأَطَعْنَا الرَّسُولَا
जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें तो उस दिन अफ़सोसनाक लहजे में कहेंगे ऐ काश हमने खुदा की इताअत की होती और रसूल का कहना माना होता
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 64

सूरा अल-अहज़ाब आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके…

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Monday, September 28, 2026

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