अल-अहज़ाब · 71/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا ۝٧١
Yuslih lakum a`maalakum wa yaghfir lakum zunoobakum; wa mai yuti`il laaha wa Rasoolahoo faqad faaza fawzan `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
तो खुदा तुम्हारी कारगुज़ारियों को दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और जिस शख्स ने खुदा और उसके रसूल की इताअत की वह तो अपनी मुराद को खूब अच्छी तरह पहुँच गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ: तुम्हारे कर्मों को सुधार दे, उन्हें स्वीकार कर ले और उनमें बरकत दे।
  • وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ: तुम्हारे पापों को क्षमा कर दे और उन्हें मिटा दे।
  • فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا: बड़ी सफलता और महान कामयाबी प्राप्त कर ली।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने ईमानवालों से वादा करता है कि यदि वे तक़्वा (अल्लाह का डर) अपनाएँ और हमेशा सच्ची, सीधी और सही बात बोलें—जो झूठ, धोखे, चापलूसी और फिज़ूल से पाक हो—तो अल्लाह उनके कर्मों को सुधार देगा। यानी वह उनकी नेकियों को क़बूल करेगा, उनके अच्छे कामों को बरकत देगा और उन्हें ऐसे काम करने की तौफ़ीक़ देगा जो उसकी रज़ा के मुताबिक़ हों। साथ ही, वह उनके गुनाहों को माफ़ कर देगा और उन्हें उनकी ग़लतियों की सज़ा से बचा लेगा।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जो कोई अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) की इताअत करेगा—यानी जो हुक्म दिया गया है उसे मानेगा और जिससे रोका गया है उससे बचेगा—तो वह सचमुच महान सफलता पा गया। यह सफलता सिर्फ़ दुनिया की कामयाबी नहीं है, बल्कि यह वह फ़ौज़ है जो अल्लाह की रज़ा, जन्नत और हमेशा की ख़ुशी पर मुश्तमिल है। इस फ़ौज़ के आगे दुनिया की हर कामयाबी बेमानी है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़बान को सच्चाई और नेकी पर क़ायम रहना चाहिए, क्योंकि ज़बान की सच्चाई दिल की सच्चाई की निशानी है। जब हमारी ज़बान सीधी होगी, तो हमारे कर्म भी सीधे होंगे, और जब कर्म सीधे होंगे, तो अल्लाह की रहमत और मग़फिरत हमारा हिस्सा बनेगी। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाता है।

इसलिए प्यारे मुसलमानों! हमें अपनी ज़बान को झूठ, ग़ीबत, चुग़ली और बेकार की बातों से बचाना चाहिए और हमेशा सच, साफ़ और नेक बात बोलनी चाहिए। याद रखें, अल्लाह का वादा सच्चा है—जो तक़्वा अपनाएगा और सच बोलेगा, अल्लाह उसके कर्म सुधारेगा और उसके गुनाह माफ़ करेगा। और जो अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करेगा, उसके लिए जन्नत और अल्लाह की रज़ा है—यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 69-73 — अल-अहज़ाब

69يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا ۚ وَكَانَ عِندَ اللَّهِ وَجِيهًا
ऐ ईमानवालों (ख़बरदार कहीं) तुम लोग भी उनके से न हो जाना जिन्होंने मूसा को तकलीफ दी तो खुदा ने उनकी तोहमतों से मूसा को बरी कर दिया और मूसा खुदा के नज़दीक एक रवादार (इज्ज़त करने वाले) (पैग़म्बर) थे
70يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا
ऐ ईमानवालों खुदा से डरते रहो और (जब कहो तो) दुरूस्त बात कहा करो
71يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا
तो खुदा तुम्हारी कारगुज़ारियों को दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और जिस शख्स ने खुदा और उसके रसूल की इताअत की वह तो अपनी मुराद को खूब अच्छी तरह पहुँच गया
72إِنَّا عَرَضْنَا الْأَمَانَةَ عَلَى السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالْجِبَالِ فَأَبَيْنَ أَن يَحْمِلْنَهَا وَأَشْفَقْنَ مِنْهَا وَحَمَلَهَا الْإِنسَانُ ۖ إِنَّهُ كَانَ ظَلُومًا جَهُولًا
बेशक हमने (रोज़े अज़ल) अपनी अमानत (इताअत इबादत) को सारे आसमान और ज़मीन पहाड़ों के सामने पेश किया तो उन्होंने उसके (बार) उठाने से इन्कार किया और उससे डर गए और आदमी ने उसे (बे ताम्मुल) उठा लिया बेशक इन्सान (अपने हक़ में) बड़ा ज़ालिम (और) नादान है
73لِّيُعَذِّبَ اللَّهُ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْمُشْرِكِينَ وَالْمُشْرِكَاتِ وَيَتُوبَ اللَّهُ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ۗ وَكَانَ اللَّهُ غَفُورًا رَّحِيمًا
इसका नतीजा यह हुआ कि खुदा मुनाफिक़ मर्दों और मुनाफिक़ औरतों और मुशरिक मर्दों और मुशरिक औरतों को (उनके किए की) सज़ा देगा और ईमानदार मर्दों और ईमानदार औरतों की (तक़सीर अमानत की) तौबा क़ुबूल फरमाएगा और खुदा तो बड़ा बख़शने वाला मेहरबान है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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71आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 71

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Tuesday, August 18, 2026

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