Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
قِيلَ ادْخُلِ الْجَنَّةَ ۖ قَالَ يَا لَيْتَ قَوْمِي يَعْلَمُونَ
शब्दों के अर्थ:
- قِيلَ: कहा गया (यहाँ अर्थ है, अल्लाह की ओर से फ़रिश्तों या सम्मान के साथ कहा गया)
- ادْخُلِ الْجَنَّةَ: जन्नत में प्रवेश करो
- يَا لَيْتَ: काश! (पछतावे और इच्छा व्यक्त करने के लिए)
- قَوْمِي: मेरी क़ौम (मेरे लोग)
तफ़सीर (व्याख्या):
जब उस नेक बंदे को उसकी क़ौम ने शहीद कर दिया, तो अल्लाह तआला ने उसे सम्मानित करते हुए कहा: "जन्नत में प्रवेश करो।" यह उसके लिए सबसे बड़ा सम्मान और इनाम था—शहादत के बाद सीधे जन्नत का दरवाज़ा।
जब वह जन्नत में दाख़िल हुआ और वहाँ की नेमतों, सुख-शांति और अल्लाह की करीमी को अपनी आँखों से देखा, तो उसके दिल में अपनी क़ौम के लिए गहरी हमदर्दी और मोहब्बत पैदा हुई। उसने कहा: "काश! मेरी क़ौम को यह पता होता!" उसकी यह आरज़ू इसलिए थी कि उसकी क़ौम यह जान लेती कि अल्लाह ने उसे कितनी बड़ी नेमत दी है, उसके गुनाह माफ़ कर दिए हैं और उसे जन्नत से नवाज़ा है। अगर उन्हें यह इल्म होता, तो शायद वे भी ईमान ले आते और उसी तरह की कामयाबी हासिल कर लेते।
यहाँ से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है: एक सच्चा मोमिन अपनी क़ौम की हिदायत के लिए हमेशा फ़िक्रमंद रहता है, चाहे उसे उनकी तरफ़ से कितना ही ज़ुल्म क्यों न सहना पड़े। वह अपनी निजी कामयाबी पर खुश नहीं होता, बल्कि दूसरों की भलाई की तमन्ना रखता है।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को किस तरह सम्मानित करता है और उनकी कुर्बानियों का अज्र देता है। साथ ही, यह हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने दिलों में दूसरों की हिदायत की तमन्ना रखनी चाहिए और अपने अच्छे अमल से दूसरों को राह दिखानी चाहिए। कितना खूबसूरत है वह इंसान जो जन्नत में पहुँचकर भी अपनी क़ौम को भूलता नहीं और उनकी भलाई की दुआ करता है!
यह क़िस्सा हमें यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह की राह में कुर्बानी देने वालों का अंजाम कभी बुरा नहीं होता। चाहे दुनिया में उन्हें तकलीफ़ दी जाए, लेकिन आख़िरत में उनका मुक़ाम बुलंद होता है। हमें भी चाहिए कि हम अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहें और अल्लाह की राह में किसी भी कुर्बानी से पीछे न हटें।
📜 आयत 24-28 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 26
सूरा यासीन आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब उसे खुदा का हुक्म हुआ कि बेहिश्त में जा…सूरा आयत 26/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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