Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْمُسْتَضْعَفِينَ: वे कमज़ोर और दबे-कुचले लोग जिनमें कोई ताकत न हो।
- حِيلَةً: कोई उपाय, युक्ति या तरकीब।
- يَهْتَدُونَ سَبِيلًا: रास्ता पाना, मार्गदर्शन पाना, यहाँ अर्थ है किसी ऐसे रास्ते का पता होना जिससे वे अपनी मुश्किल से निकल सकें।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों को इस कठोर वाद (धमकी) से माफ़ी का वादा किया है, जो सच्चे दिल से ईमान लाए थे और हिजरत (प्रवास) करना चाहते थे, लेकिन उनकी स्थितियाँ उन्हें ऐसा करने से रोक रही थीं। ये वे कमज़ोर लोग हैं — चाहे वे पुरुष हों, स्त्रियाँ हों या बच्चे — जिनके पास न तो कोई ताकत है कि वे अपने ऊपर होने वाले अत्याचार और ज़ुल्म को रोक सकें, और न ही वे कोई उपाय जानते हैं जिससे वे अपनी इस कठिनाई से बच सकें। उन्हें न तो हिजरत का रास्ता मालूम है और न ही उनके पास इसे अंजाम देने की सामर्थ्य है। वे मजबूरी में उसी हाल में रह गए हैं, जबकि उनके दिल ईमान पर साबित हैं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने माफ़ी और क्षमा का वादा किया है, क्योंकि अल्लाह उनकी मजबूरी और लाचारी को भली-भाँति जानता है। वह अपने बंदों पर बड़ा दयालु और क्षमाशील है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों की मजबूरियों को समझता है और उन पर रहम करता है। वह किसी पर उसकी ताकत से ज़्यादा बोझ नहीं डालता।
- यह हमें सिखाती है कि इस्लाम में नीयत और दिल की पवित्रता की बहुत अहमियत है। जो व्यक्ति सच्चे दिल से भलाई चाहता है, लेकिन उसके हाथ में कुछ नहीं है, अल्लाह उसे उसकी नीयत के अनुसार बदला देता है।
- यह आयत हमें समाज में कमज़ोर लोगों — महिलाओं, बच्चों और बेबस लोगों — के प्रति हमदर्दी और सहानुभूति रखने की तालीम देती है, और यह कि हमें उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।
- यह हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत विस्तृत है और वह हर उस इंसान को अपनी रहमत से नवाज़ता है जो अपनी सच्ची मजबूरी के कारण कोई अच्छा काम नहीं कर पाता।
📜 आयत 96-100 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 98
सूरा अन-निसा आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो मर्द और औरतें और बच्चे इस क़दर बेबस…सूरा आयत 98/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 96–100. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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