सबा · 42/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
فَالْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَّفْعًا وَلَا ضَرًّا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ۝٤٢
Fal Yawma laa yamliku ba`dukum liba`din naf`anw wa laa darraa; wa naqoolu lilzeena zalamoo zooqoo `azaaban Naaril latee kuntum bihaa tukazziboon
📖 हिंदी अर्थ
तब (खुदा फरमाएगा) आज तो तुममें से कोई न दूसरे के फायदे ही पहुँचाने का इख्तेयार रखता है और न ज़रर का और हम सरकशों से कहेंगे कि (आज) उस अज़ाब के मज़े चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे

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अनुवाद — Tafsir

आज के दिन (क़ियामत के दिन) तुम में से कोई किसी के लिए न तो किसी भलाई (फ़ायदे) का मालिक होगा और न ही किसी बुराई (नुक़सान) का। और हम उन लोगों से कहेंगे जिन्होंने (अपने ऊपर) ज़ुल्म किया (यानी शिर्क और गुनाह किए): "उस आग का अज़ाब चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे।"

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يَمْلِكُ (ला यम्लिकु): अधिकार नहीं रखता, क़ुदरत नहीं रखता।
  • نَفْعًا (नफ़अन): फ़ायदा, भलाई।
  • ضَرًّا (ज़ुर्रन): नुक़सान, बुराई।
  • ظَلَمُوا (ज़लमू): ज़ुल्म किया, यानी शिर्क और नाफ़रमानी करके अपनी जानों पर ज़ुल्म किया।
  • ذُوقُوا (ज़ूक़ू): चखो (मज़ा लो)।
  • تُكَذِّبُونَ (तुकज़्ज़िबून): झुठलाते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस हालत का वर्णन कर रही है जो क़ियामत के दिन होगी, जब सारे लोग अपने-अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए खड़े होंगे। उस दिन वे सारे रिश्ते और संबंध जो दुनिया में थे, सब टूट जाएंगे। जिन लोगों ने दुनिया में गैर-अल्लाह को पूजा था, चाहे वे मूर्तियाँ हों, पीर हों, फ़रिश्ते हों या कोई और मख़लूक़, वे उनके किसी काम न आएंगे। न वे उन्हें कोई फ़ायदा पहुँचा सकेंगे और न ही उनसे कोई नुक़सान दूर कर सकेंगे। क्योंकि उस दिन सारा अधिकार और सारा इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह का होगा। शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का अधिकार भी सिर्फ़ उसे होगा जिसे अल्लाह इजाज़त देगा, और वह भी सिर्फ़ मोमिनों के लिए होगी।

फिर अल्लाह उन ज़ालिमों से कहेगा जिन्होंने अपने ऊपर कुफ़्र और गुनाहों के कारण ज़ुल्म किया: "अब उस आग का अज़ाब चखो जिसे तुम दुनिया में झुठलाया करते थे।" यानी जब दुनिया में उन्हें क़ियामत और जहन्नम के अज़ाब से डराया जाता था, तो वे उसे झूठ कहते थे और मज़ाक़ उड़ाते थे। आज उन्हें वही अज़ाब सामने मिलेगा, और उन्हें अपनी उसी झुठलाने की सज़ा मिलेगी।

यह आयत हमें बहुत बड़ी नसीहत देती है कि हम केवल अल्लाह की इबादत करें और उसी से मदद माँगें। किसी और पर भरोसा करना, किसी और से ऐसी चीज़ें माँगना जो सिर्फ़ अल्लाह ही कर सकता है, यह बड़ा ज़ुल्म है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है कि उसने हमें दुनिया में मौक़ा दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी सुधार लें, तौबा कर लें और सिर्फ़ उसी की तरफ़ रुजू करें। क़ियामत का दिन आने से पहले हमें अपने आपको उस आग से बचाना है, जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह के साथ शिर्क करते हैं और उसकी आयतों को झुठलाते हैं। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उस आग के अज़ाब से बचाए। आमीन।



📜 आयत 40-44 — सूरा सबा

40وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَائِكَةِ أَهَٰؤُلَاءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
41قَالُوا سُبْحَانَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِم ۖ بَلْ كَانُوا يَعْبُدُونَ الْجِنَّ ۖ أَكْثَرُهُم بِهِم مُّؤْمِنُونَ
तू ही हमारा मालिक है न ये लोग (ये लोग हमारी नहीं) बल्कि जिन्नात (खबाएस भूत-परेत) की परसतिश करते थे कि उनमें के अक्सर लोग उन्हीं पर ईमान रखते थे
42فَالْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَّفْعًا وَلَا ضَرًّا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
तब (खुदा फरमाएगा) आज तो तुममें से कोई न दूसरे के फायदे ही पहुँचाने का इख्तेयार रखता है और न ज़रर का और हम सरकशों से कहेंगे कि (आज) उस अज़ाब के मज़े चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे
43وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا رَجُلٌ يُرِيدُ أَن يَصُدَّكُمْ عَمَّا كَانَ يَعْبُدُ آبَاؤُكُمْ وَقَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا إِفْكٌ مُّفْتَرًى ۚ وَقَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और जब उनके सामने हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें पढ़ी जाती थीं तो बाहम कहते थे कि ये (रसूल) भी तो बस (हमारा ही जैसा) आदमी है ये चाहता है कि जिन चीज़ों को तुम्हारे बाप-दादा पूजते थे (उनकी परसतिश) से तुम को रोक दें और कहने लगे कि ये (क़ुरान) तो बस निरा झूठ है और अपने जी का गढ़ा हुआ है और जो लोग काफ़िर हो बैठो जब उनके पास हक़ बात आयी तो उसके बारे में कहने लगे कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
44وَمَا آتَيْنَاهُم مِّن كُتُبٍ يَدْرُسُونَهَا ۖ وَمَا أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمْ قَبْلَكَ مِن نَّذِيرٍ
और (ऐ रसूल) हमने तो उन लोगों को न (आसमानी) किताबें अता की तुम्हें जिन्हें ये लोग पढ़ते और न तुमसे पहले इन लोगों के पास कोई डरानेवाला (पैग़म्बर) भेजा (उस पर भी उन्होंने क़द्र न की)
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अनुवाद — सबा 42

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Tuesday, September 8, 2026

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