Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذَٰلِكُم (यह सब): अर्थात यह अज़ाब जो तुम्हें मिल रहा है।
- كَفَرْتُمْ (तुमने इनकार किया): तुमने कुफ्र किया।
- يُشْرَكْ بِهِ (उसके साथ शिर्क किया जाए): अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया जाए।
- تُؤْمِنُوا (तुम ईमान लाते हो): तुम उसे सच मानते हो।
- الْعَلِيِّ (सर्वोच्च): जो अपनी ज़ात, अपनी शान और अपने बल में सबसे ऊपर है।
- الْكَبِيرِ (महान): जो अपनी अज़मत और किब्रिया में सबसे बड़ा है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह अज़ाब जो आज तुम्हें मिल रहा है, ऐ काफ़िरों! यह सिर्फ तुम्हारे अपने किए का नतीजा है। इसकी वजह यह है कि जब तुम्हें अल्लाह की वहदानियत (एकता) की ओर बुलाया जाता था—कि वही अकेला इबादत के लायक है, उसका कोई साझी नहीं—तो तुम उसे नकार देते थे और उसके साथ कुफ्र करते थे। लेकिन जब अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराया जाता, किसी बुत या किसी इंसान को उसका शरीक बनाया जाता, तो तुम उस शिर्क को मान लेते थे और उस पर ईमान ले आते थे। यानी तुम्हारा दिल सच्चाई से दूर और झूठ की तरफ झुका हुआ था।
आज जब फैसले का दिन आ गया है, तो फैसला सिर्फ अल्लाह का है—वही सर्वोच्च और महान है। वही हुक्म करता है, वही अदालत करता है। उसके हुक्म के आगे कोई नहीं चल सकता। वह जिसे चाहे राहत दे और जिसे चाहे अज़ाब में डाले। उसकी ज़ात सबसे ऊंची है, उसकी क़ुदरत सबसे बड़ी है, और उसकी अज़मत के आगे हर चीज़ छोटी है। वही अकेला इबादत के लायक है, और उसके सिवा जिन्हें तुम पुकारते थे, वे आज तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकते।
दावत (नसीहत):
ऐ इंसान! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की वहदानियत ही सच्चाई है। जो इंसान इस सच्चाई को अपना लेता है, उसका दिल सुकून पाता है और उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है। अल्लाह ने हमें बताया है कि वह अकेला ही सब कुछ कर सकता है—वही रिज़्क़ देता है, वही बीमारी में शिफा देता है, वही मुसीबत में राहत देता है। उसके सिवा कोई सहारा नहीं। जब हम उसे अकेला मान लेते हैं और उसी से मदद मांगते हैं, तो हमारी ज़िंदगी में एक अजीब सुकून और ताकत आती है।
याद रखो, आज का फैसला अल्लाह के हाथ में है, और कल (क़यामत के दिन) भी फैसला उसी का होगा। जो लोग उसकी वहदानियत पर ईमान लाए और उसके सिवा किसी को न पुकारा, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है। और जो लोग उसके साथ शिर्क करते रहे, उनके लिए अफ़सोस और अज़ाब है। आओ, हम अपने दिलों को शिर्क से पाक करें और सिर्फ अल्लाह की तरफ रुजू करें। वही हमारा रब है, वही हमारा मालिक है, और वही हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने वाला है। उसकी रहमत असीम है, और वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है। बस ज़रूरत है उसकी तरफ सच्चे दिल से लौटने की।
📜 आयत 10-14 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 12
सूरा ग़ाफिर आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये इसलिए कि जब तन्हा ख़ुदा पुकारा जाता था तो…सूरा आयत 12/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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