अस-साफ्फात · 112/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ ۝١١٢
Wa bashsharnaahu bi Ishaaqa Nabiyayam minas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَشَّرْنَاهُ: हमने उसे (इब्राहीम अलैहिस्सलाम को) खुशखबरी दी।
  • بِإِسْحَاقَ: इसहाक (अलैहिस्सलाम) के जन्म की।
  • نَبِيًّا: जो नबी होगा।
  • مِنَ الصَّالِحِينَ: नेक और अच्छे लोगों में से।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने ख़लील (दोस्त) इब्राहीम अलैहिस्सलाम को एक और बेटे की खुशखबरी दी, जिसका नाम इसहाक था। यह खुशखबरी उस वक़्त दी गई जब इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे इस्माइल को अल्लाह के हुक्म की तामील में ज़बह करने का पूरा अज़्म (इरादा) कर लिया था और इस पर साबित-क़दम रहे। यानी जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म के आगे सर झुका दिया और अपने इकलौते बेटे को क़ुर्बान करने के लिए तैयार हो गए, तो अल्लाह ने उन्हें इस्माइल की जान बख्श दी और साथ ही एक और बेटे इसहाक की बशारत (खुशखबरी) दी।

यह बशारत सिर्फ़ बेटे की पैदाइश की नहीं थी, बल्कि इस बात की भी थी कि यह बेटा नबी होगा और नेक लोगों में से होगा। यानी अल्लाह ने इब्राहीम अलैहिस्सलाम को दो नेक नबी बेटों से नवाज़ा — एक इस्माइल और दूसरे इसहाक। यह उनके सब्र, रज़ा-बिल-क़ज़ा (अल्लाह की मर्ज़ी पर राज़ी रहने) और अल्लाह की इताअत का इनाम था।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब बंदा अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज़ को क़ुर्बान करने के लिए तैयार हो जाता है, तो अल्लाह उसे उससे बेहतर और बरकत वाली चीज़ अता फ़रमाता है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने जब अपने बेटे को अल्लाह के हुक्म पर क़ुर्बान करने का इरादा किया, तो अल्लाह ने उन्हें दोनों बेटों को सलामत रखा और उन्हें नबुव्वत का शरफ़ अता किया।

यह भी याद रखने की बात है कि अल्लाह की बशारत (खुशखबरी) सिर्फ़ दुनिया की चीज़ों तक महदूद नहीं है, बल्कि वह अपने नेक बंदों को आख़िरत की कामयाबी और जन्नत की खुशखबरी भी देता है। जो लोग अल्लाह की राह में सब्र करते हैं और उसके हुक्मों की तामील करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त और कामयाबी अता फ़रमाता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि नबुव्वत और नेकी अल्लाह की ख़ास रहमत है, जो वह अपने चुने हुए बंदों को देता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें और हमारी औलाद को नेक बनाए और हमें अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 110-114 — अस-साफ्फात

110كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम यूँ नेकी करने वालों को जज़ाए ख़ैर देते हैं
111إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थे
112وَبَشَّرْنَاهُ بِإِسْحَاقَ نَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ
और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी थी
113وَبَارَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰ إِسْحَاقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ مُبِينٌ
जो एक नेकोसार नबी थे और हमने खुद इबराहीम पर और इसहाक़ पर अपनी बरकत नाज़िल की और इन दोनों की नस्ल में बाज़ तो नेकोकार और बाज़ (नाफरमानी करके) अपनी जान पर सरीही सितम ढ़ाने वाला
114وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
112आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 112

सूरा अस-साफ्फात आयत 112 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने इबराहीम को इसहाक़ (के पैदा होने की) खुशख़बरी…

सूरा आयत 112/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 110–114. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए