साद · 54/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
إِنَّ هَٰذَا لَرِزْقُنَا مَا لَهُ مِن نَّفَادٍ ۝٥٤
Inna haazaa larizqunaa maa lahoo min nafaad
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ये हमारी (दी हुई) रोज़ी है जो कभी तमाम न होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رِزْقُنَا: हमारा दिया हुआ रिज़्क़ (आजीविका/उपहार)।
  • نَّفَادٍ: समाप्त होना, खत्म होना, या कम होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) को संबोधित कर रही है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह का डर रखा, उसकी आज्ञाओं का पालन किया और उसकी मनाही से बचे रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह नेमतें और आराम जो जन्नत में तुम्हें मिलेंगे, वह हमारी ओर से तुम्हारे लिए विशेष रिज़्क़ है। यह रिज़्क़ ऐसा है जिसका कभी अंत नहीं होगा, न यह घटेगा, न खत्म होगा, और न ही कभी समाप्त होने का डर होगा। दुनिया का रिज़्क़ चाहे कितना भी ज़्यादा हो, वह समाप्त होने वाला है, लेकिन जन्नत का रिज़्क़ हमेशा रहने वाला है, हर लम्हा ताज़ा और बढ़ता हुआ। यह अल्लाह की ओर से उसके नेक बंदों के लिए एक ऐसा इनाम है जो कभी खत्म नहीं होता।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला के वादे सच्चे हैं और उसका इनाम अटूट है। जो लोग दुनिया की फ़ानी (नाशवान) चीज़ों के पीछे भागते हैं, वे समझते हैं कि यही सब कुछ है, लेकिन असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह में अपनी ज़िंदगी बिताए। अगर हम थोड़ी सी दुनिया की मुश्किलें और परेशानियाँ सह लें, तो बदले में हमें ऐसा सुख और आराम मिलेगा जिसकी कोई अंत नहीं। यह हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह की जन्नत का रिज़्क़ कभी खत्म नहीं होता, इसलिए हमें अपने अमल (कर्म) को सुधारना चाहिए, ताकि हम उन मुत्तक़ियों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह अज़ीम इनाम तैयार किया गया है। याद रखिए, दुनिया की हर चीज़ फ़ानी है, लेकिन अल्लाह का दिया हुआ रिज़्क़ बाक़ी रहने वाला है।



📜 आयत 52-56 — सूरा साद

52۞ وَعِندَهُمْ قَاصِرَاتُ الطَّرْفِ أَتْرَابٌ
और उनके पहलू में नीची नज़रों वाली (शरमीली) कमसिन बीवियाँ होगी
53هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِيَوْمِ الْحِسَابِ
(मोमिनों) ये वह चीज़ हैं जिनका हिसाब के दिन (क़यामत) के लिए तुमसे वायदा किया जाता है
54إِنَّ هَٰذَا لَرِزْقُنَا مَا لَهُ مِن نَّفَادٍ
बेशक ये हमारी (दी हुई) रोज़ी है जो कभी तमाम न होगी
55هَٰذَا ۚ وَإِنَّ لِلطَّاغِينَ لَشَرَّ مَآبٍ
ये परहेज़गारों का (अन्जाम) है और सरकशों का तो यक़ीनी बुरा ठिकाना है
56جَهَنَّمَ يَصْلَوْنَهَا فَبِئْسَ الْمِهَادُ
जहन्नुम जिसमें उनको जाना पड़ेगा तो वह क्या बुरा ठिकाना है
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
54आयत

अनुवाद — साद 54

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Friday, October 2, 2026

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