अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَتَىٰ: कब? (समय पूछने के लिए)
- هَذَا الْوَعْدُ: यह वादा (यानी क़ियामत का दिन और दोबारा जीवित किए जाने का वादा)
- صَادِقِينَ: सच्चे (अपने दावे में)
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत मक्का के काफ़िरों का हाल बयान कर रही है जो पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ की दावत का मज़ाक उड़ाते थे और अंजाम के दिन के बारे में शक करते थे। वे ताना मारते हुए कहते थे: "वह वादा (क़ियामत) कब आएगा, अगर तुम (मुसलमान) अपने इस दावे में सच्चे हो?"
यह सवाल उन्होंने इसलिए नहीं पूछा था कि वे सच्चाई जानना चाहते थे, बल्कि वे मज़ाक उड़ा रहे थे और इस वादे को दूर की बात समझ रहे थे। वे क़ियामत के दिन को असंभव मानते थे, जबकि अल्लाह तआला की क़ुदरत (शक्ति) के लिए यह बिल्कुल आसान है।
यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि जब लोग सच्चाई का मज़ाक उड़ाते हैं, तो हमें उनके तानों से विचलित नहीं होना चाहिए। पैग़म्बरों के साथ हमेशा ऐसा हुआ है — उनकी क़ौमें उन्हें झुठलाती रहीं और अज़ाब (यातना) का ताना मारती रहीं। लेकिन सच्चाई क़ायम रहती है, चाहे लोग मानें या न मानें।
इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है: हमें यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह का वादा सच्चा है, चाहे लोग उस पर हँसें या शक करें। क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा, और उस दिन हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा। जो लोग आज मज़ाक उड़ा रहे हैं, वे उस दिन अपनी हालत देखकर हैरान रह जाएँगे।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने ईमान (विश्वास) में मज़बूत रहना चाहिए और अल्लाह के वादों पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, तो हमारी ज़िंदगी का हर काम सुधर जाता है — हम नेकी करते हैं, बुराई से बचते हैं, और अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के लिए जीते हैं। यही सच्ची कामयाबी है।
📜 आयत 46-50 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 48
सूरा यासीन आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहते हैं कि (भला) अगर तुम लोग (अपने दावे…सूरा आयत 48/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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