अस-साफ्फात · 156/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُّبِينٌ ۝١٥٦
Am lakum sultaanum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सुल्तान: प्रमाण, हुज्जत, स्पष्ट दलील
  • मुबीन: स्पष्ट, खुला हुआ, जो हर संदेह को दूर कर दे

तफसीर:

अर्थात, क्या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है जो तुम्हारे इस झूठे दावे की गवाही देता हो कि अल्लाह की कोई संतान है? क्या कोई ऐसी किताब या कोई रसूल तुम्हारे पास आया है जिसने यह बात कही हो? बिल्कुल नहीं! यह तो केवल तुम्हारा मनगढ़ंत झूठ है, जिसके पीछे न कोई तर्क है, न कोई प्रमाण, न कोई रहस्योद्घाटन।

यह आयत उन लोगों को जवाब दे रही है जो अल्लाह के बारे में बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं, जैसे कि फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहना या ईसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह का बेटा कहना। अल्लाह तआला उनसे पूछते हैं: क्या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है? क्या कोई किताब या रसूल तुम्हारे इस दावे की ताईद करता है?

यह प्रश्न उन्हें चुप कराने के लिए है, क्योंकि कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं है। यह केवल अटकलें और अंधविश्वास हैं जिन्हें उन्होंने अपनी ओर से गढ़ लिया है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम तर्क और प्रमाण का धर्म है। हमसे कहा गया है कि जो भी बात हम कहें, उसके पीछे स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए। अल्लाह तआला ने कुरआन में कई जगह चुनौती दी है कि अगर तुम सच्चे हो तो अपना प्रमाण लाओ। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि यह अंधविश्वास और बिना प्रमाण की बातों पर नहीं चलता, बल्कि हर चीज़ को तर्क और दलील से साबित करता है।

अल्लाह तआला की पाक ज़ात हर उस बात से पाक है जो ये लोग कहते हैं। वह एक है, अकेला है, उसकी कोई संतान नहीं, न वह किसी का बेटा है, और न उसका कोई साथी है। यही तौहीद का पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया। हमें चाहिए कि हम इसी पाक अक़ीदे पर दृढ़ रहें और लोगों को भी इसी ओर बुलाएँ — एक ऐसे अल्लाह की ओर जो सबसे बड़ा, सबसे शक्तिशाली और सबसे दयालु है, और जिसने हमें इस सुंदर दीन से नवाज़ा है।



📜 आयत 154-158 — सूरा अस-साफ्फात

154مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो
155أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
156أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُّبِينٌ
या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है
157فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो
158وَجَعَلُوا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे
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अनुवाद — अस-साफ्फात 156

सूरा अस-साफ्फात आयत 156 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है

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Monday, September 7, 2026

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