अस-साफ्फात · 155/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝١٥٥
Afalaa tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفَلَا تَذَكَّرُونَ: तो क्या तुम नसीहत और सीख नहीं लेते? (क्या तुम विचार नहीं करते?)

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों से पूछ रहे हैं कि क्या तुम लोग सोचते-समझते नहीं हो? क्या तुम्हारे दिलों पर ऐसा ज़ंग चढ़ गया है कि तुम्हें सत्य दिखाई नहीं देता? तुम यह कैसे कह सकते हो कि अल्लाह की कोई संतान है? अल्लाह तआला इन सब बातों से पाक और बहुत ऊँचा है।

यदि तुम ज़रा भी विचार करो, तो तुम्हें स्वयं ही अपने इस विश्वास की बेहूदगी समझ आ जाएगी। क्या वह अल्लाह जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, जो सब कुछ का मालिक है, उसे किसी संतान की आवश्यकता हो सकती है? संतान की आवश्यकता उसे होती है जो अकेला हो, कमज़ोर हो, या जिसे मदद की ज़रूरत हो। अल्लाह तो बेनियाज़ है, उसे किसी की ज़रूरत नहीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें हर मामले में अक्ल और दिमाग़ से काम लेना चाहिए। जो लोग अल्लाह के बारे में ग़लत ख़्यालात रखते हैं, वे दरअसल अपनी नासमझी और अंधी पैरवी की वजह से ऐसा करते हैं। अगर वे खुली आँखों से देखें, तो उन्हें सच्चाई खुद-ब-खुद नज़र आ जाएगी।

प्यारे भाइयो और बहनो! अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ दे कि हम हर मामले में सोच-समझकर काम लें और उसकी पाक ज़ात के बारे में वही अक़ीदा रखें जो उसने खुद अपनी किताब में बयान किया है। क्योंकि अल्लाह की शान इन सब बातों से बहुत ऊँची है जो लोग उसके बारे में कहते हैं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह को उसी तरह पहचानें जैसा उसने खुद बयान किया है — एक, अकेला, बेनियाज़, जिसकी कोई संतान नहीं, न कोई साझीदार। यही सच्चा ईमान है और यही राहे-सीधी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 153-157 — अस-साफ्फात

153أَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِينَ
क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है
154مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो
155أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
156أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُّبِينٌ
या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है
157فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो
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अनुवाद — अस-साफ्फात 155

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Tuesday, August 18, 2026

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