यासीन · 13/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ ۝١٣
Wadrib lahum masalan Ashaabal Qaryatih; iz jaaa`ahal mursaloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاضْرِبْ لَهُمْ مَثَلًا: उनके लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करें।
  • أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ: उस बस्ती (गाँव) के निवासी।
  • إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ: जब उस (बस्ती) के पास भेजे गए रसूल (दूत) आए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपनी क़ौम के उन लोगों को, जो आपकी दावत को ठुकरा रहे हैं, एक ऐसी बस्ती के निवासियों की कहानी सुनाइए, जो उनके लिए एक सबक और नसीहत बने। वह बस्ती (अन्ताकिया) थी, जब उसके पास अल्लाह के भेजे हुए रसूल आए। ये रसूल ईसा (अलैहिस्सलाम) के भेजे हुए थे, जो लोगों को अल्लाह की इबादत की ओर बुला रहे थे। यह कहानी उन मुशरिकों के लिए एक ज़िंदा उदाहरण है कि जिन लोगों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया, वे अल्लाह की यातना से नहीं बच सके। यह क़िस्सा उन्हें चेतावनी देता है कि सच्चाई को ठुकराने का अंजाम बहुत बुरा होता है, और यह उन्हें दावत-ए-हक़ को क़बूल करने की तरफ़ राग़िब करता है, ताकि वे दुनिया और आख़िरत की सज़ा से बच जाएँ। अल्लाह अपने रसूलों को भेजकर लोगों पर अपनी रहमत और मेहरबानी का एहसान करता है, क्योंकि वह चाहता है कि लोग अंधेरे से निकलकर रोशनी की ओर आएँ और सीधे रास्ते पर चलें। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के दीन की दावत हमेशा से रसूलों का काम रही है, और जो लोग इस दावत को क़बूल करते हैं, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होते हैं।



📜 आयत 11-15 — सूरा यासीन

11إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ اتَّبَعَ الذِّكْرَ وَخَشِيَ الرَّحْمَٰنَ بِالْغَيْبِ ۖ فَبَشِّرْهُ بِمَغْفِرَةٍ وَأَجْرٍ كَرِيمٍ
तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो नसीहत माने और बेदेखे भाले खुदा का ख़ौफ़ रखे तो तुम उसको (गुनाहों की) माफी और एक बाइज्ज़त (व आबरू) अज्र की खुशख़बरी दे दो
12إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا وَآثَارَهُمْ ۚ وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ فِي إِمَامٍ مُّبِينٍ
हम ही यक़ीनन मुर्दों को ज़िन्दा करते हैं और जो कुछ लोग पहले कर चुके हैं (उनको) और उनकी (अच्छी या बुरी बाक़ी माँदा) निशानियों को लिखते जाते हैं और हमने हर चीज़ का एक सरीह व रौशन पेशवा में घेर दिया है
13وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए
14إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं
15قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — यासीन 13

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Thursday, October 1, 2026

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