अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَا حَسْرَةً: अफसोस और पछतावे का उद्गार, जो दिल के दर्द और नदामत को दर्शाता है।
- عَلَى الْعِبَادِ: बंदों पर, यानी उन लोगों पर जिन्होंने रसूलों को झुठलाया।
- يَسْتَهْزِئُونَ: मज़ाक उड़ाना, उपहास करना, ठट्ठा करना।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन बंदों के उस हाल का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और उनका मज़ाक उड़ाया। यह एक ऐसा दृश्य है जो क़यामत के दिन सामने आएगा, जब ये लोग अपनी आँखों से वह अज़ाब देखेंगे जो उनके इंतज़ार में है। उस वक़्त वे अपने ऊपर अफसोस और पछतावे के मारे चीख़ उठेंगे: "हाय अफसोस! हमने अपने रसूलों की बात क्यों न मानी? हमने उनका मज़ाक क्यों उड़ाया?"
यह अफसोस और नदामत उस दिन उनके किसी काम न आएगी, क्योंकि दुनिया में जब भी अल्लाह का कोई रसूल उनके पास आया, तो उन्होंने उसे झुठलाया और उसका उपहास किया। यह उनकी पुरानी आदत थी—हर नबी के साथ उन्होंने यही सलूक किया। चाहे वह हज़रत नूह हों, हज़रत हूद हों, हज़रत सालेह हों या हज़रत मुहम्मद ﷺ—सबके साथ उन्होंने तकज़ीब और इस्तेहज़ा का रवैया अपनाया।
यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो आज भी अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं, रसूल ﷺ की सुन्नत पर हँसते हैं, या क़ुरआन की आयतों को ख़ुशी-ख़ुशी ठुकरा देते हैं। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि यह रवैया कोई नई बात नहीं है—यह तो उन लोगों का तरीक़ा रहा है जो हमेशा हिदायत के दुश्मन रहे। लेकिन अंजाम बहुत बुरा है: वह दिन आएगा जब यही लोग अपने हाथ कुतरते हुए कहेंगे, "काश! हमने रसूल का साथ दिया होता।"
इस आयत में हमारे लिए एक सबक़ है कि हम रसूल ﷺ की मुहब्बत को अपने दिलों में बसाएँ, उनकी सुन्नत को अपनाएँ, और कभी भी दीन के मामले में मज़ाक या उपहास का रवैया न अपनाएँ। याद रखें, जो लोग आज हक़ का मज़ाक उड़ाते हैं, वही कल क़यामत के मैदान में सबसे ज़्यादा पछताएँगे। अल्लाह हमें उन लोगों में न बनाए जो रसूलों का मज़ाक उड़ाते हैं, बल्कि हमें उन लोगों में बनाए जो उनकी पैरवी करते हैं और उन पर ईमान लाते हैं। आमीन।
📜 आयत 28-32 — यासीन
अनुवाद — यासीन 30
सूरा यासीन आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हाए अफसोस बन्दों के हाल पर कि कभी उनके पास…सूरा आयत 30/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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