यासीन · 48/83
अनुवाद उच्चारण — सूरा यासीन
وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٤٨
Wa yaqooloona mataa haazal wa`du in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
और कहते हैं कि (भला) अगर तुम लोग (अपने दावे में सच्चे हो) तो आख़िर ये (क़यामत का) वायदा कब पूरा होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَتَىٰ: कब? (समय पूछने के लिए)
  • هَذَا الْوَعْدُ: यह वादा (यानी क़ियामत का दिन और दोबारा जीवित किए जाने का वादा)
  • صَادِقِينَ: सच्चे (अपने दावे में)

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत मक्का के काफ़िरों का हाल बयान कर रही है जो पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की दावत का मज़ाक उड़ाते थे और अंजाम के दिन के बारे में शक करते थे। वे ताना मारते हुए कहते थे: "वह वादा (क़ियामत) कब आएगा, अगर तुम (मुसलमान) अपने इस दावे में सच्चे हो?"

यह सवाल उन्होंने इसलिए नहीं पूछा था कि वे सच्चाई जानना चाहते थे, बल्कि वे मज़ाक उड़ा रहे थे और इस वादे को दूर की बात समझ रहे थे। वे क़ियामत के दिन को असंभव मानते थे, जबकि अल्लाह तआला की क़ुदरत (शक्ति) के लिए यह बिल्कुल आसान है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि जब लोग सच्चाई का मज़ाक उड़ाते हैं, तो हमें उनके तानों से विचलित नहीं होना चाहिए। पैग़म्बरों के साथ हमेशा ऐसा हुआ है — उनकी क़ौमें उन्हें झुठलाती रहीं और अज़ाब (यातना) का ताना मारती रहीं। लेकिन सच्चाई क़ायम रहती है, चाहे लोग मानें या न मानें।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है: हमें यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह का वादा सच्चा है, चाहे लोग उस पर हँसें या शक करें। क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा, और उस दिन हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा। जो लोग आज मज़ाक उड़ा रहे हैं, वे उस दिन अपनी हालत देखकर हैरान रह जाएँगे।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने ईमान (विश्वास) में मज़बूत रहना चाहिए और अल्लाह के वादों पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, तो हमारी ज़िंदगी का हर काम सुधर जाता है — हम नेकी करते हैं, बुराई से बचते हैं, और अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के लिए जीते हैं। यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 46-50 — सूरा यासीन

46وَمَا تَأْتِيهِم مِّنْ آيَةٍ مِّنْ آيَاتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
(तो परवाह नहीं करते) और उनकी हालत ये है कि जब उनके परवरदिगार की निशानियों में से कोई निशानी उनके पास आयी तो ये लोग मुँह मोड़े बग़ैर कभी नहीं रहे
47وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ أَنفِقُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ قَالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِلَّذِينَ آمَنُوا أَنُطْعِمُ مَن لَّوْ يَشَاءُ اللَّهُ أَطْعَمَهُ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
और जब उन (कुफ्फ़ार) से कहा जाता है कि (माले दुनिया से) जो खुदा ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ (खुदा की राह में भी) ख़र्च करो तो (ये) कुफ्फ़ार ईमानवालों से कहते हैं कि भला हम उस शख्स को खिलाएँ जिसे (तुम्हारे ख्याल के मुवाफ़िक़) खुदा चाहता तो उसको खुद खिलाता कि तुम लोग बस सरीही गुमराही में (पड़े हुए) हो
48وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और कहते हैं कि (भला) अगर तुम लोग (अपने दावे में सच्चे हो) तो आख़िर ये (क़यामत का) वायदा कब पूरा होगा
49مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً تَأْخُذُهُمْ وَهُمْ يَخِصِّمُونَ
(ऐ रसूल) ये लोग एक सख्त चिंघाड़ (सूर) के मुनतज़िर हैं जो उन्हें (उस वक्त) ले डालेगी
50فَلَا يَسْتَطِيعُونَ تَوْصِيَةً وَلَا إِلَىٰ أَهْلِهِمْ يَرْجِعُونَ
जब ये लोग बाहम झगड़ रहे होगें फिर न तो ये लोग वसीयत ही करने पायेंगे और न अपने लड़के बालों ही की तरफ लौट कर जा सकेगें
यासीनकुरान सूची
83आयत
मक्कीअवतरण स्थान
48आयत

अनुवाद — यासीन 48

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Thursday, October 1, 2026

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