अज़-ज़ुमर · 64/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
قُلْ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَأْمُرُونِّي أَعْبُدُ أَيُّهَا الْجَاهِلُونَ ۝٦٤
Qul afaghairal laahi taamurooonneee a`budu ayyuhal jaahiloon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि नादानों भला तुम मुझसे ये कहते हो कि मैं ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे की इबादत करूँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَفَغَيْرَ اللهِ – क्या अल्लाह के अलावा किसी और को?
  • تَأْمُرُونِّي – तुम मुझे आदेश देते हो?
  • أَعْبُدُ – मैं इबादत करूँ?
  • أَيُّهَا الْجَاهِلُونَ – ऐ अज्ञानियों!

तफसीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए जो आपको अपने बुतों की इबादत की तरफ बुला रहे हैं: “क्या तुम मुझे अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करने का हुक्म देते हो? ऐ अज्ञानियों! क्या तुम नहीं जानते कि इबादत के लायक सिर्फ और सिर्फ अल्लाह ही है? वही सबका रब है, वही रिज़्क़ देने वाला है, वही जीवन और मौत का मालिक है। उसके सिवा कोई माबूद नहीं, कोई पूजा का हकदार नहीं।”

यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब कुछ काफिरों ने नबी ﷺ से कहा कि आप हमारे देवताओं की इबादत कर लीजिए, तो हम आपके साथ मिलकर आपके रब की इबादत करेंगे। अल्लाह ने अपने नबी को सिखाया कि वह उन्हें जवाब दें: “क्या तुम मुझे अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत का हुक्म देते हो? यह कितनी बड़ी जहालत है!”

इस आयत में नबी ﷺ के लिए एक बड़ी तसल्ली और हिम्मत है, और हर मुसलमान के लिए एक सबक़ है कि हमें किसी भी हालत में सिर्फ अल्लाह ही की इबादत करनी है। चाहे दुनिया के लोग कितना ही दबाव डालें, कितनी ही कोशिशें करें, हमें उनकी बातों में नहीं आना है। अल्लाह की इबादत से बढ़कर कोई इज़्ज़त और शान नहीं है। जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत करते हैं, वह सिर्फ अपनी जहालत की वजह से ऐसा करते हैं, क्योंकि अगर वह थोड़ी सी भी अक्ल से काम लेते तो समझ जाते कि जो खुद मोहताज है, वह किसी की इबादत का हकदार कैसे हो सकता है?

याद रखिए! अल्लाह की इबादत ही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है, और यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब बनाती है। जो लोग इस हक़ीक़त को समझ गए, वही सच्चे इंसान हैं, और जो नहीं समझे, वही असली जाहिल हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 62-66 — अज़-ज़ुमर

62اللَّهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
ख़ुदा ही हर चीज़ का जानने वाला है और वही हर चीज़ का निगेहबान है
63لَّهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास है और जो लोग उसकी आयतों से इन्कार कर बैठें वही घाटे में रहेगें
64قُلْ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَأْمُرُونِّي أَعْبُدُ أَيُّهَا الْجَاهِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि नादानों भला तुम मुझसे ये कहते हो कि मैं ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे की इबादत करूँ
65وَلَقَدْ أُوحِيَ إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ لَئِنْ أَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारी तरफ और उन (पैग़म्बरों) की तरफ जो तुमसे पहले हो चुके हैं यक़ीनन ये वही भेजी जा की है कि अगर (कहीं) शिर्क किया तो यक़ीनन तुम्हारे सारे अमल अकारत हो जाएँगे और तुम तो ज़रूर घाटे में आ जाओगे
66بَلِ اللَّهَ فَاعْبُدْ وَكُن مِّنَ الشَّاكِرِينَ
बल्कि तुम ख़ुदा ही कि इबादत करो और शुक्र गुज़ारों में हो
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
64आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 64

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Tuesday, August 18, 2026

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