यासीन · 14/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ ۝١٤
Iz arsalnaaa ilaihimusnaini fakazzaboohumaa fa`azzaznaa bisaalisin faqaalooo innaaa ilaikum mursaloon
📖 हिंदी अर्थ
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَعَزَّزْنَا: हमने शक्ति प्रदान की, मज़बूत किया।
  • بِثَالِثٍ: तीसरे (रसूल) के साथ।
  • مُرْسَلُونَ: भेजे गए (रसूल)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस समय का ज़िक्र करती है जब अल्लाह ने एक बस्ती (शहर) के लोगों की ओर दो रसूल भेजे। ये रसूल उन्हें अल्लाह की इबादत की ओर बुला रहे थे और शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाने) से रोक रहे थे। लेकिन उस बस्ती के लोगों ने उन दोनों रसूलों को झुठला दिया और उनकी दावत को क़बूल नहीं किया।

फिर अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से उन दोनों रसूलों को एक तीसरे रसूल के साथ ताक़त और सहारा दिया। तीसरे रसूल के आने से दावत और मज़बूत हुई। तीनों रसूलों ने मिलकर उस बस्ती के लोगों से कहा: "हम तीनों आपकी ओर अल्लाह के भेजे हुए रसूल हैं।"

यहाँ से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह अपने दीन (धर्म) की मदद करता है और अपने रसूलों को ताक़त देता है। चाहे लोग झुठलाएँ, लेकिन अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है। यह क़िस्सा हमें बताता है कि सच्चाई की राह में मुश्किलें आती हैं, लेकिन अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को वह कभी अकेला नहीं छोड़ता।

इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो अल्लाह के रसूलों को झुठलाते हैं। अल्लाह अपने रसूलों की मदद ज़रूर करता है, और सच्चाई बुलंद होकर रहती है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के रसूलों और उनकी शिक्षाओं पर ईमान लाएँ, क्योंकि यही हमारी भलाई का रास्ता है। अल्लाह की रहमत और मदद उन्हीं के साथ होती है जो उसकी राह में सब्र और इस्तिक़ामत (स्थिरता) दिखाते हैं।



📜 आयत 12-16 — सूरा यासीन

12إِنَّا نَحْنُ نُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَنَكْتُبُ مَا قَدَّمُوا وَآثَارَهُمْ ۚ وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ فِي إِمَامٍ مُّبِينٍ
हम ही यक़ीनन मुर्दों को ज़िन्दा करते हैं और जो कुछ लोग पहले कर चुके हैं (उनको) और उनकी (अच्छी या बुरी बाक़ी माँदा) निशानियों को लिखते जाते हैं और हमने हर चीज़ का एक सरीह व रौशन पेशवा में घेर दिया है
13وَاضْرِبْ لَهُم مَّثَلًا أَصْحَابَ الْقَرْيَةِ إِذْ جَاءَهَا الْمُرْسَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए
14إِذْ أَرْسَلْنَا إِلَيْهِمُ اثْنَيْنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزْنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوا إِنَّا إِلَيْكُم مُّرْسَلُونَ
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं
15قَالُوا مَا أَنتُمْ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا وَمَا أَنزَلَ الرَّحْمَٰنُ مِن شَيْءٍ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا تَكْذِبُونَ
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो
16قَالُوا رَبُّنَا يَعْلَمُ إِنَّا إِلَيْكُمْ لَمُرْسَلُونَ
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — यासीन 14

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Friday, October 2, 2026

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