यासीन · 47/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ أَنفِقُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا أَنُطْعِمُ مَن لَّوْ يَشَاءُ اللَّهُ أَطْعَمَهُ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ ۝٤٧
Wa izaa qeela lahum anfiqoo mimmaa razaqakumul laahu qaalal lazeena kafaroo lillazeena aamanooo anut`imu mal-law yashaaa`ul laahu at`amahooo in antum illaa fee dalaalim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और जब उन (कुफ्फ़ार) से कहा जाता है कि (माले दुनिया से) जो खुदा ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ (खुदा की राह में भी) ख़र्च करो तो (ये) कुफ्फ़ार ईमानवालों से कहते हैं कि भला हम उस शख्स को खिलाएँ जिसे (तुम्हारे ख्याल के मुवाफ़िक़) खुदा चाहता तो उसको खुद खिलाता कि तुम लोग बस सरीही गुमराही में (पड़े हुए) हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنفِقُوا – खर्च करो, दान दो।
  • مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ – उस (धन-संपत्ति) में से जो अल्लाह ने तुम्हें दी है।
  • أَنُطْعِمُ – क्या हम खिलाएँ?
  • ضَلَالٍ مُّبِينٍ – स्पष्ट गुमराही, खुली भटकाव।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब इन काफ़िरों से कहा जाता है कि अल्लाह ने तुम्हें जो रोज़ी (आजीविका) दी है, उसमें से कुछ अल्लाह की राह में खर्च करो, ग़रीबों और मिस्कीनों की मदद करो, तो ये लोग घमंड और उपहास के साथ मोमिनों से कहते हैं: “क्या हम उसे खिलाएँ जिसे अल्लाह चाहता तो खुद खिला देता? अगर अल्लाह उसे खिलाना चाहता, तो वह उसे रोज़ी दे देता। हम अल्लाह की मर्ज़ी के खिलाफ कैसे जा सकते हैं?” यह कहकर वे अपनी कंजूसी और बेरहमी को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। फिर वे मोमिनों से कहते हैं: “तुम लोग तो साफ़ गुमराही में हो, क्योंकि तुम हमें ऐसी बात कह रहे हो जो अल्लाह की मर्ज़ी के खिलाफ है।”

असल में यह उनका बहाना था। वे जानते थे कि अल्लाह ने इंसान को आज़माइश के लिए माल दिया है और उसे हुक्म दिया है कि वह अपने भाई की मदद करे। अल्लाह की मर्ज़ी यही है कि इंसान अपनी कमाई में से दूसरों का हक़ अदा करे। लेकिन इन काफ़िरों ने अल्लाह की मर्ज़ी का गलत मतलब निकालकर अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश की। उनका यह रवैया उनके दिलों की सख्ती और ईमान की कमी को दर्शाता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने जो नेमतें हमें दी हैं, वह सिर्फ हमारे लिए नहीं हैं, बल्कि उसमें दूसरों का भी हक़ है। जब हम दान करते हैं, तो हम अल्लाह की मर्ज़ी के मुताबिक चलते हैं और उसकी रहमत के हक़दार बनते हैं। कंजूसी और बहानेबाज़ी शैतान की तरफ से होती है। अल्लाह हमें फ़राख़दिली (उदारता) और दूसरों की मदद करने की तौफ़ीक़ दे। याद रखें, जो आज दूसरों की मदद करेगा, अल्लाह उसे कल अपनी रहमत से नवाज़ेगा।



📜 आयत 45-49 — यासीन

45وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّقُوا مَا بَيْنَ أَيْدِيكُمْ وَمَا خَلْفَكُمْ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और जब उन कुफ्फ़ार से कहा जाता है कि इस (अज़ाब से) बचो (हर वक्त तुम्हारे साथ-साथ) तुम्हारे सामने और तुम्हारे पीछे (मौजूद) है ताकि तुम पर रहम किया जाए
46وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ آيَةٍ مِّنْ آيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
(तो परवाह नहीं करते) और उनकी हालत ये है कि जब उनके परवरदिगार की निशानियों में से कोई निशानी उनके पास आयी तो ये लोग मुँह मोड़े बग़ैर कभी नहीं रहे
47وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ أَنفِقُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا أَنُطْعِمُ مَن لَّوْ يَشَاءُ اللَّهُ أَطْعَمَهُ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और जब उन (कुफ्फ़ार) से कहा जाता है कि (माले दुनिया से) जो खुदा ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ (खुदा की राह में भी) ख़र्च करो तो (ये) कुफ्फ़ार ईमानवालों से कहते हैं कि भला हम उस शख्स को खिलाएँ जिसे (तुम्हारे ख्याल के मुवाफ़िक़) खुदा चाहता तो उसको खुद खिलाता कि तुम लोग बस सरीही गुमराही में (पड़े हुए) हो
48وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और कहते हैं कि (भला) अगर तुम लोग (अपने दावे में सच्चे हो) तो आख़िर ये (क़यामत का) वायदा कब पूरा होगा
49مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً تَأْخُذُهُمْ وَهُمْ يَخِصِّمُونَ
(ऐ रसूल) ये लोग एक सख्त चिंघाड़ (सूर) के मुनतज़िर हैं जो उन्हें (उस वक्त) ले डालेगी
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अनुवाद — यासीन 47

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सूरा आयत 47/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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