Falammaa qadainaa `alaihil mawta ma dallahum `alaa mawtiheee illaa daaabbatul ardi taakulu minsa atahoo falammaa kharra tabaiyanatil jinnu al law kaanoo ya`lamoonal ghaiba maa labisoo fil `azaabil muheen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब हमने सुलेमान पर मौत का हुक्म जारी किया तो (मर गए) मगर लकड़ी के सहारे खड़े थे और जिन्नात को किसी ने उनके मरने का पता न बताया मगर ज़मीन की दीमक ने कि वह सुलेमान के असा को खा रही थी फिर (जब खोखला होकर टूट गया और) सुलेमान (की लाश) गिरी तो जिन्नात ने जाना कि अगर वह लोग ग़ैब वॉ (ग़ैब के जानने वाले) होते तो (इस) ज़लील करने वाली (काम करने की) मुसीबत में न मुब्तिला रहते
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پھر جب ہم نے ان کے لئے موت کا حکم صادر کیا تو کسی چیز سے ان کا مرنا معلوم نہ ہوا مگر گھن کے کیڑے سے جو ان کے عصا کو کھاتا رہا۔ جب عصا گر پڑا تب جنوں کو معلوم ہوا (اور کہنے لگے) کہ اگر وہ غیب جانتے ہوتے تو ذلت کی تکلیف میں نہ رہتے
مِنْسَأَتَهُ: उनकी लाठी (सोलोमन अलैहिस्सलाम की छड़ी)।
دَابَّةُ الْأَرْضِ: धरती का कीड़ा, अर्थात् घुन (दीमक)।
خَرَّ: गिर पड़े।
تَبَيَّنَتِ الْجِنُّ: जिन्नात ने स्पष्ट रूप से जान लिया और समझ लिया।
الْعَذَابِ الْمُهِينِ: अपमानजनक यातना, अर्थात् वह कठोर परिश्रम और दासता जिसमें वे सोलोमन अलैहिस्सलाम के अधीन रखे गए थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला ने हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम पर मृत्यु का फैसला सुनाया और वे अपनी लाठी के सहारे खड़े-खड़े ही दुनिया से रुख़सत हो गए, तो उनकी मृत्यु की खबर किसी को नहीं हुई। जिन्नात यह समझते रहे कि वे अभी जीवित हैं और उनके आदेशों का पालन करते रहे। उनकी मृत्यु का पता तब चला जब धरती के एक छोटे से कीड़े (घुन/दीमक) ने उनकी लाठी को खोखला कर दिया। जैसे ही लाठी टूटी और सुलेमान अलैहिस्सलाम का शरीर ज़मीन पर गिरा, जिन्नात को सत्य का पता चला। उस समय उन्हें यह बात स्पष्ट हो गई कि यदि वे वास्तव में ग़ैब (छिपी हुई बातें) जानते होते, तो वे इस अपमानजनक यातना और कठोर परिश्रम में न पड़े रहते। वे सुलेमान अलैहिस्सलाम की मृत्यु के बाद भी उनके लिए काम करते रहे, यह समझते हुए कि वे जीवित हैं और उनकी निगरानी कर रहे हैं।
इस घटना में अल्लाह तआला ने यह सिद्ध कर दिया कि जिन्नात को ग़ैब का ज्ञान नहीं है। यह उन लोगों के विश्वास का खंडन है जो समझते हैं कि जिन्नात छिपी हुई बातें जानते हैं। यदि उन्हें ग़ैब का ज्ञान होता, तो वे सुलेमान अलैहिस्सलाम की मृत्यु को पहले ही भाँप लेते और उस अपमानजनक दासता और कठिन श्रम से मुक्त हो जाते।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह क़ुरआनी वाक़िया हमें सिखाता है कि ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह तआला को है। कोई भी मख़लूक़ — चाहे वह इंसान हो या जिन्न — उस ज्ञान का मालिक नहीं है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में केवल अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसी की इबादत करनी चाहिए। जो लोग ज्योतिषियों, काहिनों या जिन्नात के नाम पर ग़ैब की बातें बताने का दावा करते हैं, वे झूठे हैं। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की तदबीर (योजना) अद्भुत है — वह एक छोटे से कीड़े के माध्यम से बड़ी से बड़ी सच्चाई को प्रकट कर सकता है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में अल्लाह के फैसलों पर पूर्ण विश्वास रखें और उसकी हर मख़लूक़ में उसकी कुदरत (शक्ति) की निशानियाँ देखें। यह वाक़िया हमें याद दिलाता है कि मृत्यु एक सच्चाई है, और हर जीवित प्राणी को एक दिन मरना है। इसलिए हमें मृत्यु से पहले अच्छे कर्म करने चाहिए और अल्लाह की राह में अपना जीवन बिताना चाहिए।
फिर जब हमने सुलेमान पर मौत का हुक्म जारी किया तो (मर गए) मगर लकड़ी के सहारे खड़े थे और जिन्नात को किसी ने उनके मरने का पता न बताया मगर ज़मीन की दीमक ने कि वह सुलेमान के असा को खा रही थी फिर (जब खोखला होकर टूट गया और) सुलेमान (की लाश) गिरी तो जिन्नात ने जाना कि अगर वह लोग ग़ैब वॉ (ग़ैब के जानने वाले) होते तो (इस) ज़लील करने वाली (काम करने की) मुसीबत में न मुब्तिला रहते
और हवा को सुलेमान का (ताबेइदार बना दिया था) कि उसकी सुबह की रफ्तार एक महीने (मुसाफ़त) की थी और इसी तरह उसकी शाम की रफ्तार एक महीने (के मुसाफत) की थी और हमने उनके लिए तांबे (को पिघलाकर) उसका चश्मा जारी कर दिया था और जिन्नात (को उनका ताबेदार कर दिया था कि उन) में कुछ लोग उनके परवरदिगार के हुक्म से उनके सामने काम काज करते थे और उनमें से जिसने हमारे हुक्म से इनहराफ़ किया है उसे हम (क़यामत में) जहन्नुम के अज़ाब का मज़ा चख़ाँएगे
ग़रज़ सुलेमान को जो बनवाना मंज़ूर होता ये जिन्नात उनके लिए बनाते थे (जैसे) मस्जिदें, महल, क़िले और (फरिश्ते अम्बिया की) तस्वीरें और हौज़ों के बराबर प्याले और (एक जगह) गड़ी हुई (बड़ी बड़ी) देग़ें (कि एक हज़ार आदमी का खाना पक सके) ऐ दाऊद की औलाद शुक्र करते रहो और मेरे बन्दों में से शुक्र करने वाले (बन्दे) थोड़े से हैं
फिर जब हमने सुलेमान पर मौत का हुक्म जारी किया तो (मर गए) मगर लकड़ी के सहारे खड़े थे और जिन्नात को किसी ने उनके मरने का पता न बताया मगर ज़मीन की दीमक ने कि वह सुलेमान के असा को खा रही थी फिर (जब खोखला होकर टूट गया और) सुलेमान (की लाश) गिरी तो जिन्नात ने जाना कि अगर वह लोग ग़ैब वॉ (ग़ैब के जानने वाले) होते तो (इस) ज़लील करने वाली (काम करने की) मुसीबत में न मुब्तिला रहते
और (क़ौम) सबा के लिए तो यक़ीनन ख़ुद उन्हीं के घरों में (कुदरते खुदा की) एक बड़ी निशानी थी कि उनके शहर के दोनों तरफ दाहिने बाएं (हरे-भरे) बाग़ात थे (और उनको हुक्म था) कि अपने परवरदिगार की दी हुई रोज़ी Âाओ (पियो) और उसका शुक्र अदा करो (दुनिया में) ऐसा पाकीज़ा शहर और (आख़ेरत में) परवरदिगार सा बख्शने वाला
इस पर भी उन लोगों ने मुँह फेर लिया (और पैग़म्बरों का कहा न माना) तो हमने (एक ही बन्द तोड़कर) उन पर बड़े ज़ोरों का सैलाब भेज दिया और (उनको तबाह करके) उनके दोनों बाग़ों के बदले ऐसे दो बाग़ दिए जिनके फल बदमज़ा थे और उनमें झाऊ था और कुछ थोड़ी सी बेरियाँ थी
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