अज़-ज़ुमर · 63/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
لَّهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ ۝٦٣
Lahoo maqaaleedus sa maawaati wal ard; wallazeena kafaroo bi ayaatil laahi ulaaa`ika humul khaasiroon
📖 हिंदी अर्थ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास है और जो लोग उसकी आयतों से इन्कार कर बैठें वही घाटे में रहेगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَقَالِيدُ: चाबियाँ, कुंजियाँ (ख़ज़ानों की)।
  • السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आसमानों और ज़मीन (के ख़ज़ाने)।
  • الْخَاسِرُونَ: नुक़सान उठाने वाले, घाटे में रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही के पास आसमानों और ज़मीन के सारे ख़ज़ानों की चाबियाँ हैं। वही चाहता है तो बारिश भेजता है, वही चाहता है तो ज़मीन से नबातात (वनस्पतियाँ) उगाता है, वही चाहता है तो रिज़्क़ (रोज़ी) कुशादा (खोल) करता है और वही चाहता है तो तंग करता है। उसकी कुदरत (शक्ति) और मालिकियत (स्वामित्व) में कोई शरीक (साझीदार) नहीं। यह सारी कुंजियाँ सिर्फ़ उसी के हाथ में हैं, और वह अपने बंदों को जितना चाहता है, अपनी रहमत से अता (प्रदान) करता है।

और जिन लोगों ने अल्लाह की आयतों (निशानियों) और उसके स्पष्ट प्रमाणों को झुठलाया और उन पर ईमान नहीं लाए, वही लोग सच्चे नुक़सान उठाने वाले हैं। उनका यह नुक़सान दुनिया में भी है कि उन्हें ईमान की नेमत (दौलत) से महरूम (वंचित) रखा गया, और आख़िरत (परलोक) में भी यह नुक़सान और भी बड़ा होगा, जब वे हमेशा के लिए जहन्नम (नरक) की आग में झोंक दिए जाएँगे।

दावती पहलू (प्रेरक पक्ष):

यह आयत हमें सिखाती है कि सारी कुदरत और सारे इख़्तियारात (अधिकार) सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में हैं। जब हम यह समझ लें कि रिज़्क़, बारिश, नबातात, ज़िंदगी और मौत — सब कुछ उसी के इख़्तियार में है, तो हमारा दिल सिर्फ़ उसी से जुड़ जाता है। हमें किसी इंसान से नहीं, बल्कि सीधे अल्लाह से माँगना चाहिए, क्योंकि असली ख़ज़ानों की चाबियाँ उसी के पास हैं। यही ईमान की मिठास है कि बंदा हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखे और उसकी आयतों पर दिल से यक़ीन करे। जो लोग इन आयतों से मुँह मोड़ते हैं, वह खुद अपने नुक़सान का सामान करते हैं। अल्लाह तआला हम सबको ईमान की दौलत से नवाज़े और हमें उन ख़ास बंदों में शामिल करे जो उसकी आयतों पर दिल से ईमान लाते हैं। आमीन।



📜 आयत 61-65 — अज़-ज़ुमर

61وَيُنَجِّي اللَّهُ الَّذِينَ اتَّقَوْا بِمَفَازَتِهِمْ لَا يَمَسُّهُمُ السُّوءُ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
और जो लोग परहेज़गार हैं ख़ुदा उन्हें उनकी कामयाबी (और सआदत) के सबब निजात देगा कि उन्हें तकलीफ छुएगी भी नहीं और न यह लोग (किसी तरह) रंजीदा दिल होंगे
62اللَّهُ خَالِقُ كُلِّ شَيْءٍ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ
ख़ुदा ही हर चीज़ का जानने वाला है और वही हर चीज़ का निगेहबान है
63لَّهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास है और जो लोग उसकी आयतों से इन्कार कर बैठें वही घाटे में रहेगें
64قُلْ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَأْمُرُونِّي أَعْبُدُ أَيُّهَا الْجَاهِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि नादानों भला तुम मुझसे ये कहते हो कि मैं ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे की इबादत करूँ
65وَلَقَدْ أُوحِيَ إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ لَئِنْ أَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारी तरफ और उन (पैग़म्बरों) की तरफ जो तुमसे पहले हो चुके हैं यक़ीनन ये वही भेजी जा की है कि अगर (कहीं) शिर्क किया तो यक़ीनन तुम्हारे सारे अमल अकारत हो जाएँगे और तुम तो ज़रूर घाटे में आ जाओगे
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
63आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 63

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Tuesday, August 18, 2026

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