अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِالْبَاطِلِ: गलत और अवैध तरीके से, जैसे धोखा, चोरी, रिश्वत, सूद, जुआ आदि।
- عَن تَرَاضٍ: आपसी सहमति और खुशी से, बिना किसी दबाव या धोखे के।
- لَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ: अपनी जानों को हलाक न करो, और न ही एक-दूसरे की जान लो।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! अल्लाह ने तुम्हें आपस में एक-दूसरे के माल को गलत और अवैध तरीकों से खाने से मना किया है। यानी किसी का माल बिना हक़ के हड़पना, चाहे वह चोरी से हो, धोखे से, रिश्वत से, जुए से, या किसी और नाजायज़ ज़रिये से — यह सब बिल्कुल हराम है। हालाँकि, अल्लाह ने एक रास्ता हलाल ठहराया है, और वह है व्यापार (तिजारत) — लेकिन शर्त यह है कि वह आपसी खुशी और सहमति (तराज़ी) पर आधारित हो। यानी लेन-देन में न तो कोई धोखा हो, न ज़बरदस्ती, और न ही कोई ऐसी चीज़ जो शरई तौर पर नाजायज़ हो।
इसके बाद अल्लाह फरमाता है: "और अपनी जानों को क़त्ल मत करो।" इसका मतलब यह है कि न तो तुम एक-दूसरे की जान लो, और न ही अपनी ही जान को हलाकत में डालो। यानी आत्महत्या करना, या ऐसे कामों में पड़ना जो तुम्हें तबाही की तरफ ले जाएँ — यह सब मना है। जब कोई व्यक्ति दूसरे का माल नाजायज़ तरीके से खाता है, तो वह अपने लिए अल्लाह का गज़ब और समाज में फसाद खरीदता है, जो उसकी दुनिया और आख़िरत दोनों की बर्बादी का सबब बनता है।
अल्लाह ने यह सब इसलिए फरमाया क्योंकि वह तुम पर बहुत रहम करने वाला है। उसकी रहमत ही है कि उसने तुम्हारे लिए हलाल कमाई का रास्ता खोला, हराम से रोका, और तुम्हारी जानों और मालों की हिफाज़त का हुक्म दिया। वह चाहता है कि तुम एक सुखी, शांतिपूर्ण और भाईचारे वाली ज़िंदगी गुज़ारो।
फ़ायदे (सबक):
- इस्लाम में माल की हिफाज़त को बहुत अहमियत दी गई है — किसी का हक़ मारना बड़ा गुनाह है।
- हलाल कमाई और आपसी रज़ामंदी से किया गया व्यापार न सिर्फ जायज़ है, बल्कि अल्लाह की नेमत है।
- इस्लाम आत्महत्या और आत्म-विनाश की सख्त मनाही करता है — इंसान की जान अल्लाह की अमानत है।
- अल्लाह की रहमत का तकाज़ा है कि वह हमें उन चीज़ों से रोके जो हमारे लिए तबाही का सबब बनती हैं, और उन चीज़ों की तरफ ले जाए जो हमारी भलाई और कामयाबी का ज़रिया हैं।
- यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान को अपने भाई के माल, जान और इज़्ज़त का पूरा ख्याल रखना चाहिए — यही ईमान की असली पहचान है।
📜 आयत 27-31 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 29
सूरा अन-निसा आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ए ईमानवालों आपस में एक दूसरे का माल नाहक़ न…सूरा आयत 29/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








