सबा · 40/54
अनुवाद उच्चारण — सूरा सबा
وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَائِكَةِ أَهَٰؤُلَاءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ ۝٤٠
Wa yawma yahshuruhum jamee`an summa yaqoolu lilmalaaa`ikati a-haaa`ulaaa`i iyyaakum kaanoo ya`budoon
📖 हिंदी अर्थ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحْشُرُهُمْ (उन्हें इकट्ठा करेगा) – अल्लाह तआला सभी प्राणियों को हश्र के मैदान में एकत्र करेगा।
  • جَمِيعًا (सभी को) – बिना किसी को छोड़े, मुशरिकों और उनके माबूदों सबको।
  • أَهَٰؤُلَاءِ (क्या ये लोग) – इशारा उन मुशरिकों की ओर जो दुनिया में आबिद थे।
  • إِيَّاكُمْ (तुम्हारी ही) – खास तौर पर तुम्हारी इबादत करते थे।

तफसीर:

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब अल्लाह तआला सभी लोगों को – चाहे वे मुशरिक हों या उनके माबूद, कमज़ोर हों या बड़े – सबको एक जगह हश्र के मैदान में इकट्ठा करेगा। फिर वह फ़रिश्तों से पूछेगा, और यह सवाल उन मुशरिकों को शर्मिंदा करने और उनकी तौहीन करने के लिए होगा: "क्या ये लोग जो दुनिया में तुम्हारी पूजा करते थे, क्या वे तुम्हारी ही इबादत करते थे?"

यह सवाल इसलिए किया जाएगा ताकि मुशरिकों पर हुज्जत क़ायम हो जाए और उनका बहाना खत्म हो जाए। फ़रिश्ते उस वक़्त बराअत (बरी होने) का इज़हार करेंगे और कहेंगे कि हम तो तेरे बंदे हैं, हमें इस बात का इल्म ही नहीं था कि ये हमारी इबादत कर रहे हैं।

इस आयत में अल्लाह तआला यह बताना चाहता है कि क़यामत के दिन हर झूठा माबूद अपने पूजने वालों से बरी हो जाएगा, और सिर्फ अल्लाह ही सच्चा माबूद है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करते हैं, वे उस दिन बड़ी नाकामी और पछतावे का सामना करेंगे।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सिर्फ अल्लाह ही इबादत के लायक है। फ़रिश्ते भी अल्लाह के मुक़र्रब बंदे हैं, लेकिन वे भी इबादत के हक़दार नहीं। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में तौहीद (एकेश्वरवाद) को अपनाना चाहिए और हर काम में अल्लाह की रज़ा को सामने रखना चाहिए। जब हम सिर्फ अल्लाह की इबादत करेंगे, तो क़यामत के दिन हमारा चेहरा रौशन होगा और हम उन लोगों में से नहीं होंगे जिनसे फ़रिश्ते बरी हो जाएंगे। यही सच्ची कामयाबी है – कि हम दुनिया में अल्लाह के सच्चे बंदे बनें, ताकि आख़िरत में हमें शर्मिंदगी न उठानी पड़े।



📜 आयत 38-42 — सूरा सबा

38وَالَّذِينَ يَسْعَوْنَ فِي آيَاتِنَا مُعَاجِزِينَ أُولَٰئِكَ فِي الْعَذَابِ مُحْضَرُونَ
और जो लोग हमारी आयतों (की तोड़) में मुक़ाबले की नीयत से दौड़ द्दूप करते हैं वही लोग (जहन्नुम के) अज़ाब में झोक दिए जाएॅगे
39قُلْ إِنَّ رَبِّي يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ وَيَقْدِرُ لَهُ ۚ وَمَا أَنفَقْتُم مِّن شَيْءٍ فَهُوَ يُخْلِفُهُ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार अपने बन्दों में से जिसके लिए चाहता है रोज़ी कुशादा कर देता है और (जिसके लिए चाहता है) तंग कर देता है और जो कुछ भी तुम लोग (उसकी राह में) ख़र्च करते हो वह उसका ऐवज देगा और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देनेवाला है
40وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا ثُمَّ يَقُولُ لِلْمَلَائِكَةِ أَهَٰؤُلَاءِ إِيَّاكُمْ كَانُوا يَعْبُدُونَ
और (वह दिन याद करो) जिस दिन सब लोगों को इकट्ठा करेगा फिर फरिश्तों से पूछेगा कि क्या ये लोग तुम्हारी परसतिश करते थे फरिश्ते अर्ज़ करेंगे (बारे इलाहा) तू (हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है
41قَالُوا سُبْحَانَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِم ۖ بَلْ كَانُوا يَعْبُدُونَ الْجِنَّ ۖ أَكْثَرُهُم بِهِم مُّؤْمِنُونَ
तू ही हमारा मालिक है न ये लोग (ये लोग हमारी नहीं) बल्कि जिन्नात (खबाएस भूत-परेत) की परसतिश करते थे कि उनमें के अक्सर लोग उन्हीं पर ईमान रखते थे
42فَالْيَوْمَ لَا يَمْلِكُ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ نَّفْعًا وَلَا ضَرًّا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذُوقُوا عَذَابَ النَّارِ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ
तब (खुदा फरमाएगा) आज तो तुममें से कोई न दूसरे के फायदे ही पहुँचाने का इख्तेयार रखता है और न ज़रर का और हम सरकशों से कहेंगे कि (आज) उस अज़ाब के मज़े चखो जिसे तुम (दुनिया में) झुठलाया करते थे
सबाकुरान सूची
54आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — सबा 40

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Wednesday, September 30, 2026

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