अल-अहज़ाब · 70/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا ۝٧٠
Yaaa aiyuhal lazeena aamanut taqul laaha wa qooloo qawlan sadeedaa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानवालों खुदा से डरते रहो और (जब कहो तो) दुरूस्त बात कहा करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّقُوا الله: अल्लाह से डरो, उसकी आज्ञाओं का पालन करो और उसकी मनाही से बचो।
  • قَوْلًا سَدِيدًا: सीधी, सच्ची, सही और ठोस बात जो सत्य पर आधारित हो, जिसमें कोई झूठ, धोखा या बुराई न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान लाने वालों! तुम अल्लाह से डरो और उसकी ताक़त का एहतराम करो। तक़वा यानी अल्लाह का डर ही वह चीज़ है जो इंसान को हर बुराई से रोकती है और उसे अच्छाई की राह पर चलाती है। जब दिल में अल्लाह का डर होता है, तो ज़ुबान भी सँभल जाती है और इंसान हर मामले में सीधी और सच्ची बात कहता है।

अल्लाह तआला तुम्हें हुक्म देता है कि अपनी ज़िंदगी के हर मामले में — बातचीत में, मामलात में, रिश्तों में, कारोबार में — हमेशा सच्ची, साफ़ और सीधी बात बोलो। ऐसी बात जो सच्चाई पर आधारित हो, जिसमें कोई मिलावट न हो, कोई धोखा न हो, कोई चापलूसी न हो और न ही कोई झूठ। सीधी बात वह है जो हक़ और इंसाफ़ पर हो, जो सामने वाले को नुक़सान न पहुँचाए और जो अल्लाह को पसंद हो।

याद रखो कि ज़ुबान इंसान के अंगों में सबसे अहम है। जो बात दिल में होती है, वही ज़ुबान पर आती है। अगर दिल साफ़ होगा तो ज़ुबान भी साफ़ होगी। और अगर ज़ुबान सच्ची होगी, तो अल्लाह उसके बदले में इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देगा। सच्ची बात इंसान को जन्नत की राह दिखाती है, और झूठी बात जहन्नम की तरफ ले जाती है।

इस आयत में अल्लाह ने तक़वा और सच्ची बात को एक साथ जोड़ा है, क्योंकि दोनों का आपस में गहरा ताल्लुक़ है। जो इंसान अल्लाह से डरता है, वह झूठ नहीं बोल सकता। और जो सच बोलता है, उसके दिल में अल्लाह का डर पैदा हो जाता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को कामयाबी की मंज़िल तक पहुँचाता है।

प्यारे भाइयो और बहनों! आज की दुनिया में जहाँ झूठ, धोखा और फरेब आम हो गया है, वहाँ अल्लाह हमें सिखाता है कि सच्चाई और सीधी बात ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब करेगा। जब हम सच बोलेंगे, तो लोग हम पर भरोसा करेंगे, हमारे रिश्ते मज़बूत होंगे, हमारा समाज सुधरेगा और अल्लाह की रहमत हम पर नाज़िल होगी। याद रखें, सच्ची बात कभी-कभी भले ही कड़वी लगे, लेकिन उसका अंजाम हमेशा मीठा होता है। अल्लाह से डरो और हमेशा सीधी बात बोलो — यही आज की आयत का पैग़ाम है।



📜 आयत 68-72 — अल-अहज़ाब

68رَبَّنَا آتِهِمْ ضِعْفَيْنِ مِنَ الْعَذَابِ وَالْعَنْهُمْ لَعْنًا كَبِيرًا
परवरदिगारा (हम पर तो अज़ाब सही है मगर) उन लोगों पर दोहरा अज़ाब नाज़िल कर और उन पर बड़ी से बड़ी लानत कर
69يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا ۚ وَكَانَ عِندَ اللَّهِ وَجِيهًا
ऐ ईमानवालों (ख़बरदार कहीं) तुम लोग भी उनके से न हो जाना जिन्होंने मूसा को तकलीफ दी तो खुदा ने उनकी तोहमतों से मूसा को बरी कर दिया और मूसा खुदा के नज़दीक एक रवादार (इज्ज़त करने वाले) (पैग़म्बर) थे
70يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَقُولُوا قَوْلًا سَدِيدًا
ऐ ईमानवालों खुदा से डरते रहो और (जब कहो तो) दुरूस्त बात कहा करो
71يُصْلِحْ لَكُمْ أَعْمَالَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ ۗ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ فَقَدْ فَازَ فَوْزًا عَظِيمًا
तो खुदा तुम्हारी कारगुज़ारियों को दुरूस्त कर देगा और तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और जिस शख्स ने खुदा और उसके रसूल की इताअत की वह तो अपनी मुराद को खूब अच्छी तरह पहुँच गया
72إِنَّا عَرَضْنَا الْأَمَانَةَ عَلَى السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالْجِبَالِ فَأَبَيْنَ أَن يَحْمِلْنَهَا وَأَشْفَقْنَ مِنْهَا وَحَمَلَهَا الْإِنسَانُ ۖ إِنَّهُ كَانَ ظَلُومًا جَهُولًا
बेशक हमने (रोज़े अज़ल) अपनी अमानत (इताअत इबादत) को सारे आसमान और ज़मीन पहाड़ों के सामने पेश किया तो उन्होंने उसके (बार) उठाने से इन्कार किया और उससे डर गए और आदमी ने उसे (बे ताम्मुल) उठा लिया बेशक इन्सान (अपने हक़ में) बड़ा ज़ालिम (और) नादान है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
73आयत
मदनीRevelation
70आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 70

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Tuesday, August 18, 2026

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