फातिर · 36/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي كُلَّ كَفُورٍ ۝٣٦
Wallazeena kafaroo lahum naaru Jahannama laa yuqdaa `alaihim fa yamootoo wa laa yukhaffafu `anhum min `azaabihaa; kazaalika najzee kulla kafoor
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग काफिर हो बैठे उनके लिए जहन्नुम की आग है न उनकी कज़ा ही आएगी कि वह मर जाए और तकलीफ से नजात मिले और न उनसे उनके अज़ाब ही में तख़फीफ की जाएगी हम हर नाशुक्रे की सज़ा यूँ ही किया करते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا: उन पर मृत्यु का फ़ैसला नहीं किया जाएगा, ताकि वे मर सकें (और आराम पा सकें)।
  • وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا: और न ही उनसे जहन्नम के अज़ाब में कोई कमी की जाएगी।
  • كَفُور: अत्यधिक कृतघ्न, जो कुफ़्र और इनकार में हद से गुज़र गया हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का इनकार किया और कुफ़्र पर डटे रहे, उनके लिए जहन्नम की भड़कती हुई आग तैयार है। वे उसमें हमेशा रहेंगे। उन पर मौत का फ़ैसला नहीं होगा कि वे मर जाएँ और अज़ाब से छुटकारा पा लें, और न ही उनके अज़ाब में कोई कमी की जाएगी — न तो वे मरेंगे और न ही उनकी पीड़ा हल्की होगी। यह उनके लिए सबसे बड़ी सज़ा है कि वे हमेशा-हमेशा इस अज़ाब में जले-कुरबुराते रहें। यही बदला हम उन सभी को देते हैं जो कुफ़्र में मुबालग़ा करते हैं, यानी जो अल्लाह की नेअमतों का इनकार करते हैं और अपने कुफ़्र पर अड़े रहते हैं। यह अल्लाह का न्यायपूर्ण फ़ैसला है, क्योंकि उन्होंने सत्य को जानते हुए भी उसे ठुकराया और अपने रब की रहमत से खुद को महरूम किया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी रहमत की ओर बुलाती है। अल्लाह ने इस दुनिया में हमें मौका दिया है कि हम तौबा कर लें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ और अपने रब की तरफ़ लौट आएँ। जहन्नम का अज़ाब उन लोगों के लिए है जो कुफ़्र और इनकार पर मरते दम तक डटे रहें। लेकिन अल्लाह की रहमत बेहद वसीअ है — वह चाहता है कि हम उसकी ओर रुजू करें, उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में ज़िंदगी गुज़ारें। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपने रब के साथ कृतघ्नता न करें, बल्कि उसके हर एहसान का शुक्रिया अदा करें और उसकी राह पर चलें, ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जो काफ़िरों के लिए तैयार है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है — उसने हमें क़ुरआन और सुन्नत के ज़रिए रास्ता दिखाया है, और जो कोई भी सच्चे दिल से तौबा करके उसकी ओर लौटता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसकी ज़िंदगी में बरकत देता है।



📜 आयत 34-38 — फातिर

34وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَذْهَبَ عَنَّا الْحَزَنَ ۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ
और ये लोग (खुशी के लहजे में) कहेंगे खुदा का शुक्र जिसने हम से (हर क़िस्म का) रंज व ग़म दूर कर दिया बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है
35الَّذِي أَحَلَّنَا دَارَ الْمُقَامَةِ مِن فَضْلِهِ لَا يَمَسُّنَا فِيهَا نَصَبٌ وَلَا يَمَسُّنَا فِيهَا لُغُوبٌ
जिसने हमको अपने फज़ल (व करम) से हमेशगी के घर (बेहिश्त) में उतारा (मेहमान किया) जहाँ हमें कोई तकलीफ छुयेगी भी तो नहीं और न कोई थकान ही पहुँचेगी
36وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي كُلَّ كَفُورٍ
और जो लोग काफिर हो बैठे उनके लिए जहन्नुम की आग है न उनकी कज़ा ही आएगी कि वह मर जाए और तकलीफ से नजात मिले और न उनसे उनके अज़ाब ही में तख़फीफ की जाएगी हम हर नाशुक्रे की सज़ा यूँ ही किया करते हैं
37وَهُمْ يَصْطَرِخُونَ فِيهَا رَبَّنَا أَخْرِجْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا غَيْرَ الَّذِي كُنَّا نَعْمَلُ ۚ أَوَلَمْ نُعَمِّرْكُم مَّا يَتَذَكَّرُ فِيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجَاءَكُمُ النَّذِيرُ ۖ فَذُوقُوا فَمَا لِلظَّالِمِينَ مِن نَّصِيرٍ
और ये लोग दोजख़ में (पड़े) चिल्लाया करेगें कि परवरदिगार अब हमको (यहाँ से) निकाल दे तो जो कुछ हम करते थे उसे छोड़कर नेक काम करेंगे (तो ख़ुदा जवाब देगा कि) क्या हमने तुम्हें इतनी उम्रें न दी थी कि जिनमें जिसको जो कुछ सोंचना समझना (मंज़ूर) हो खूब सोच समझ ले और (उसके अलावा) तुम्हारे पास (हमारा) डराने वाला (पैग़म्बर) भी पहुँच गया था तो (अपने किए का मज़ा) चखो क्योंकि सरकश लोगों का कोई मद्दगार नहीं
38إِنَّ اللَّهَ عَالِمُ غَيْبِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
बेशक खुदा सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों से ख़ूब वाक़िफ है वह यक़ीनी दिलों के पोशीदा राज़ से बाख़बर है
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अनुवाद — फातिर 36

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Tuesday, August 18, 2026

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