Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آيَةٍ: निशानी, चमत्कार, प्रमाण या सबूत।
- مُعْرِضِينَ: मुँह मोड़ने वाले, उपेक्षा करने वाले, ध्यान न देने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की दयनीय स्थिति का वर्णन करती है जो सत्य से मुँह मोड़ लेते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि जब भी इन काफिरों और मुशरिकों के पास उनके रब की ओर से कोई निशानी आती है — चाहे वह कोई चमत्कार हो, कोई आयत हो, या कोई सबूत जो उन्हें सत्य की राह दिखाए — तो वे उससे मुँह मोड़ लेते हैं और उस पर ध्यान नहीं देते।
ये लोग ऐसे थे कि उनके पास जो भी प्रमाण आता था, वे उसे ठुकरा देते थे। उन्होंने अपने दिलों पर अहंकार और हठधर्मिता की परत चढ़ा ली थी, जिससे सत्य की रोशनी उनके दिलों तक नहीं पहुँच पाती थी। वे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सच्चाई की गवाही देने वाली हर निशानी से विमुख हो जाते थे, क्योंकि उन्होंने झूठ पर चलने की आदत बना ली थी और सत्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है कि इंसान का दिल जब सत्य से मुँह मोड़ने का आदी हो जाता है, तो वह हर सबूत के बावजूद हिदायत नहीं पाता। अल्लाह की निशानियाँ हर तरफ बिखरी हुई हैं — आसमान में, ज़मीन में, इंसान की पैदाइश में, और कुरआन की आयतों में — लेकिन जो दिल इन पर गौर नहीं करता, वह कभी हिदायत नहीं पा सकता।
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अल्लाह की हर निशानी पर ध्यान दें, उससे सबक लें और अपने दिलों को सत्य के लिए खुला रखें। अल्लाह की आयतें हमारे लिए रहमत और हिदायत हैं — वे हमें अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाती हैं। जो इनसे मुँह मोड़ता है, वह खुद को नुकसान में डालता है, क्योंकि ये आयतें उसके लिए क़ियामत के दिन गवाह बनेंगी। आइए, हम उन लोगों में से न बनें जो सत्य से मुँह मोड़ते हैं, बल्कि उन लोगों में से बनें जो हर निशानी पर गौर करते हैं और अपने रब की इबादत में लगे रहते हैं। अल्लाह हमें सत्य को स्वीकार करने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 44-48 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 46
सूरा यासीन आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (तो परवाह नहीं करते) और उनकी हालत ये है कि…सूरा आयत 46/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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