Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمَتَّنَا اثْنَتَيْنِ: तुमने हमें दो बार मृत्यु दी।
- وَأَحْيَيْتَنَا اثْنَتَيْنِ: और तुमने हमें दो बार जीवन दिया।
- فَاعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا: तो हमने अपने गुनाहों का इक़रार किया।
- فَهَلْ إِلَىٰ خُرُوجٍ مِّن سَبِيلٍ: तो क्या (अब) निकलने की कोई राह है?
तफ़सीर:
जब काफ़िर लोग आख़िरत में अपनी आँखों से वो कुछ देख लेंगे जो उन्होंने दुनिया में झुठलाया था, तो वे पछतावे और शर्मिंदगी की हालत में कहेंगे: "ऐ हमारे रब! तूने हमें दो बार मौत दी और दो बार ज़िंदगी दी। पहली मौत इससे पहले थी कि हम दुनिया में आए — जब हम माँ के पेट में नुत्फ़ा (बूँद) थे और हममें जान नहीं थी। फिर तूने हमें ज़िंदगी दी जब हम दुनिया में पैदा हुए। फिर हमें मौत दी जब हमारी आज्ञा (उम्र) पूरी हुई। और अब तूने हमें दोबारा ज़िंदा किया है जब हम क़ब्रों से उठाए गए हैं। अब हम अपने गुनाहों का इक़रार करते हैं — हमने तेरे हुक्मों की नाफ़रमानी की, तेरे रसूलों को झुठलाया और आख़िरत पर ईमान नहीं लाए। तो ऐ रब! क्या अब इस आग से निकलने की कोई राह है? क्या हमें दोबारा दुनिया में भेजा जा सकता है ताकि हम अच्छे काम करें और तेरी इबादत करें?"
लेकिन यह इक़रार और यह पछतावा उस वक़्त बेकार है जब वक़्त गुज़र चुका हो। यह मौका उन्होंने दुनिया में खो दिया था। अल्लाह तआला ने उन्हें मौत से पहले तौबा करने का मौका दिया था, लेकिन उन्होंने इनकार किया। आज जब वे आज़ाब देख रहे हैं, तो उनका यह इक़रार उन्हें कोई फ़ायदा नहीं देगा। यह सिर्फ़ उनके ख़िलाफ़ गवाही बनेगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बहुत बड़ी नसीहत देती है — कि आज हम जिस दुनिया में हैं, यही हमारा मौका है। यहाँ हमसे ग़लतियाँ होती हैं, लेकिन अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए खुला है। वह रहीम और ग़फ़ूर है। जब तक साँस चल रही है, तौबा की गुंजाइश है। लेकिन जब मौत आ जाएगी और आख़िरत का पर्दा खुल जाएगा, तब पछतावा करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ़ लौट आएँ, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें। यही कामयाबी की राह है — जो आज चुनी जाए, कल नहीं।
📜 आयत 9-13 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 11
सूरा ग़ाफिर आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह लोग कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दो…सूरा आयत 11/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


