Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تُنذِرُ: तुम डराओ, सचेत करो
- اتَّبَعَ الذِّكْرَ: क़ुरआन का अनुसरण किया, उस पर ईमान लाया और उस पर अमल किया
- خَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ: रहमान (अल्लाह) से छिपकर (एकांत में) डरा, जब कोई आँख उसे नहीं देख रही हो
- فَبَشِّرْهُ: तो उसे खुशखबरी दे दो
- مَغْفِرَةٍ: क्षमा, गुनाहों की माफ़ी
- أَجْرٍ كَرِيمٍ: सम्मानजनक प्रतिफल, जो जन्नत है
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आपका डराना और चेतावनी देना हर किसी के लिए फ़ायदेमंद नहीं होता, बल्कि इसका लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलता है जिनके दिल ईमान से रौशन हों और जिन्होंने इस क़ुरआन को अपनाया हो। यानी जो लोग इस ज़िक्र (क़ुरआन) पर ईमान लाएँ, उसकी आयातों पर ग़ौर करें, और उसके हुक्मों पर अमल करें — वही लोग हैं जो आपकी नसीहत से सीधे रास्ते पर आते हैं।
और फिर उनकी एक और खास सिफ़त बयान की गई है — वे रहमान (अल्लाह) से बिल-ग़ैब डरते हैं, यानी जब वे अकेले होते हैं, जब कोई इंसान उन्हें नहीं देख रहा होता, तब भी वे अल्लाह के सामने शर्म और ख़ौफ़ महसूस करते हैं। उन्हें यक़ीन होता है कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है, चाहे लोगों की निगाहें उनसे ओझल हों। यही असली तक़वा है — वह डर जो इंसान को गुनाहों से रोके, चाहे वह किसी भी हालत में हो।
अब ऐ नबी! आप ऐसे लोगों को खुशखबरी सुना दीजिए — उनके लिए दो बड़ी नेमतें हैं:
- मग़फिरत: अल्लाह उनके सारे गुनाह माफ़ कर देगा, चाहे वे कितने ही हों। अल्लाह की रहमत उन पर साया करेगी।
- अज्रुन करीम: एक बहुत ही सम्मानजनक और शानदार इनाम, जो उनके अच्छे आमाल का सिला होगा — और वह है जन्नत, जहाँ हर तरह की खुशियाँ और आराम उनका इंतज़ार कर रहा है।
यह खुशखबरी उन्हें इसलिए दी गई है ताकि उनके दिल मज़बूत हों, उनके क़दम जमे रहें और वे इसी राह पर चलते रहें। अल्लाह का वादा सच्चा है — जो लोग उससे छिपकर डरते हैं और उसकी किताब पर अमल करते हैं, उनके लिए बेहतरीन अंजाम है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर उस इंसान के लिए खुला है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करे। आपको किसी से छिपकर गुनाह करने की ज़रूरत नहीं — बल्कि असली इज़्ज़त उसी में है कि हम अल्लाह से डरें, उसकी नाराज़गी से बचें, और उसकी किताब को अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बनाएँ। जो लोग ऐसा करेंगे, उनके लिए अल्लाह ने माफ़ी और जन्नत का वादा किया है — यह कितनी बड़ी खुशखबरी है! आइए, हम भी उन लोगों में शामिल हों जो क़ुरआन को अपनाते हैं और अल्लाह से छिपकर डरते हैं, ताकि हम भी उस शानदार इनाम के हक़दार बनें।
📜 आयत 9-13 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 11
सूरा यासीन आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो…सूरा आयत 11/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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