Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جُندَنَا: हमारे (अल्लाह के) लश्कर / सैनिक, यानी अल्लाह के मोमिन बंदे।
- لَهُمُ الْغَالِبُونَ: वही (सच्चे मोमिन) ही ग़ालिब (विजयी) हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने मोमिन बंदों को खुशख़बरी सुना रहा है कि हमारा फ़रमान पहले ही सदियों से जारी हो चुका है, जिसे कोई टाल नहीं सकता — कि हमारे भेजे हुए रसूल और उनके साथी निश्चित रूप से दुनिया और आख़िरत में ग़ालिब रहेंगे। यह ग़लबा (विजय) कई रूपों में होता है: कभी हुज्जत (तर्क) और दलील से, कभी ताक़त और सत्ता से, और कभी आख़िरत में दीर्घकालिक सफलता से।
अगर किसी मोमिन को दुनिया में कुछ वक़्त के लिए मुश्किलात या शहादत का सामना करना पड़े, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह नाकाम है — बल्कि असली फ़ैसला आख़िरत में होगा, और वहाँ हर मोमिन को कामयाबी मिलेगी। यही अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता।
यह आयत हर उस इंसान के लिए एक रौशनी है जो अल्लाह के दीन की ख़िदमत करता है — चाहे वह अकेला हो या कमज़ोर, अल्लाह उसके साथ है और उसे हर हाल में ग़ालिब बनाकर रहेगा। इसलिए किसी मोमिन को कभी मायूस नहीं होना चाहिए, क्योंकि फ़तह (विजय) अल्लाह के जुंद (लश्कर) के लिए ही है — जो सच्चे दिल से अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और उसके दीन पर साबित क़दम रहते हैं। यह वादा हर ज़माने में बरकरार है, और क़यामत तक रहेगा।
📜 आयत 171-175 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 173
सूरा अस-साफ्फात आयत 173 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगासूरा आयत 173/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 171–175. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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