अन-निसा · 41/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ شَهِيدًا ۝٤١
Fakaifa izaa ji`naa min kulli ummatim bishaheedinw wa ji`naabika `alaa haaa`ulaaa `i Shaheedan
📖 हिंदी अर्थ
(ख़ैर दुनिया में तो जो चाहे करें) भला उस वक्त क्या हाल होगा जब हम हर गिरोह के गवाह तलब करेंगे और (मोहम्मद) तुमको उन सब पर गवाह की हैसियत में तलब करेंगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَكَيْفَ: तो कैसा होगा (हाल)
  • جِئْنَا: हम लाएँगे / हम उपस्थित करेंगे
  • بِشَهِيدٍ: एक गवाह (उस उम्मत का नबी)
  • عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ: इन (सारी उम्मतों) पर
  • شَهِيدًا: गवाह बनाकर

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन के उस भयानक दृश्य की ओर संकेत करती है, जब सारे इंसान अपने-अपने अमल के साथ अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तो उस दिन काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों का क्या हाल होगा, जब हम हर उम्मत से उसका नबी गवाह बनाकर लाएँगे, जो उन पर उनके किए हुए आमाल की गवाही देगा — कि उसने उन्हें अल्लाह का पैग़ाम पहुँचा दिया था, और उन्होंने उसे झुठलाया या उसकी अवहेलना की।"

और फिर ऐ नबी! हम आपको भी लाएँगे और आपको इन सब उम्मतों पर गवाह बनाएँगे। यानी आप उस दिन इस बात की गवाही देंगे कि आपने अपनी उम्मत तक अल्लाह का पूरा पैग़ाम पहुँचा दिया था, और आप सारी उम्मतों पर गवाह होंगे कि उनके पास उनके नबियों ने हक़ पहुँचाया था। यह आपका गवाह होना आपके मुक़ाम की बुलंदी और आपकी उम्मत की विशेषता को दर्शाता है।

इस आयत में उस दिन की हैबत (रौब) और सख़्ती को बयान किया गया है, जब हर नबी अपनी उम्मत के सामने गवाही देगा, और हर इंसान अपने अमल की किताब के साथ हाज़िर होगा। यह उन लोगों के लिए डराने वाली बात है जो अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं, और उनके लिए तसल्ली है जो नबी के पैग़ाम पर ईमान लाए।

फ़ायदे (सबक़):

  1. क़यामत का दिन हक़ीक़त में आने वाला है, और उस दिन हर उम्मत से उसका नबी गवाह बनकर आएगा। यह हमें यक़ीन दिलाता है कि हमारा हर अमल दर्ज किया जा रहा है और उसकी गवाही दी जाएगी।
  2. नबी ﷺ की शान बहुत बुलंद है — वे सिर्फ़ अपनी उम्मत के ही नहीं, बल्कि सारी उम्मतों पर गवाह होंगे। यह हमारे दिल में नबी ﷺ की मुहब्बत और उनके आदाब को बढ़ाता है।
  3. यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपने नबी ﷺ के सामने शर्मिंदा न हों — उनके लाए हुए दीन पर अमल करें, ताकि क़यामत के दिन वे हमारे हक़ में गवाही दें, हमारे ख़िलाफ़ नहीं।
  4. जो लोग नबी के पैग़ाम को झुठलाते हैं या उस पर अमल नहीं करते, उनके लिए उस दिन कोई बहाना नहीं होगा, क्योंकि हर उम्मत के पास उसका नबी गवाह बनकर आएगा। यह हमें दीन पर साबित-क़दम रहने की तरग़ीब देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — अन-निसा

39وَمَاذَا عَلَيْهِمْ لَوْ آمَنُوا بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَأَنفَقُوا مِمَّا رَزَقَهُمُ اللَّهُ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِهِمْ عَلِيمًا
अगर ये लोग ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान लाते और जो कुछ ख़ुदा ने उन्हें दिया है उसमें से राहे ख़ुदा में ख़र्च करते तो उन पर क्या आफ़त आ जाती और ख़ुदा तो उनसे ख़ूब वाक़िफ़ है
40إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ ۖ وَإِن تَكُ حَسَنَةً يُضَاعِفْهَا وَيُؤْتِ مِن لَّدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًا
ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि अगर ज़र्रा बराबर भी किसी की कोई नेकी हो तो उसको दूना करता है और अपनी तरफ़ से बड़ा सवाब अता फ़रमाता है
41فَكَيْفَ إِذَا جِئْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ بِشَهِيدٍ وَجِئْنَا بِكَ عَلَىٰ هَٰؤُلَاءِ شَهِيدًا
(ख़ैर दुनिया में तो जो चाहे करें) भला उस वक्त क्या हाल होगा जब हम हर गिरोह के गवाह तलब करेंगे और (मोहम्मद) तुमको उन सब पर गवाह की हैसियत में तलब करेंगे
42يَوْمَئِذٍ يَوَدُّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَعَصَوُا الرَّسُولَ لَوْ تُسَوَّىٰ بِهِمُ الْأَرْضُ وَلَا يَكْتُمُونَ اللَّهَ حَدِيثًا
उस दिन जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया और रसूल की नाफ़रमानी की ये आरज़ू करेंगे कि काश (वह पेवन्दे ख़ाक हो जाते) और उनके ऊपर से ज़मीन बराबर कर दी जाती और अफ़सोस ये लोग ख़ुदा से कोई बात उस दिन छुपा भी न सकेंगे
43يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَقْرَبُوا الصَّلَاةَ وَأَنتُمْ سُكَارَىٰ حَتَّىٰ تَعْلَمُوا مَا تَقُولُونَ وَلَا جُنُبًا إِلَّا عَابِرِي سَبِيلٍ حَتَّىٰ تَغْتَسِلُوا ۚ وَإِن كُنتُم مَّرْضَىٰ أَوْ عَلَىٰ سَفَرٍ أَوْ جَاءَ أَحَدٌ مِّنكُم مِّنَ الْغَائِطِ أَوْ لَامَسْتُمُ النِّسَاءَ فَلَمْ تَجِدُوا مَاءً فَتَيَمَّمُوا صَعِيدًا طَيِّبًا فَامْسَحُوا بِوُجُوهِكُمْ وَأَيْدِيكُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَفُوًّا غَفُورًا
ऐ ईमानदारों तुम नशे की हालत में नमाज़ के क़रीब न जाओ ताकि तुम जो कुछ मुंह से कहो समझो भी तो और न जिनाबत की हालत में यहॉ तक कि ग़ुस्ल कर लो मगर राह गुज़र में हो (और गुस्ल मुमकिन नहीं है तो अलबत्ता ज़रूरत नहीं) बल्कि अगर तुम मरीज़ हो और पानी नुक़सान करे या सफ़र में हो तुममें से किसी का पैख़ाना निकल आए या औरतों से सोहबत की हो और तुमको पानी न मयस्सर हो (कि तहारत करो) तो पाक मिट्टी पर तैमूम कर लो और (उस का तरीक़ा ये है कि) अपने मुंह और हाथों पर मिट्टी भरा हाथ फेरो तो बेशक ख़ुदा माफ़ करने वाला है (और) बख्श ने वाला है
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अनुवाद — अन-निसा 41

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Tuesday, August 18, 2026

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