यासीन · 12/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا وَآثَارَهُمْ ۚ وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ فِي إِمَامٍ مُّبِينٍ ۝١٢
Innaa Nahnu nuhyil mawtaa wa naktubu maa qaddamoo wa aasaarahum; wa kulla shai`in ahsainaahu feee Imaamim Mubeen
📖 हिंदी अर्थ
हम ही यक़ीनन मुर्दों को ज़िन्दा करते हैं और जो कुछ लोग पहले कर चुके हैं (उनको) और उनकी (अच्छी या बुरी बाक़ी माँदा) निशानियों को लिखते जाते हैं और हमने हर चीज़ का एक सरीह व रौशन पेशवा में घेर दिया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُحْيِي الْمَوْتَىٰ: हम मुर्दों को ज़िंदा करते हैं (क़ियामत के दिन उठाएँगे)।
  • مَا قَدَّمُوا: जो कुछ उन्होंने आगे भेजा (अच्छे या बुरे कर्म)।
  • آثَارَهُمْ: उनके निशान और वे काम जो उन्होंने पीछे छोड़े (जैसे सदक़ा-ए-जारिया, नेक या बुरी सुन्नत)।
  • أَحْصَيْنَاهُ: हमने उसे गिन लिया / पूरी तरह घेर लिया।
  • إِمَامٍ مُّبِينٍ: स्पष्ट और खुले रिकॉर्ड (लौह-ए-महफ़ूज़)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी क़ुदरत और हिकमत का एक अज़ीम नमूना पेश कर रहा है। वह फ़रमाता है कि मुर्दों को ज़िंदा करना हमारे ही क़ाबू में है — यह कोई मुश्किल काम नहीं, क्योंकि हमने ही उन्हें पहली बार पैदा किया था। क़ियामत के दिन हम सबको दोबारा उठाएँगे और हर एक से उसके अमल का हिसाब लेंगे।

इसके साथ ही अल्लाह फ़रमाता है कि हम लिखते हैं वह सब कुछ जो इंसान ने अपनी ज़िंदगी में आगे भेजा — यानी उसके नेक और बुरे कर्म। और साथ ही हम उसके "آثار" (निशान) भी दर्ज करते हैं — यानी वे काम जो उसके बाद भी जारी रहते हैं। अगर उसने कोई नेक रिवाज छोड़ा, जैसे सदक़ा-ए-जारिया, नेक औलाद जो उसके लिए दुआ करे, या कोई भलाई का काम जिससे लोगों को फ़ायदा पहुँचे, तो उसका सवाब उसे मिलता रहेगा। और अगर उसने कोई बुरी सुन्नत छोड़ी, जैसे किसी गुनाह का रास्ता खोलना, तो उसका गुनाह भी उसे मिलता रहेगा — यहाँ तक कि उसके बाद आने वाले लोगों के गुनाहों का हिस्सा भी उस पर लिखा जाएगा।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और हमने हर चीज़ को एक स्पष्ट किताब (लौह-ए-महफ़ूज़) में दर्ज कर रखा है।" यानी कोई छोटा-बड़ा अमल, कोई छिपी या खुली बात, सब कुछ अल्लाह के पास मौजूद है। कोई चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं, और कोई अमल बेहिसाब नहीं रहेगा।


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हर इंसान के लिए एक बड़ी नसीहत और चेतावनी है। जो लोग मौत के बाद की ज़िंदगी का इनकार करते हैं, उनके लिए यह सबसे बड़ा जवाब है कि जिस अल्लाह ने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। और जो लोग अपने अमलों को हल्का समझते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि हर छोटा-बड़ा काम लिखा जा रहा है — यहाँ तक कि हमारे पीछे छूटने वाले निशान भी हमारे पल्ले में जुड़ेंगे।

तो ऐ इंसान! अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ार कि तेरे पीछे नेक निशान छूटें — एक नेक बच्चा, एक सदक़ा-ए-जारिया, एक भलाई का काम जो लोगों के काम आए। क्योंकि यही वह पूँजी है जो क़ियामत के दिन तेरे काम आएगी। याद रख, तेरा रब तेरे हर अमल से वाक़िफ़ है और सब कुछ उसकी किताब में दर्ज है। इस दुनिया में जो बोओगे, आख़िरत में वही काटोगे। अल्लाह से डरो और अपने आख़िरी सफ़र के लिए ज़ाद-ए-राह (पूँजी) इकट्ठा करो — क्योंकि मौत के बाद की ज़िंदगी ही असली ज़िंदगी है, और वहाँ हर इंसान को उसके किए का बदला मिलकर रहेगा।



📜 आयत 10-14 — यासीन

10وَسَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
और (ऐ रसूल) उनके लिए बराबर है ख्वाह तुम उन्हें डराओ या न डराओ ये (कभी) ईमान लाने वाले नहीं हैं
11إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ
तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो नसीहत माने और बेदेखे भाले खुदा का ख़ौफ़ रखे तो तुम उसको (गुनाहों की) माफी और एक बाइज्ज़त (व आबरू) अज्र की खुशख़बरी दे दो
12إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا وَآثَارَهُمْ ۚ وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ فِي إِمَامٍ مُّبِينٍ
हम ही यक़ीनन मुर्दों को ज़िन्दा करते हैं और जो कुछ लोग पहले कर चुके हैं (उनको) और उनकी (अच्छी या बुरी बाक़ी माँदा) निशानियों को लिखते जाते हैं और हमने हर चीज़ का एक सरीह व रौशन पेशवा में घेर दिया है
13وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए
14إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं
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अनुवाद — यासीन 12

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Tuesday, August 18, 2026

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