अल-अहज़ाब · 65/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا ۝٦٥
Khaalideena feehaaa abadaa, laa yajidoona waliyyanw wa laa naseeraa
📖 हिंदी अर्थ
जिसमें वह हमेशा अबदल आबाद रहेंगे न किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे न मद्दगार
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَالِدِينَ – हमेशा रहने वाले
  • أَبَدًا – सदैव, हमेशा के लिए
  • وَلِيًّا – मित्र, संरक्षक, मददगार
  • نَصِيرًا – सहायक, मदद करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में काफ़िरों के अंजाम को बयान किया है। ये वो लोग हैं जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ का इनकार किया, और अपनी सारी ज़िंदगी अल्लाह की नाफ़रमानी में गुज़ार दी। उनके लिए जहन्नम की आग तैयार की गई है, जो बहुत तेज़ और भड़की हुई होगी। वे उसमें हमेशा हमेशा के लिए रहेंगे — कोई अंत नहीं, कोई छुटकारा नहीं।

सबसे बड़ी सज़ा ये होगी कि उन्हें वहाँ कोई वली (मित्र/संरक्षक) नहीं मिलेगा जो उनकी मदद करे, और न ही कोई नसीर (सहायक) होगा जो उन्हें उस आग से बचा सके। न कोई सिफ़ारिश करने वाला, न कोई बचाने वाला। वे बिल्कुल अकेले होंगे, बेसहारा, और उनकी चीखें और फ़रियादें बेकार जाएँगी।

उस दिन जब उनके चेहरे आग में उलटे-पलटे जाएँगे, तो वे पछताते हुए कहेंगे: "काश! हमने अल्लाह की इताअत की होती और रसूल की फ़रमाबरदारी की होती!" लेकिन ये पछतावा उस वक़्त बेकार होगा जब फैसला हो चुका होगा।

दावती पहलू:

ये आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा है ताकि हम उसे पहचानें, उसकी इबादत करें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। जो लोग इस मौके को गंवा देंगे, वे ऐसी जगह जाएँगे जहाँ से लौटना नामुमकिन है।

लेकिन अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है! उसने हमें मौका दिया है कि हम आज ही तौबा कर लें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ, और अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की मुहब्बत को अपने दिलों में बसाएँ। जो लोग दुनिया में अल्लाह को अपना वली बना लेते हैं, अल्लाह भी उन्हें क़यामत के दिन अपनी पनाह में ले लेता है।

याद रखिए! ये दुनिया बहुत छोटी है, और आख़िरत हमेशा की ज़िंदगी है। आज का एक अच्छा अमल, कल की नजात का ज़रिया बन सकता है। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 63-67 — अल-अहज़ाब

63يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ ۚ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا
(ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते हैं (तुम उनसे) कह दो कि उसका इल्म तो बस खुदा को है और तुम क्या जानो शायद क़यामत क़रीब ही हो
64إِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الْكَافِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا
ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है
65خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
जिसमें वह हमेशा अबदल आबाद रहेंगे न किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे न मद्दगार
66يَوْمَ تُقَلَّبُ وُجُوهُهُمْ فِي النَّارِ يَقُولُونَ يَا لَيْتَنَا أَطَعْنَا اللَّهَ وَأَطَعْنَا الرَّسُولَا
जिस दिन उनके मुँह जहन्नुम की तरफ फेर दिए जाएँगें तो उस दिन अफ़सोसनाक लहजे में कहेंगे ऐ काश हमने खुदा की इताअत की होती और रसूल का कहना माना होता
67وَقَالُوا رَبَّنَا إِنَّا أَطَعْنَا سَادَتَنَا وَكُبَرَاءَنَا فَأَضَلُّونَا السَّبِيلَا
और कहेंगे कि परवरदिगारहमने अपने सरदारों अपने बड़ों का कहना माना तो उन्हों ही ने हमें गुमराह कर दिया
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
65आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 65

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Tuesday, August 18, 2026

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