यासीन · 31/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
أَلَمْ يَرَوْا كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ الْقُرُونِ أَنَّهُمْ إِلَيْهِمْ لَا يَرْجِعُونَ ۝٣١
Alam yaraw kam ahlak naa qablahum minal qurooni annahum ilaihim laa yarji`oon
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला और वह लोग उनके पास हरगिज़ पलट कर नहीं आ सकते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अलम यरव: क्या उन्होंने नहीं देखा
  • कम अहलकना: कितनी ही (उम्मतों को) हमने विनष्ट किया
  • मिनल क़ुरून: पिछली पीढ़ियों में से
  • अन्नहुम इलैहिम ला यरजिऊन: कि वे उनकी ओर (दुनिया में) लौटकर नहीं आएँगे

तफ़सीर:

यह आयत मक्का के उन काफ़िरों और मुस्तहज़ी (उपहास करने वालों) को सम्बोधित करती है जो रसूलों का मज़ाक उड़ाते थे और क़ियामत के दिन को झुठलाते थे। अल्लाह तआला उनसे कहता है: क्या इन लोगों ने अपनी आँखों से उन पिछली उम्मतों के विनाश को नहीं देखा जो इनसे पहले गुज़र चुकी हैं? जैसे आद, समूद, फ़िरऔन की क़ौम और अन्य अनेक सभ्यताएँ जो अपनी ताक़त और शान-शौकत में इनसे कहीं बढ़-चढ़कर थीं, लेकिन जब उन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और हक़ से मुँह मोड़ा, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसे विनष्ट किया कि उनका कोई निशान भी बाक़ी न रहा।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वे सब मर गए और दुनिया में लौटकर नहीं आएँगे। उन्होंने अपने कर्मों का सामना किया और अल्लाह के सामने हाज़िर हुए, जहाँ उन्हें उनके अच्छे-बुरे कर्मों का पूरा बदला मिलेगा। यह इस बात की सबसे बड़ी निशानी है कि मौत के बाद दोबारा उठना सत्य है, और यही वह चीज़ है जिसे ये लोग झुठला रहे हैं।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सीख देता है कि इतिहास से सबक़ लेना चाहिए। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके रसूलों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम विनाश के सिवा कुछ नहीं होता। यह दुनिया किसी के लिए भी हमेशा नहीं रहने वाली। आज जो लोग अपनी ताक़त और सामर्थ्य पर इतरा रहे हैं, कल उन्हें भी उसी रास्ते से गुज़रना है जिस रास्ते से पिछली उम्मतें गुज़र चुकी हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें ग़ौर और फ़िक्र की दावत देती है। क्या हमने कभी उन खंडहरों और बर्बाद हुई बस्तियों को देखा है जो हमारे आस-पास मौजूद हैं? वे सब कभी आबाद थीं, उनमें लोग रहते थे, बाज़ार सजते थे, बच्चे खेलते थे — लेकिन आज वे सब खामोश हैं। यही हाल उन लोगों का होगा जो आज अल्लाह के हुक्म को भूलकर अपनी ज़िन्दगी ग़ाफ़िल में गुज़ार रहे हैं। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जिन्होंने हक़ को झुठलाया और विनाश का सामना किया। आमीन।



📜 आयत 29-33 — यासीन

29إِن كَانَتْ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً فَإِذَا هُمْ خَامِدُونَ
वह तो सिर्फ एक चिंघाड थी (जो कर दी गयी बस) फिर तो वह फौरन चिराग़े सहरी की तरह बुझ के रह गए
30يَا حَسْرَةً عَلَى الْعِبَادِ ۚ مَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
हाए अफसोस बन्दों के हाल पर कि कभी उनके पास कोई रसूल नहीं आया मगर उन लोगों ने उसके साथ मसख़रापन ज़रूर किया
31أَلَمْ يَرَوْا كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ الْقُرُونِ أَنَّهُمْ إِلَيْهِمْ لَا يَرْجِعُونَ
क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला और वह लोग उनके पास हरगिज़ पलट कर नहीं आ सकते
32وَإِن كُلٌّ لَّمَّا جَمِيعٌ لَّدَيْنَا مُحْضَرُونَ
(हाँ) अलबत्ता सब के सब इकट्ठा हो कर हमारी बारगाह में हाज़िर किए जाएँगे
33وَآيَةٌ لَّهُمُ الْأَرْضُ الْمَيْتَةُ أَحْيَيْنَاهَا وَأَخْرَجْنَا مِنْهَا حَبًّا فَمِنْهُ يَأْكُلُونَ
और उनके (समझने) के लिए मेरी कुदरत की एक निशानी मुर्दा (परती) ज़मीन है कि हमने उसको (पानी से) ज़िन्दा कर दिया और हम ही ने उससे दाना निकाला तो उसे ये लोग खाया करते हैं
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अनुवाद — यासीन 31

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सूरा आयत 31/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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