अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَنَنَّا: हमने उपकार किया, अर्थात् बड़ी कृपा और एहसान किया।
- مُوسَىٰ وَهَارُون: मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई हारून (अलैहिस्सलाम)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने दो महान पैग़म्बरों मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) का ज़िक्र फ़रमाते हुए बताया कि उसने उन दोनों पर बड़ा उपकार और एहसान किया। यह उपकार उन्हें नबुव्वत और रिसालत (पैग़म्बरी) प्रदान करके किया, जो सबसे बड़ा सम्मान और श्रेष्ठता है जो किसी इंसान को मिल सकती है। अल्लाह ने उन्हें चुना, उन्हें अपना पैग़ाम पहुँचाने के लिए मुख़्तार किया, और उन्हें फ़िरऔन के अत्याचारी शासन के सामने सच्चाई का झंडा बुलंद करने का गौरव प्रदान किया।
इसके साथ ही, अल्लाह ने उन्हें और उनकी क़ौम को फ़िरऔन की ग़ुलामी, ज़िल्लत और अपमान से निजात दी, और उन्हें समुद्र पार कराकर उनके दुश्मनों से बचाया। यह सब अल्लाह की विशेष कृपा और दया का परिणाम था, जो उसने अपने इन नेक बंदों पर की।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अपने नेक और सब्र करने वाले बंदों पर हमेशा कृपा करता है। जब कोई बंदा अल्लाह की राह में मुश्किलों का सामना करता है और सब्र करता है, तो अल्लाह उसे सम्मान, सफलता और निजात देता है। मूसा और हारून (अलैहिमुस्सलाम) ने जब फ़िरऔन के सामने सच्चाई पेश की, तो उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन अल्लाह ने उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ा। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम भी अपनी ज़िंदगी में सच्चाई और नेकी पर डटे रहें, क्योंकि अल्लाह की मदद हमेशा सच्चे और सब्र करने वालों के साथ होती है। यह आयत हमें अल्लाह के एहसानों को याद करने और उसके प्रति आभारी होने की भी तालीम देती है, क्योंकि अल्लाह ने हमें इस्लाम और ईमान जैसी नेमतें दी हैं, जो सबसे बड़ा उपकार है।
📜 आयत 112-116 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 114
सूरा अस-साफ्फात आयत 114 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए…सूरा आयत 114/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 112–116. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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