ग़ाफिर · 12/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
ذَٰلِكُم بِأَنَّهُ إِذَا دُعِيَ اللَّهُ وَحْدَهُ كَفَرْتُمْ ۖ وَإِن يُشْرَكْ بِهِ تُؤْمِنُوا ۚ فَالْحُكْمُ لِلَّهِ الْعَلِيِّ الْكَبِيرِ ۝١٢
Zaalikum bi annahooo izaa du`iyal laahu wahdahoo kafartum wa iny yushrak bihee tu`minoo; falhukmu lillaahil `Aliyyil Kabeer
📖 हिंदी अर्थ
ये इसलिए कि जब तन्हा ख़ुदा पुकारा जाता था तो तुम ईन्कार करते थे और अगर उसके साथ शिर्क किया जाता था तो तुम मान लेते थे तो (आज) ख़ुदा की हुकूमत है जो आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَٰلِكُم (यह सब): अर्थात यह अज़ाब जो तुम्हें मिल रहा है।
  • كَفَرْتُمْ (तुमने इनकार किया): तुमने कुफ्र किया।
  • يُشْرَكْ بِهِ (उसके साथ शिर्क किया जाए): अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराया जाए।
  • تُؤْمِنُوا (तुम ईमान लाते हो): तुम उसे सच मानते हो।
  • الْعَلِيِّ (सर्वोच्च): जो अपनी ज़ात, अपनी शान और अपने बल में सबसे ऊपर है।
  • الْكَبِيرِ (महान): जो अपनी अज़मत और किब्रिया में सबसे बड़ा है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह अज़ाब जो आज तुम्हें मिल रहा है, ऐ काफ़िरों! यह सिर्फ तुम्हारे अपने किए का नतीजा है। इसकी वजह यह है कि जब तुम्हें अल्लाह की वहदानियत (एकता) की ओर बुलाया जाता था—कि वही अकेला इबादत के लायक है, उसका कोई साझी नहीं—तो तुम उसे नकार देते थे और उसके साथ कुफ्र करते थे। लेकिन जब अल्लाह के साथ किसी और को साझी ठहराया जाता, किसी बुत या किसी इंसान को उसका शरीक बनाया जाता, तो तुम उस शिर्क को मान लेते थे और उस पर ईमान ले आते थे। यानी तुम्हारा दिल सच्चाई से दूर और झूठ की तरफ झुका हुआ था।

आज जब फैसले का दिन आ गया है, तो फैसला सिर्फ अल्लाह का है—वही सर्वोच्च और महान है। वही हुक्म करता है, वही अदालत करता है। उसके हुक्म के आगे कोई नहीं चल सकता। वह जिसे चाहे राहत दे और जिसे चाहे अज़ाब में डाले। उसकी ज़ात सबसे ऊंची है, उसकी क़ुदरत सबसे बड़ी है, और उसकी अज़मत के आगे हर चीज़ छोटी है। वही अकेला इबादत के लायक है, और उसके सिवा जिन्हें तुम पुकारते थे, वे आज तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकते।


दावत (नसीहत):

ऐ इंसान! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की वहदानियत ही सच्चाई है। जो इंसान इस सच्चाई को अपना लेता है, उसका दिल सुकून पाता है और उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है। अल्लाह ने हमें बताया है कि वह अकेला ही सब कुछ कर सकता है—वही रिज़्क़ देता है, वही बीमारी में शिफा देता है, वही मुसीबत में राहत देता है। उसके सिवा कोई सहारा नहीं। जब हम उसे अकेला मान लेते हैं और उसी से मदद मांगते हैं, तो हमारी ज़िंदगी में एक अजीब सुकून और ताकत आती है।

याद रखो, आज का फैसला अल्लाह के हाथ में है, और कल (क़यामत के दिन) भी फैसला उसी का होगा। जो लोग उसकी वहदानियत पर ईमान लाए और उसके सिवा किसी को न पुकारा, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है। और जो लोग उसके साथ शिर्क करते रहे, उनके लिए अफ़सोस और अज़ाब है। आओ, हम अपने दिलों को शिर्क से पाक करें और सिर्फ अल्लाह की तरफ रुजू करें। वही हमारा रब है, वही हमारा मालिक है, और वही हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने वाला है। उसकी रहमत असीम है, और वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है। बस ज़रूरत है उसकी तरफ सच्चे दिल से लौटने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 10-14 — ग़ाफिर

10إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنَادَوْنَ لَمَقْتُ اللَّهِ أَكْبَرُ مِن مَّقْتِكُمْ أَنفُسَكُمْ إِذْ تُدْعَوْنَ إِلَى الْإِيمَانِ فَتَكْفُرُونَ
(हाँ) जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनसे पुकार कर कह दिया जाएगा कि जितना तुम (आज) अपनी जान से बेज़ार हो उससे बढ़कर ख़ुदा तुमसे बेज़ार था जब तुम ईमान की तरफ बुलाए जाते थे तो कुफ्र करते थे
11قَالُوا رَبَّنَا أَمَتَّنَا اثْنَتَيْنِ وَأَحْيَيْتَنَا اثْنَتَيْنِ فَاعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلْ إِلَىٰ خُرُوجٍ مِّن سَبِيلٍ
वह लोग कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दो बार मार चुका और दो बार ज़िन्दा कर चुका तो अब हम अपने गुनाहों का एक़रार करते हैं तो क्या (यहाँ से) निकलने की भी कोई सबील है
12ذَٰلِكُم بِأَنَّهُ إِذَا دُعِيَ اللَّهُ وَحْدَهُ كَفَرْتُمْ ۖ وَإِن يُشْرَكْ بِهِ تُؤْمِنُوا ۚ فَالْحُكْمُ لِلَّهِ الْعَلِيِّ الْكَبِيرِ
ये इसलिए कि जब तन्हा ख़ुदा पुकारा जाता था तो तुम ईन्कार करते थे और अगर उसके साथ शिर्क किया जाता था तो तुम मान लेते थे तो (आज) ख़ुदा की हुकूमत है जो आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
13هُوَ الَّذِي يُرِيكُمْ آيَاتِهِ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ رِزْقًا ۚ وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ
वही तो है जो तुमको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है और तुम्हारे लिए आसमान से रोज़ी नाज़िल करता है और नसीहत तो बस वही हासिल करता है जो (उसकी तरफ) रूज़ू करता है
14فَادْعُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
पस तुम लोग ख़ुदा की इबादत को ख़ालिस करके उसी को पुकारो अगरचे कुफ्फ़ार बुरा मानें
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अनुवाद — ग़ाफिर 12

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Tuesday, August 18, 2026

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