अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अल-जह्र (الجهر): ऊँची आवाज़ से कहना, प्रकट करना।
- बिस्सू (بالسوء): बुरी बात, गलत कथन, अपशब्द।
- मिन अल-क़ौल (من القول): बोली गई बात में से।
- इल्ला मन ज़ुलिम (إلا من ظلم): उस व्यक्ति के अलावा जिस पर अत्याचार/ज़ुल्म हुआ हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने प्यारे बंदों से फ़रमाता है कि वह उस बात को पसंद नहीं करता जिसमें किसी की बुराई ऊँची आवाज़ में की जाए, चाहे वह बात सच ही क्यों न हो। इस्लाम सिखाता है कि इंसान को अपनी ज़ुबान को पाक रखना चाहिए और दूसरों की बुराईयाँ फैलाने से बचना चाहिए। लेकिन अल्लाह ने एक रहमत और नर्मी रखी है—जिस व्यक्ति पर ज़ुल्म हुआ हो, उसे इजाज़त दी गई है कि वह अपने ज़ालिम की शिकायत कर सकता है, उस पर बुराई का बदला बराबरी के साथ दे सकता है, या उसके खिलाफ़ दुआ कर सकता है। यह उसकी मजबूरी है, और अल्लाह ने इसे हलाल किया है ताकि इंसान अपने हक़ के लिए आवाज़ उठा सके।
लेकिन इसके बावजूद, अगर मज़लूम (अत्याचारित) व्यक्ति सब्र कर ले और अल्लाह से बदला लेने की दुआ करे, तो यह उसके लिए बेहतर और अफ़ज़ल है। क्योंकि सब्र करने वालों के लिए अल्लाह के पास बड़ा अज्र और इनाम है। याद रखिए, अल्लाह ने क़ुरआन में कहीं और फ़रमाया है कि "जो सब्र करे और माफ़ कर दे, तो यह बड़े हौसले का काम है।"
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह सब कुछ सुनने वाला है—चाहे आप धीरे से कहें या ज़ोर से, और वह सब कुछ जानने वाला है—आपके दिल के इरादों और नीयतों को भी वह जानता है। इसलिए अगर आप बुराई कहते हैं, तो वह सुनता है; और अगर आप सब्र करते हैं, तो वह जानता है। उसका इन्साफ़ और उसकी रहमत दोनों आपके साथ हैं।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम कितना पाक और मेहनती दीन है—यह हमारी ज़ुबान को भी पाक रखना सिखाता है। अल्लाह हमें बुराई कहने से रोकता है, लेकिन जब हम पर ज़ुल्म हो, तो हमें हक़ लेने का रास्ता भी देता है। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमारे लिए हर मुश्किल में राह निकाली है। और सबसे बड़ी बात—अल्लाह हमारी हर बात सुनता है और हर नीयत जानता है, इसलिए हमें चाहिए कि हम उससे डरें, उससे प्यार करें, और अपनी ज़ुबान को उसकी रज़ा के मुताबिक इस्तेमाल करें। जो लोग सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में बेहतर बदला देगा।
📜 आयत 146-150 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 148
सूरा अन-निसा आयत 148 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा (किसी को) हॉक पुकार कर बुरा कहने को पसन्द…सूरा आयत 148/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 146–150. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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