अस-साफ्फात · 113/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ مُبِينٌ ۝١١٣
Wa baaraknaa `alaihi wa `alaaa Ishaaq; wa min zurriyya tihimaa muhsinunw wa zaalimul linafshihee mubeen
📖 हिंदी अर्थ
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَ بَارَكْنَا: हमने बरकत (भलाई और वृद्धि) प्रदान की।
  • مُحْسِنٌ: नेकी करने वाला, आज्ञाकारी।
  • ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ: अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करने वाला (अर्थात गुनाहगार)।
  • مُبِينٌ: स्पष्ट, खुला हुआ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे हज़रत इशाक़ (अलैहिस्सलाम) पर अपनी खास रहमत और बरकत नाज़िल की। यह बरकत उनकी औलाद में नबुव्वत (पैग़म्बरी) की श्रृंखला, धन-संपत्ति, संतान की अधिकता और दुनिया व आख़िरत की भलाइयों के रूप में प्रकट हुई। इसी बरकत की बदौलत उनकी नस्ल से अनगिनत नबी और रसूल पैदा हुए।

इसके बाद अल्लाह तआला ने बताया कि इन दोनों महान पैग़म्बरों की संतान में दो तरह के लोग होंगे:

  1. मुहसिन (नेक और भलाई करने वाले): जो अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और अपने आपको गुनाहों से बचाते हैं। ये लोग अपनी आत्मा के साथ भलाई करते हैं और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनते हैं।
  2. ज़ालिम (अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करने वाले): जो कुफ्र और गुनाहों में लिप्त रहते हैं। वे अपने किए से अपनी ही आत्मा को नुक़सान पहुँचाते हैं, और उनका यह ज़ुल्म स्पष्ट और खुला हुआ है। यानी उनका कुफ्र और नाफ़रमानी इतनी साफ़ है कि उसे छिपाया नहीं जा सकता।

यह आयत हमें सिखाती है कि नेक और पैग़म्बरों की संतान होना किसी के लिए निजात की गारंटी नहीं है। असली चीज़ इंसान का अपना अमल और ईमान है। हर इंसान को चाहिए कि वह अपने आपको गुनाहों से बचाए और अल्लाह की राह में भलाई करे, क्योंकि अल्लाह की बरकत उन्हीं को मिलती है जो उसके आज्ञाकारी बनते हैं। यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत और बरकत उसके नेक बंदों पर हमेशा रहती है, और हमें चाहिए कि हम उनके रास्ते पर चलकर उसी बरकत के हक़दार बनें।



📜 आयत 111-115 — अस-साफ्फात

111إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे
112وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी
113وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ مُبِينٌ
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला
114وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं
115وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
113आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 113

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Tuesday, August 18, 2026

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