Yawma`iziny yawad dullazeena kafaroo wa`asawur Rasoola law tusawwaa bihimul ardu wa laa yaktumoonal laaha hadeesaa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और रसूल की नाफ़रमानी की ये आरज़ू करेंगे कि काश (वह पेवन्दे ख़ाक हो जाते) और उनके ऊपर से ज़मीन बराबर कर दी जाती और अफ़सोस ये लोग ख़ुदा से कोई बात उस दिन छुपा भी न सकेंगे
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🌐 اردو
اس روز کافر اور پیغمبر کے نافرمان آرزو کریں گے کہ کاش ان کو زمین میں مدفون کرکے مٹی برابر کردی جاتی اور خدا سے کوئی بات چھپا نہیں سکیں گے
उस दिन जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और रसूल की नाफ़रमानी की ये आरज़ू करेंगे कि काश (वह पेवन्दे ख़ाक हो जाते) और उनके ऊपर से ज़मीन बराबर कर दी जाती और अफ़सोस ये लोग ख़ुदा से कोई बात उस दिन छुपा भी न सकेंगे
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
يَوَدُّ: चाहेंगे, कामना करेंगे।
تُسَوَّى بِهِمُ الْأَرْضُ: उन्हें और धरती को बराबर कर दिया जाए, यानी वे मिट्टी में मिलकर धरती के समान हो जाएँ।
لَا يَكْتُمُونَ اللَّهَ حَدِيثًا: वे अल्लाह से कोई बात छिपा नहीं सकेंगे।
तफसीर (व्याख्या):
उस दिन का ज़िक्र किया जा रहा है जब अल्लाह तआला सभी को ज़िंदा करके हाशिर (इकट्ठा) करेगा। उस वक़्त जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और उसके रसूल (ﷺ) की नाफ़रमानी की, वे सख्त पछतावे और शर्मिंदगी की हालत में होंगे। वे दिल से चाहेंगे कि काश! उन्हें मिट्टी में दफ़न कर दिया जाता और धरती उनके साथ बराबर हो जाती, यानी वे मिट्टी बन जाते ताकि उन्हें दोबारा उठाया न जाए और इस हिसाब-किताब का सामना न करना पड़े। लेकिन यह कामना उनके किसी काम न आएगी।
उस दिन वे अल्लाह से कोई बात छिपा नहीं पाएँगे। अल्लाह उनके मुँह पर मुहर लगा देगा, और उनके हाथ-पैर और शरीर के अंग उनके किए हुए कर्मों की गवाही देंगे। उनकी ज़ुबानें बंद हो जाएँगी, और उनके जिस्म उनके खिलाफ गवाह बनेंगे। इस तरह उनके सारे छिपे हुए राज़ खुल जाएँगे, और वे अल्लाह से कुछ भी नहीं छिपा सकेंगे।
फ़ायदे (सीख):
यह आयत हमें बताती है कि क़यामत का दिन हक़ीक़त है, और उस दिन हर इंसान को अपने कर्मों का सामना करना होगा। इसलिए हमें आज ही अपने आचरण को सुधार लेना चाहिए।
अल्लाह तआला हर छिपी बात को जानता है, और उस दिन हमारे शरीर के अंग भी हमारे खिलाफ गवाही देंगे। इसलिए हमें खुले और छिपे हर अमल में अल्लाह से डरना चाहिए।
नाफ़रमानी और कुफ़्र का अंजाम बहुत भयानक है, और उस दिन पछतावा करने का कोई फ़ायदा नहीं होगा। इसलिए दुनिया में रहते हुए ही अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) की इताअत (आज्ञाकारिता) अपनानी चाहिए।
यह आयत हमें इस्लाम की सच्चाई और अल्लाह के इंसाफ़ की याद दिलाती है, जो हमें नेक रास्ते पर चलने की तरग़ीब देती है, ताकि हम उस दिन की शर्मिंदगी और अज़ाब से बच सकें।
उस दिन जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और रसूल की नाफ़रमानी की ये आरज़ू करेंगे कि काश (वह पेवन्दे ख़ाक हो जाते) और उनके ऊपर से ज़मीन बराबर कर दी जाती और अफ़सोस ये लोग ख़ुदा से कोई बात उस दिन छुपा भी न सकेंगे
ऐ ईमानदारों तुम नशे की हालत में नमाज़ के क़रीब न जाओ ताकि तुम जो कुछ मुंह से कहो समझो भी तो और न जिनाबत की हालत में यहॉ तक कि ग़ुस्ल कर लो मगर राह गुज़र में हो (और गुस्ल मुमकिन नहीं है तो अलबत्ता ज़रूरत नहीं) बल्कि अगर तुम मरीज़ हो और पानी नुक़सान करे या सफ़र में हो तुममें से किसी का पैख़ाना निकल आए या औरतों से सोहबत की हो और तुमको पानी न मयस्सर हो (कि तहारत करो) तो पाक मिट्टी पर तैमूम कर लो और (उस का तरीक़ा ये है कि) अपने मुंह और हाथों पर मिट्टी भरा हाथ फेरो तो बेशक ख़ुदा माफ़ करने वाला है (और) बख्श ने वाला है
(ऐ रसूल) क्या तूमने उन लोगों के हाल पर नज़र नहीं की जिन्हें किताबे ख़ुदा का कुछ हिस्सा दिया गया था (मगर) वह लोग (हिदायत के बदले) गुमराही ख़रीदने लगे उनकी ऐन मुराद यह है कि तुम भी राहे रास्त से बहक जाओ
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