सबा · 41/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
قَالُوا سُبْحَانَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِم ۖ بَلْ كَانُوا يَعْبُدُونَ الْجِنَّ ۖ أَكْثَرُهُم بِهِم مُّؤْمِنُونَ ۝٤١
Qaaloo Subhaanaka Anta waliyyunaa min doonihim bal kaanoo ya`budoonal jinna aksaruhum bihim mu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
तू ही हमारा मालिक है न ये लोग (ये लोग हमारी नहीं) बल्कि जिन्नात (खबाएस भूत-परेत) की परसतिश करते थे कि उनमें के अक्सर लोग उन्हीं पर ईमान रखते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سُبْحَانَكَ: हे अल्लाह! तू पाक-पवित्र है, हर कमी और दोष से मुक्त है।
  • وَلِيُّنَا: हमारा संरक्षक, हमारा स्वामी और हमारा सहारा।
  • الْجِنَّ: यहाँ इससे मुराद शैतान और बुरी आत्माएँ हैं।
  • مُؤْمِنُونَ: यक़ीन रखने वाले, मानने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस दिन अल्लाह तआला सभी मख़लूक़ात (प्राणियों) को हाशिर (एकत्र) करेगा, उस दिन वह फ़रिश्तों से पूछेगा: "क्या ये लोग तुम्हारी इबादत करते थे?" तो फ़रिश्ते, जो अल्लाह के नेक और वफ़ादार बंदे हैं, तुरंत अल्लाह की पाकी बयान करते हुए कहेंगे: "हे अल्लाह! तू पाक-पवित्र है, हर ऐब और कमी से मुक्त है। हम तेरी इबादत के सिवा किसी और की इबादत के बारे में सोच भी नहीं सकते। तू ही हमारा वली (संरक्षक) है, हमारा मालिक और हमारा सहारा है। हमारा कोई ताल्लुक़ इन मुशरिकों से नहीं, न हम उनके क़ऱीब हैं और न उनके कामों से हमारा कोई वास्ता है।"

फिर फ़रिश्ते यह भी बयान करेंगे कि असल में ये लोग हमारी इबादत नहीं करते थे, बल्कि ये शैतानों और जिन्नात की इबादत करते थे। शैतानों ने इनके लिए हमारी इबादत को ख़ूबसूरत बनाकर पेश किया, और इन्हें यह वहम में डाला कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, इसलिए उनकी इबादत करो। इस तरह ये लोग दरअसल शैतानों के कहने पर चलते थे और उनकी इबादत करते थे। इनमें से अधिकतर लोग जिन्नात (शैतानों) पर ईमान रखते थे, यानी उनकी बातों को सच मानते थे और उनके हुक्म की पैरवी करते थे।

यह आयत हमें बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है। फ़रिश्ते, जो अल्लाह के सबसे करीबी और नेक बंदे हैं, वे भी अल्लाह की पाकी बयान करते हैं और उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करते। हमें भी चाहिए कि हम सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें और उसी पर भरोसा रखें। शैतान और बुरी आत्माएँ इंसान को गुमराह करने की कोशिश करती हैं, इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की किताब (क़ुरआन) और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत को पकड़े रहना चाहिए। याद रखें, अल्लाह ही हमारा असली वली और मददगार है, और उसी की राह पर चलने में ही हमारी भलाई और कामयाबी है।



📜 आयत 39-43 — सबा

39قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَيَقْدِرُ لَهُ ۚ وَمَا أَنفَقْتُم مِّن شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है और जो कुछ भी तुम लोग (उसकी राह में) ख़र्च करते हो वह उसका ऐवज देगा और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देनेवाला है
40وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَائِكَةِ أَهَٰؤُلَاءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
41قَالُوا سُبْحَانَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِم ۖ بَلْ كَانُوا يَعْبُدُونَ الْجِنَّ ۖ أَكْثَرُهُم بِهِم مُّؤْمِنُونَ
तू ही हमारा मालिक है न ये लोग (ये लोग हमारी नहीं) बल्कि जिन्नात (खबाएस भूत-परेत) की परसतिश करते थे कि उनमें के अक्सर लोग उन्हीं पर ईमान रखते थे
42فَالْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَّفْعًا وَلَا ضَرًّا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
तब (खुदा फरमाएगा) आज तो तुममें से कोई न दूसरे के फायदे ही पहुँचाने का इख्तेयार रखता है और न ज़रर का और हम सरकशों से कहेंगे कि (आज) उस अज़ाब के मज़े चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे
43وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا رَجُلٌ يُرِيدُ أَن يَصُدَّكُمْ عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُكُمْ وَقَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا إِفْكٌ مُّفْتَرًى ۚ وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और जब उनके सामने हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें पढ़ी जाती थीं तो बाहम कहते थे कि ये (रसूल) भी तो बस (हमारा ही जैसा) आदमी है ये चाहता है कि जिन चीज़ों को तुम्हारे बाप-दादा पूजते थे (उनकी परसतिश) से तुम को रोक दें और कहने लगे कि ये (क़ुरान) तो बस निरा झूठ है और अपने जी का गढ़ा हुआ है और जो लोग काफ़िर हो बैठो जब उनके पास हक़ बात आयी तो उसके बारे में कहने लगे कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
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अनुवाद — सबा 41

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Tuesday, August 18, 2026

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