ग़ाफिर · 13/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
هُوَ الَّذِي يُرِيكُمْ آيَاتِهِ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ رِزْقًا ۚ وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ ۝١٣
Huwal lazee yureekum Aayaatihee wa yunazzilu lakum minas samaaa`i rizqaa; wa maa tatazakkaru illaa mai yuneeb
📖 हिंदी अर्थ
वही तो है जो तुमको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है और तुम्हारे लिए आसमान से रोज़ी नाज़िल करता है और नसीहत तो बस वही हासिल करता है जो (उसकी तरफ) रूज़ू करता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتِهِ (उसकी निशानियाँ): अल्लाह की कुदरत और वहदानियत (एकता) पर दाल्लत करने वाली स्पष्ट निशानियाँ, चाहे वे आसमान और ज़मीन में हों या इंसान के अपने वजूद में।
  • رِزْقًا (रोज़ी): यहाँ से मुराद बारिश है, जो ज़मीन से पैदावार और तमाम खाने-पीने की चीज़ों का ज़रिया बनती है।
  • يُنِيبُ (रुजू करना): गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ पलटना, और उसकी इबादत में ख़ुलूस (सच्ची नीयत) अपनाना।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला वही ज़ात है जो तुम्हें अपनी कुदरत की निशानियाँ दिखाता है — आसमान और ज़मीन की पैदाइश, रात और दिन का बदलना, अपने आप में इंसान की बनावट — ये सब उसकी वहदानियत और कमाल कुदरत की गवाही देते हैं। वही है जो आसमान से बारिश उतारता है, जिसके ज़रिए तुम्हारी रोज़ी का सामान पैदा होता है — फसलें, फल, और ज़मीन से निकलने वाली तमाम नेअमतें।

लेकिन इन निशानियों से सिर्फ़ वही इंसान सबक़ हासिल करता है और सीधी राह पाता है जो अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ पलटता है, और उसकी इबादत को ख़ुलूस के साथ अंजाम देता है। जिसका दिल अल्लाह से जुड़ा होता है, वही इन आयतों में छिपी हिकमत को समझ पाता है।

याद रखो, अल्लाह की निशानियाँ हर तरफ बिखरी हुई हैं — तुम्हारे सामने भी और तुम्हारे अंदर भी। जो इन्हें पढ़ना सीख ले, उसका ईमान मज़बूत होता है और वह अपने रब की क़रीबी हासिल करता है। अल्लाह तआला बारिश के ज़रिए ज़मीन को ज़िंदा करता है, उसी तरह वह क़यामत के दिन मुर्दों को ज़िंदा करेगा। ये निशानियाँ तुम्हें उस रब की याद दिलाती हैं जो रहमत और कुदरत में बेमिसाल है।

तो ऐ इंसान! अपने दिल को अल्लाह की तरफ मोड़, उसकी निशानियों पर ग़ौर कर, और उसकी नेअमतों का शुक्र अदा कर। जो शख्स अल्लाह की तरफ रुजू करता है, अल्लाह उसे कभी नाकाम नहीं छोड़ता — बल्कि उसे दुनिया और आख़िरत की भलाइयाँ अता फ़रमाता है। यही वो रास्ता है जो इंसान को सच्ची कामयाबी और सुकून की मंज़िल तक पहुँचाता है।



📜 आयत 11-15 — ग़ाफिर

11قَالُوا رَبَّنَا أَمَتَّنَا اثْنَتَيْنِ وَأَحْيَيْتَنَا اثْنَتَيْنِ فَاعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلْ إِلَىٰ خُرُوجٍ مِّن سَبِيلٍ
वह लोग कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दो बार मार चुका और दो बार ज़िन्दा कर चुका तो अब हम अपने गुनाहों का एक़रार करते हैं तो क्या (यहाँ से) निकलने की भी कोई सबील है
12ذَٰلِكُم بِأَنَّهُ إِذَا دُعِيَ اللَّهُ وَحْدَهُ كَفَرْتُمْ ۖ وَإِن يُشْرَكْ بِهِ تُؤْمِنُوا ۚ فَالْحُكْمُ لِلَّهِ الْعَلِيِّ الْكَبِيرِ
ये इसलिए कि जब तन्हा ख़ुदा पुकारा जाता था तो तुम ईन्कार करते थे और अगर उसके साथ शिर्क किया जाता था तो तुम मान लेते थे तो (आज) ख़ुदा की हुकूमत है जो आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
13هُوَ الَّذِي يُرِيكُمْ آيَاتِهِ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ رِزْقًا ۚ وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ
वही तो है जो तुमको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है और तुम्हारे लिए आसमान से रोज़ी नाज़िल करता है और नसीहत तो बस वही हासिल करता है जो (उसकी तरफ) रूज़ू करता है
14فَادْعُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
पस तुम लोग ख़ुदा की इबादत को ख़ालिस करके उसी को पुकारो अगरचे कुफ्फ़ार बुरा मानें
15رَفِيعُ الدَّرَجَاتِ ذُو الْعَرْشِ يُلْقِي الرُّوحَ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ لِيُنذِرَ يَوْمَ التَّلَاقِ
ख़ुदा तो बड़ा आली मरतबा अर्श का मालिक है, वह अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से 'वही' नाज़िल करता है ताकि (लोगों को) मुलाकात (क़यामत) के दिन से डराएं
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
13आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 13

सूरा ग़ाफिर आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वही तो है जो तुमको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाता…

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Tuesday, August 18, 2026

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