अल-अहज़ाब · 63/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ ۚ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا ۝٦٣
Yas`alukan naasu `anis Saa`ati qul innamaa `ilmuhaa `indal laah; wa maa yudreeka la`allas Saa`ata takoonu qareebaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते हैं (तुम उनसे) कह दो कि उसका इल्म तो बस खुदा को है और तुम क्या जानो शायद क़यामत क़रीब ही हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الساعة (अस-साआह): क़ियामत का दिन, जिस दिन सब कुछ समाप्त हो जाएगा और सब लोग हिसाब के लिए उठ खड़े होंगे।
  • علمها (इल्मुहा): इसका ज्ञान, इसके आने का समय।
  • ما يدريك (मा युद्रीक): तुम्हें क्या पता, तुम्हें क्या बताएगा।
  • قريبًا (क़रीबन): निकट, पास।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! लोग आपसे क़ियामत के आने का समय पूछते हैं—मुशरिकीन इसे असंभव समझकर मज़ाक़ और इनकार के तौर पर पूछते हैं, और यहूदी भी आपको परखने के लिए इसके बारे में सवाल करते हैं। अल्लाह आपको हिदायत देता है कि आप उन्हें जवाब दें: "इसका ज्ञान तो केवल अल्लाह के पास है।" यह उन चीज़ों में से है जो अल्लाह ने अपने पास रखी हैं, और उसने न किसी फ़रिश्ते को बताया और न किसी नबी को। आपका काम केवल डराना और सचेत करना है, न कि समय बताना।

फिर अल्लाह अपने नबी से फ़रमाता है: "और तुम्हें क्या पता, शायद क़ियामत बहुत निकट हो!" यानी ऐ नबी! तुम्हें इसका इल्म नहीं, लेकिन यह बहुत क़रीब हो सकती है। इस जुमले में एक गहरी धमकी और चेतावनी है—लोग इसे दूर समझकर लापरवाह हैं, जबकि अल्लाह की नज़र में यह बहुत पास है। हर आने वाली चीज़ क़रीब है, और मौत के साथ हर इंसान के लिए उसकी क़ियामत आ जाती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें उन चीज़ों में उलझना नहीं चाहिए जो अल्लाह ने अपने पास रखी हैं। हमारा काम है कि हम क़ियामत के लिए तैयारी करें—अपने अमल सुधारें, अल्लाह की इबादत करें, और उसकी रहमत के तलबगार रहें। क़ियामत क़रीब है, यह सोचकर हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाना चाहिए। यही वो रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा और जहन्नम के अज़ाब से बचाएगा। अल्लाह ने हमें मोहलत दी है—यह उसकी रहमत है कि हम तौबा कर सकते हैं, अपने गुनाहों से बाज़ आ सकते हैं, और अपनी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकते हैं। आओ, हम इस नेमत का शुक्र अदा करें और अपने रब की तरफ़ पलटें, क्योंकि वही सबसे बड़ा क्षमा करने वाला और दयालु है।

🎧 सुनें

📜 आयत 61-65 — अल-अहज़ाब

61مَّلْعُونِينَ ۖ أَيْنَمَا ثُقِفُوا أُخِذُوا وَقُتِّلُوا تَقْتِيلًا
लानत के मारे जहाँ कहीं हत्थे चढ़े पकड़े गए और फिर बुरी तरह मार डाले गए
62سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۖ وَلَن تَجِدَ لِسُنَّةِ اللَّهِ تَبْدِيلًا
जो लोग पहले गुज़र गए उनके बारे में (भी) खुदा की (यही) आदत (जारी) रही और तुम खुदा की आदत में हरगिज़ तग़य्युर तबद्दुल न पाओगे
63يَسْأَلُكَ النَّاسُ عَنِ السَّاعَةِ ۖ قُلْ إِنَّمَا عِلْمُهَا عِندَ اللَّهِ ۚ وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّ السَّاعَةَ تَكُونُ قَرِيبًا
(ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते हैं (तुम उनसे) कह दो कि उसका इल्म तो बस खुदा को है और तुम क्या जानो शायद क़यामत क़रीब ही हो
64إِنَّ اللَّهَ لَعَنَ الْكَافِرِينَ وَأَعَدَّ لَهُمْ سَعِيرًا
ख़ुदा ने क़ाफिरों पर यक़ीनन लानत की है और उनके लिए जहन्नुम को तैयार कर रखा है
65خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ لَّا يَجِدُونَ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
जिसमें वह हमेशा अबदल आबाद रहेंगे न किसी को अपना सरपरस्त पाएँगे न मद्दगार
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 63

सूरा अल-अहज़ाब आयत 63 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) लोग तुमसे क़यामत के बारे में पूछा करते…

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Tuesday, August 18, 2026

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