साद · 55/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
هَٰذَا ۚ وَإِنَّ لِلطَّاغِينَ لَشَرَّ مَآبٍ ۝٥٥
Haazaa; wa inna littaagheena lasharra ma-aab
📖 हिंदी अर्थ
ये परहेज़गारों का (अन्जाम) है और सरकशों का तो यक़ीनी बुरा ठिकाना है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الطَّاغِينَ (ताग़ीन): हद से गुज़रने वाले, काफ़िर और अवज्ञाकारी लोग।
  • شَرَّ مَآبٍ (शर्रे मआब): सबसे बुरा ठिकाना या लौटने की जगह।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वही चीज़ है जिसका ज़िक्र पहले की आयात में मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए किया गया — यानी जन्नत की नेमतें, आराम और इज़्ज़त। लेकिन अब अल्लाह तआला उन लोगों की हालत बयान कर रहे हैं जो हद से गुज़र गए, जिन्होंने कुफ़्र और गुनाहों में चरम सीमा को छू लिया। उनके लिए बेहद बुरा ठिकाना है — वह है जहन्नम की आग।

यह आयत एक गहरी चेतावनी है कि जो लोग अल्लाह की हदों को तोड़ते हैं, उनके पास कोई अच्छा अंजाम नहीं। उनका ठिकाना ऐसा है जो हर बुराई से भरा हुआ है — आग, अज़ाब और रुसवाई। वे जिस भी तरफ़ मुड़ेंगे, अज़ाब ही पाएँगे। यह उनके कर्मों का बदला है, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी को अपना रास्ता बनाया और हक़ को ठुकराया।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि आज की ज़िंदगी में हम जो रास्ता चुनते हैं, वही कल हमारा ठिकाना तय करेगा। जो लोग दुनिया में अल्लाह से दूर रहते हैं और अपनी ख्वाहिशों के ग़ुलाम बन जाते हैं, उनका आख़िरत में कोई सहारा नहीं होगा। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए खुशखबरी है — उनका ठिकाना जन्नत है, जहाँ हर दर्द और ग़म से पाक ज़िंदगी है।

याद रखिए, अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है, और वह चाहते हैं कि हम उसकी तरफ़ लौटें। यह आयत हमें डराती है ताकि हम सुधर जाएँ, और यही अल्लाह का इंसाफ़ है — कि वह हमें आगाह करे इससे पहले कि हम उस जगह पहुँचें जहाँ से लौटना नामुमकिन है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए खूबसूरत ठिकाना तैयार है।



📜 आयत 53-57 — सूरा साद

53هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِيَوْمِ الْحِسَابِ
(मोमिनों) ये वह चीज़ हैं जिनका हिसाब के दिन (क़यामत) के लिए तुमसे वायदा किया जाता है
54إِنَّ هَٰذَا لَرِزْقُنَا مَا لَهُ مِن نَّفَادٍ
बेशक ये हमारी (दी हुई) रोज़ी है जो कभी तमाम न होगी
55هَٰذَا ۚ وَإِنَّ لِلطَّاغِينَ لَشَرَّ مَآبٍ
ये परहेज़गारों का (अन्जाम) है और सरकशों का तो यक़ीनी बुरा ठिकाना है
56جَهَنَّمَ يَصْلَوْنَهَا فَبِئْسَ الْمِهَادُ
जहन्नुम जिसमें उनको जाना पड़ेगा तो वह क्या बुरा ठिकाना है
57هَٰذَا فَلْيَذُوقُوهُ حَمِيمٌ وَغَسَّاقٌ
ये खौलता हुआ पानी और पीप और इस तरह अनवा अक़साम की दूसरी चीज़े हैं
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
55आयत

अनुवाद — साद 55

सूरा साद आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये परहेज़गारों का (अन्जाम) है और सरकशों का तो यक़ीनी…

सूरा आयत 55/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए