अन-निसा · 29/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَكُم بَيْنَكُم بِالْبَاطِلِ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَارَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ ۚ وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا ۝٢٩
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo laa taakulooo amwaalakum bainakum bilbaatili `illaaa an takoona tijaaratan `an taraadim minkum; wa laa taqtulooo anfusakum; innal laaha kaana bikum Raheemaa
📖 हिंदी अर्थ
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हॉ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूंट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْبَاطِلِ: गलत और अवैध तरीके से, जैसे धोखा, चोरी, रिश्वत, सूद, जुआ आदि।
  • عَن تَرَاضٍ: आपसी सहमति और खुशी से, बिना किसी दबाव या धोखे के।
  • لَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ: अपनी जानों को हलाक न करो, और न ही एक-दूसरे की जान लो।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! अल्लाह ने तुम्हें आपस में एक-दूसरे के माल को गलत और अवैध तरीकों से खाने से मना किया है। यानी किसी का माल बिना हक़ के हड़पना, चाहे वह चोरी से हो, धोखे से, रिश्वत से, जुए से, या किसी और नाजायज़ ज़रिये से — यह सब बिल्कुल हराम है। हालाँकि, अल्लाह ने एक रास्ता हलाल ठहराया है, और वह है व्यापार (तिजारत) — लेकिन शर्त यह है कि वह आपसी खुशी और सहमति (तराज़ी) पर आधारित हो। यानी लेन-देन में न तो कोई धोखा हो, न ज़बरदस्ती, और न ही कोई ऐसी चीज़ जो शरई तौर पर नाजायज़ हो।

इसके बाद अल्लाह फरमाता है: "और अपनी जानों को क़त्ल मत करो।" इसका मतलब यह है कि न तो तुम एक-दूसरे की जान लो, और न ही अपनी ही जान को हलाकत में डालो। यानी आत्महत्या करना, या ऐसे कामों में पड़ना जो तुम्हें तबाही की तरफ ले जाएँ — यह सब मना है। जब कोई व्यक्ति दूसरे का माल नाजायज़ तरीके से खाता है, तो वह अपने लिए अल्लाह का गज़ब और समाज में फसाद खरीदता है, जो उसकी दुनिया और आख़िरत दोनों की बर्बादी का सबब बनता है।

अल्लाह ने यह सब इसलिए फरमाया क्योंकि वह तुम पर बहुत रहम करने वाला है। उसकी रहमत ही है कि उसने तुम्हारे लिए हलाल कमाई का रास्ता खोला, हराम से रोका, और तुम्हारी जानों और मालों की हिफाज़त का हुक्म दिया। वह चाहता है कि तुम एक सुखी, शांतिपूर्ण और भाईचारे वाली ज़िंदगी गुज़ारो।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस्लाम में माल की हिफाज़त को बहुत अहमियत दी गई है — किसी का हक़ मारना बड़ा गुनाह है।
  2. हलाल कमाई और आपसी रज़ामंदी से किया गया व्यापार न सिर्फ जायज़ है, बल्कि अल्लाह की नेमत है।
  3. इस्लाम आत्महत्या और आत्म-विनाश की सख्त मनाही करता है — इंसान की जान अल्लाह की अमानत है।
  4. अल्लाह की रहमत का तकाज़ा है कि वह हमें उन चीज़ों से रोके जो हमारे लिए तबाही का सबब बनती हैं, और उन चीज़ों की तरफ ले जाए जो हमारी भलाई और कामयाबी का ज़रिया हैं।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान को अपने भाई के माल, जान और इज़्ज़त का पूरा ख्याल रखना चाहिए — यही ईमान की असली पहचान है।
🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अन-निसा

27وَاللَّهُ يُرِيدُ أَن يَتُوبَ عَلَيْكُمْ وَيُرِيدُ الَّذِينَ يَتَّبِعُونَ الشَّهَوَاتِ أَن تَمِيلُوا مَيْلًا عَظِيمًا
और ख़ुदा तो चाहता है कि तुम्हारी तौबा क़ुबूल
28يُرِيدُ اللَّهُ أَن يُخَفِّفَ عَنكُمْ ۚ وَخُلِقَ الْإِنسَانُ ضَعِيفًا
करे और जो लोग नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पडे हैं वह ये चाहते हैं कि तुम लोग (राहे हक़ से) बहुत दूर हट जाओ और ख़ुदा चाहता है कि तुमसे बार में तख़फ़ीफ़ कर दें क्योंकि आदमी तो बहुत कमज़ोर पैदा किया गया है
29يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَأْكُلُوا أَمْوَالَكُم بَيْنَكُم بِالْبَاطِلِ إِلَّا أَن تَكُونَ تِجَارَةً عَن تَرَاضٍ مِّنكُمْ ۚ وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُمْ رَحِيمًا
ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न खा जाया करो लेकिन (हॉ) तुम लोगों की बाहमी रज़ामन्दी से तिजारत हो (और उसमें एक दूसरे का माल हो तो मुज़ाएक़ा नहीं) और अपना गला आप घूंट के अपनी जान न दो (क्योंकि) ख़ुदा तो ज़रूर तुम्हारे हाल पर मेहरबान है
30وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارًا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान है
31إِن تَجْتَنِبُوا كَبَائِرَ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًا كَرِيمًا
जिन कामों की तुम्हें मनाही की जाती है अगर उनमें से तुम गुनाहे कबीरा से बचते रहे तो हम तुम्हारे (सग़ीरा) गुनाहों से भी दरगुज़र करेंगे और तुमको बहुत अच्छी इज्ज़त की जगह पहुंचा देंगे
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अनुवाद — अन-निसा 29

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Tuesday, August 18, 2026

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