अस-साफ्फात · 172/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنصُورُونَ ۝١٧٢
Innaa hum lahumul mansooroon
📖 हिंदी अर्थ
कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِنَّهُمْ: निस्संदेह वे (अल्लाह के पैग़म्बर और उनके सच्चे अनुयायी)।
  • لَهُمُ: उन्हीं के लिए (विशेष रूप से)।
  • الْمَنصُورُونَ: सहायता प्राप्त (जिन्हें अल्लाह की ओर से विजय और प्रभुत्व प्रदान किया गया हो)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की उस अपरिवर्तनीय और अटल घोषणा को व्यक्त करती है जो उसने अपने पैग़म्बरों के बारे में पहले ही कर दी थी। अल्लाह का यह वादा अटल है कि उसके भेजे हुए रसूल और उनके सच्चे अनुयायी सदैव विजयी रहेंगे। यह विजय केवल शारीरिक या सांसारिक नहीं है, बल्कि इसमें तर्क और प्रमाण की शक्ति भी शामिल है — अर्थात वे अपने विरोधियों पर स्पष्ट तर्कों और ठोस साक्ष्यों से भी प्रभुत्व पाते हैं, और जब आवश्यकता होती है, तो अल्लाह उन्हें शक्ति और सैन्य सहायता भी प्रदान करता है।

यह आयत उन सभी के लिए एक शुभ सूचना है जो अल्लाह के मार्ग पर चलते हैं और उसके धर्म की स्थापना के लिए प्रयासरत रहते हैं। अल्लाह ने अपने रसूलों से वादा किया है कि उनकी मदद की जाएगी, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। इतिहास गवाह है कि जब भी सच्चे ईमानवालों ने अल्लाह पर भरोसा किया और अपने कर्तव्यों का पालन किया, अल्लाह ने उन्हें विजय प्रदान की।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। चाहे हमारे सामने कितनी भी बड़ी चुनौतियाँ क्यों न हों, अल्लाह का वादा सत्य है — वह अपने सच्चे बंदों की सहायता अवश्य करता है। यह हमारे लिए धैर्य, साहस और दृढ़ विश्वास की प्रेरणा है। हमें अपने जीवन में इस बात को याद रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद उन्हीं को मिलती है जो उसके मार्ग पर चलते हैं, और अंतिम विजय सदैव सत्य और धर्म के पक्ष में होती है। यही अल्लाह का शाश्वत नियम है, और यही हमारे लिए सबसे बड़ी आशा और प्रेरणा का स्रोत है।



📜 आयत 170-174 — सूरा अस-साफ्फात

170فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा
171وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا الْمُرْسَلِينَ
और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है
172إِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنصُورُونَ
कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी
173وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ الْغَالِبُونَ
और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा
174فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
172आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 172

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Saturday, October 3, 2026

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