अस-साफ्फात · 75/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ ۝٧٥
Wa laqad naadaanaa Noohun falani`mal mujeeboon
📖 हिंदी अर्थ
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَادَانَا (नादाना): हमें पुकारा, हमसे प्रार्थना की।
  • فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ (फ़लानि'मल मुजीबून): तो कितने अच्छे उत्तर देने वाले हैं (हम हैं)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र किया है, जो सब्र और इस्तिक़ामत (दृढ़ता) की मिसाल हैं। उन्होंने अपनी क़ौम को सैकड़ों सालों तक तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत दी, लेकिन उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया और उनका मज़ाक़ उड़ाया। जब उन्होंने देखा कि उनकी क़ौम पर कोई असर नहीं हो रहा और वे हिदायत क़बूल नहीं कर रहे, तो उन्होंने अल्लाह को पुकारा और अपनी क़ौम पर अज़ाब (यातना) की दुआ माँगी।

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और बेशक नूह ने हमें पुकारा, तो हम कितने अच्छे उत्तर देने वाले हैं।" यानी अल्लाह ने उनकी दुआ को बहुत अच्छे तरीक़े से क़बूल किया और उनकी क़ौम को तूफ़ान (सैलाब) में डुबो कर हलाक कर दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत और अपने नबी की मदद का सबूत है।

इस आयत से हमें कई सबक़ मिलते हैं:

  1. दुआ की ताक़त: जब इंसान ख़ालिस दिल से अल्लाह को पुकारता है, तो अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर सुनता है और बेहतरीन अंदाज़ में क़बूल करता है। नूह (अलैहिस्सलाम) की दुआ इसकी जीती-जागती मिसाल है।
  2. सब्र और यक़ीन: नूह (अलैहिस्सलाम) ने सैकड़ों सालों तक सब्र किया और अल्लाह पर पूरा भरोसा रखा। अल्लाह ने उन्हें कभी निराश नहीं किया। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम भी मुसीबतों में सब्र करें और अल्लाह पर भरोसा रखें।
  3. अल्लाह की मदद: जब अल्लाह के बंदे उसकी राह में मेहनत करते हैं और उससे मदद माँगते हैं, तो अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह हमेशा उनकी मदद करता है, चाहे वह मदद किसी भी रूप में आए।

इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि अल्लाह अपने नबियों की दुआ को कैसे क़बूल करता है और उनके दुश्मनों को कैसे हलाक करता है। यह हमारे लिए एक तसल्ली है कि अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह की राह पर चलें और उससे मदद माँगें, तो वह हमें ज़रूर कामयाब करेगा।

अल्लाह तआला हमें भी अपने नबियों की तरह सब्र, इस्तिक़ामत और दुआ की ताक़त अता करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 73-77 — अस-साफ्फात

73فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُنذَرِينَ
ज़रा देखो तो कि जो लोग डराए जा चुके थे उनका क्या बुरा अन्जाम हुआ
74إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर (हाँ) खुदा के निरे खरे बन्दे (महफूज़ रहे)
75وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
76وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
77وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
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अनुवाद — अस-साफ्फात 75

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Tuesday, August 18, 2026

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