यासीन · 11/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ ۝١١
Innamaa tunziru manit taba `az-Zikra wa khashiyar Rahmaana bilghaib, fabashshirhu bimaghfiratinw-wa ajrin kareem
📖 हिंदी अर्थ
तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो नसीहत माने और बेदेखे भाले खुदा का ख़ौफ़ रखे तो तुम उसको (गुनाहों की) माफी और एक बाइज्ज़त (व आबरू) अज्र की खुशख़बरी दे दो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُنذِرُ: तुम डराओ, सचेत करो
  • اتَّبَعَ الذِّكْرَ: क़ुरआन का अनुसरण किया, उस पर ईमान लाया और उस पर अमल किया
  • خَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ: रहमान (अल्लाह) से छिपकर (एकांत में) डरा, जब कोई आँख उसे नहीं देख रही हो
  • فَبَشِّرْهُ: तो उसे खुशखबरी दे दो
  • مَغْفِرَةٍ: क्षमा, गुनाहों की माफ़ी
  • أَجْرٍ كَرِيمٍ: सम्मानजनक प्रतिफल, जो जन्नत है

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका डराना और चेतावनी देना हर किसी के लिए फ़ायदेमंद नहीं होता, बल्कि इसका लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलता है जिनके दिल ईमान से रौशन हों और जिन्होंने इस क़ुरआन को अपनाया हो। यानी जो लोग इस ज़िक्र (क़ुरआन) पर ईमान लाएँ, उसकी आयातों पर ग़ौर करें, और उसके हुक्मों पर अमल करें — वही लोग हैं जो आपकी नसीहत से सीधे रास्ते पर आते हैं।

और फिर उनकी एक और खास सिफ़त बयान की गई है — वे रहमान (अल्लाह) से बिल-ग़ैब डरते हैं, यानी जब वे अकेले होते हैं, जब कोई इंसान उन्हें नहीं देख रहा होता, तब भी वे अल्लाह के सामने शर्म और ख़ौफ़ महसूस करते हैं। उन्हें यक़ीन होता है कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है, चाहे लोगों की निगाहें उनसे ओझल हों। यही असली तक़वा है — वह डर जो इंसान को गुनाहों से रोके, चाहे वह किसी भी हालत में हो।

अब ऐ नबी! आप ऐसे लोगों को खुशखबरी सुना दीजिए — उनके लिए दो बड़ी नेमतें हैं:

  1. मग़फिरत: अल्लाह उनके सारे गुनाह माफ़ कर देगा, चाहे वे कितने ही हों। अल्लाह की रहमत उन पर साया करेगी।
  2. अज्रुन करीम: एक बहुत ही सम्मानजनक और शानदार इनाम, जो उनके अच्छे आमाल का सिला होगा — और वह है जन्नत, जहाँ हर तरह की खुशियाँ और आराम उनका इंतज़ार कर रहा है।

यह खुशखबरी उन्हें इसलिए दी गई है ताकि उनके दिल मज़बूत हों, उनके क़दम जमे रहें और वे इसी राह पर चलते रहें। अल्लाह का वादा सच्चा है — जो लोग उससे छिपकर डरते हैं और उसकी किताब पर अमल करते हैं, उनके लिए बेहतरीन अंजाम है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर उस इंसान के लिए खुला है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करे। आपको किसी से छिपकर गुनाह करने की ज़रूरत नहीं — बल्कि असली इज़्ज़त उसी में है कि हम अल्लाह से डरें, उसकी नाराज़गी से बचें, और उसकी किताब को अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बनाएँ। जो लोग ऐसा करेंगे, उनके लिए अल्लाह ने माफ़ी और जन्नत का वादा किया है — यह कितनी बड़ी खुशखबरी है! आइए, हम भी उन लोगों में शामिल हों जो क़ुरआन को अपनाते हैं और अल्लाह से छिपकर डरते हैं, ताकि हम भी उस शानदार इनाम के हक़दार बनें।



📜 आयत 9-13 — सूरा यासीन

9وَجَعَلْنَا مِن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ سَدًّا وَمِنْ خَلْفِهِمْ سَدًّا فَأَغْشَيْنَاهُمْ فَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे फिर ऊपर से उनको ढाँक दिया है तो वह कुछ देख नहीं सकते
10وَسَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) उनके लिए बराबर है ख्वाह तुम उन्हें डराओ या न डराओ ये (कभी) ईमान लाने वाले नहीं हैं
11إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ
तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो नसीहत माने और बेदेखे भाले खुदा का ख़ौफ़ रखे तो तुम उसको (गुनाहों की) माफी और एक बाइज्ज़त (व आबरू) अज्र की खुशख़बरी दे दो
12إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا وَآثَارَهُمْ ۚ وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ فِي إِمَامٍ مُّبِينٍ
हम ही यक़ीनन मुर्दों को ज़िन्दा करते हैं और जो कुछ लोग पहले कर चुके हैं (उनको) और उनकी (अच्छी या बुरी बाक़ी माँदा) निशानियों को लिखते जाते हैं और हमने हर चीज़ का एक सरीह व रौशन पेशवा में घेर दिया है
13وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — यासीन 11

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Friday, October 2, 2026

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