अज़-ज़ुमर · 65/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
وَلَقَدْ أُوحِيَ إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ لَئِنْ أَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ ۝٦٥
Wa laqad oohiya ilaika wa ilal lazeena min qablika la in ashrakta la yahbatanna `amalu ka wa latakoonanna minal khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम्हारी तरफ और उन (पैग़म्बरों) की तरफ जो तुमसे पहले हो चुके हैं यक़ीनन ये वही भेजी जा की है कि अगर (कहीं) शिर्क किया तो यक़ीनन तुम्हारे सारे अमल अकारत हो जाएँगे और तुम तो ज़रूर घाटे में आ जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अशरक्त (أَشْرَكْتَ): तूने शिर्क किया, अर्थात अल्लाह के साथ किसी और को पूजा में शामिल किया।
  • लयहबतन्न (لَيَحْبَطَنَّ): अवश्य ही नष्ट हो जाएगा, बेकार हो जाएगा।
  • अमलुक (عَمَلُكَ): तेरा (नेक) कर्म।
  • अल-ख़ासिरीन (الْخَاسِرِينَ): घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)! यह बात सिर्फ़ आप पर ही नहीं, बल्कि आपसे पहले आने वाले सभी नबियों और रसूलों पर भी अल्लाह की ओर से वही (प्रकाशना) भेजी गई थी कि यदि तूने अल्लाह के साथ किसी और को पूजा में शामिल किया (शिर्क किया), तो तेरा सम्पूर्ण कर्म अवश्य ही व्यर्थ हो जाएगा। चाहे वे कितने ही अच्छे और नेक क्यों न हों — नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, सदक़ा, अच्छे आचरण — सब कुछ मिट्टी में मिल जाएगा, क्योंकि शिर्क एक ऐसा पाप है जो हर नेकी को जड़ से उखाड़ फेंकता है। और तू उन लोगों में से हो जाएगा जिन्होंने दुनिया में अपना धर्म और आख़िरत (परलोक) दोनों गँवा दिए, और आख़िरत में उनके लिए सिर्फ़ अल्लाह की यातना और सज़ा है।

यह बात समझ लेना बहुत ज़रूरी है कि अल्लाह तआला ने यह चेतावनी नबियों को दी, जो सबसे पवित्र और मासूम (पापों से सुरक्षित) होते हैं — यह उनके लिए एक तरह से सम्मान और ऊँचे दर्जे की निशानी है, और हमारे लिए एक कड़ा पाठ है। जब नबियों को यह सख़्त तनबीह (चेतावनी) दी गई, तो हम आम मुसलमानों को तो और भी ज़्यादा सावधान रहना चाहिए कि कहीं हमारे अंदर शिर्क की कोई सूरत — जैसे बड़ों, पीरों, मज़ारों, या किसी और से अल्लाह के सिवा मदद माँगना, या किसी को अल्लाह के गुणों में शरीक समझना — न पनप जाए।

याद रखिए, अल्लाह की रहमत बेशुमार है, लेकिन शिर्क ऐसा पाप है जिसे अल्लाह कभी माफ़ नहीं करता (जब तक इंसान तौबा न करे)। इसलिए अपने ईमान को हर उस चीज़ से बचाइए जो उसे दूषित कर सके। तौहीद (अल्लाह की एकता) ही वह बुनियाद है जिस पर हर नेकी टिकी है — जिसका शिर्क से कोई वास्ता नहीं, उसका हर अच्छा काम अल्लाह के यहाँ क़बूल होता है, और जिसने शिर्क किया, उसकी सारी नेकियाँ राख हो जाती हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अपने दिल को हमेशा साफ़ रखें, सिर्फ़ अल्लाह से डरें, सिर्फ़ अल्लाह से उम्मीद रखें, और अपने हर अमल को सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको शिर्क से बचाए और हमारे सारे नेक कर्मों को क़बूल फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 63-67 — सूरा अज़-ज़ुमर

63لَّهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۗ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ اللَّهِ أُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
सारे आसमान व ज़मीन की कुन्जियाँ उसके पास है और जो लोग उसकी आयतों से इन्कार कर बैठें वही घाटे में रहेगें
64قُلْ أَفَغَيْرَ اللَّهِ تَأْمُرُونِّي أَعْبُدُ أَيُّهَا الْجَاهِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि नादानों भला तुम मुझसे ये कहते हो कि मैं ख़ुदा के सिवा किसी दूसरे की इबादत करूँ
65وَلَقَدْ أُوحِيَ إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ لَئِنْ أَشْرَكْتَ لَيَحْبَطَنَّ عَمَلُكَ وَلَتَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारी तरफ और उन (पैग़म्बरों) की तरफ जो तुमसे पहले हो चुके हैं यक़ीनन ये वही भेजी जा की है कि अगर (कहीं) शिर्क किया तो यक़ीनन तुम्हारे सारे अमल अकारत हो जाएँगे और तुम तो ज़रूर घाटे में आ जाओगे
66بَلِ اللَّهَ فَاعْبُدْ وَكُن مِّنَ الشَّاكِرِينَ
बल्कि तुम ख़ुदा ही कि इबादत करो और शुक्र गुज़ारों में हो
67وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالْأَرْضُ جَمِيعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَالسَّمَاوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَمِينِهِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
और उन लोगों ने ख़ुदा की जैसी क़द्र दानी करनी चाहिए थी उसकी ( कुछ भी ) कद्र न की हालाँकि ( वह ऐसा क़ादिर है कि) क़यामत के दिन सारी ज़मीन (गोया) उसकी मुट्ठी में होगी और सारे आसमान (गोया) उसके दाहिने हाथ में लिपटे हुए हैं जिसे ये लोग उसका शरीक बनाते हैं वह उससे पाकीज़ा और बरतर है
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
65आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 65

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Thursday, October 1, 2026

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