Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अशरक्त (أَشْرَكْتَ): तूने शिर्क किया, अर्थात अल्लाह के साथ किसी और को पूजा में शामिल किया।
- लयहबतन्न (لَيَحْبَطَنَّ): अवश्य ही नष्ट हो जाएगा, बेकार हो जाएगा।
- अमलुक (عَمَلُكَ): तेरा (नेक) कर्म।
- अल-ख़ासिरीन (الْخَاسِرِينَ): घाटे में रहने वाले, नुक़सान उठाने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)! यह बात सिर्फ़ आप पर ही नहीं, बल्कि आपसे पहले आने वाले सभी नबियों और रसूलों पर भी अल्लाह की ओर से वही (प्रकाशना) भेजी गई थी कि यदि तूने अल्लाह के साथ किसी और को पूजा में शामिल किया (शिर्क किया), तो तेरा सम्पूर्ण कर्म अवश्य ही व्यर्थ हो जाएगा। चाहे वे कितने ही अच्छे और नेक क्यों न हों — नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, सदक़ा, अच्छे आचरण — सब कुछ मिट्टी में मिल जाएगा, क्योंकि शिर्क एक ऐसा पाप है जो हर नेकी को जड़ से उखाड़ फेंकता है। और तू उन लोगों में से हो जाएगा जिन्होंने दुनिया में अपना धर्म और आख़िरत (परलोक) दोनों गँवा दिए, और आख़िरत में उनके लिए सिर्फ़ अल्लाह की यातना और सज़ा है।
यह बात समझ लेना बहुत ज़रूरी है कि अल्लाह तआला ने यह चेतावनी नबियों को दी, जो सबसे पवित्र और मासूम (पापों से सुरक्षित) होते हैं — यह उनके लिए एक तरह से सम्मान और ऊँचे दर्जे की निशानी है, और हमारे लिए एक कड़ा पाठ है। जब नबियों को यह सख़्त तनबीह (चेतावनी) दी गई, तो हम आम मुसलमानों को तो और भी ज़्यादा सावधान रहना चाहिए कि कहीं हमारे अंदर शिर्क की कोई सूरत — जैसे बड़ों, पीरों, मज़ारों, या किसी और से अल्लाह के सिवा मदद माँगना, या किसी को अल्लाह के गुणों में शरीक समझना — न पनप जाए।
याद रखिए, अल्लाह की रहमत बेशुमार है, लेकिन शिर्क ऐसा पाप है जिसे अल्लाह कभी माफ़ नहीं करता (जब तक इंसान तौबा न करे)। इसलिए अपने ईमान को हर उस चीज़ से बचाइए जो उसे दूषित कर सके। तौहीद (अल्लाह की एकता) ही वह बुनियाद है जिस पर हर नेकी टिकी है — जिसका शिर्क से कोई वास्ता नहीं, उसका हर अच्छा काम अल्लाह के यहाँ क़बूल होता है, और जिसने शिर्क किया, उसकी सारी नेकियाँ राख हो जाती हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि अपने दिल को हमेशा साफ़ रखें, सिर्फ़ अल्लाह से डरें, सिर्फ़ अल्लाह से उम्मीद रखें, और अपने हर अमल को सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा (खुशी) के लिए करें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको शिर्क से बचाए और हमारे सारे नेक कर्मों को क़बूल फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 63-67 — सूरा अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 65
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम्हारी तरफ और उन (पैग़म्बरों) की तरफ…सूरा आयत 65/75 — सूरा अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुमर सुनें, सूरा अज़-ज़ुमर अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुमर mp3, सूरा अज़-ज़ुमर pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुमर
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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