ग़ाफिर · 14/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
فَادْعُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ ۝١٤
Fad`ul laaha mukhliseena lahud deena wa law karihal kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
पस तुम लोग ख़ुदा की इबादत को ख़ालिस करके उसी को पुकारो अगरचे कुफ्फ़ार बुरा मानें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَادْعُوا – पुकारो, प्रार्थना करो, इबादत करो।
  • مُخْلِصِينَ – ख़ालिस नीयत के साथ, केवल अल्लाह के लिए।
  • الدِّينَ – इबादत, आज्ञाकारिता, और भक्ति।
  • وَلَوْ كَرِهَ – चाहे वे नापसंद करें, चाहे उन्हें बुरा लगे।
  • الْكَافِرُونَ – जो अल्लाह की वहदानियत (एकता) और सच्चे धर्म को नहीं मानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! तुम अल्लाह ही को पुकारो, उसी से मदद मांगो, और अपनी इबादत, अपनी दुआएं, अपनी नमाज़, अपनी क़ुर्बानी — सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह के लिए बनाओ। उसमें किसी को शरीक (साझी) न बनाओ। तुम्हारा दिल, तुम्हारी ज़ुबान, तुम्हारे अमल — सब कुछ ख़ालिस अल्लाह के लिए हो। यही तो सच्चा दीन है — यही तो वह सीधा रास्ता है जिस पर चलकर इंसान दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।

और याद रखो — जब तुम अल्लाह के लिए अपने दीन को ख़ालिस करोगे, तो काफ़िर लोग नाराज़ होंगे, वे तुमसे नफ़रत करेंगे, वे तुम्हारे रास्ते में रुकावटें डालेंगे। लेकिन तुम उनकी परवाह मत करो। उनकी नाराज़गी तुम्हारे लिए कोई अहमियत नहीं रखती। तुम्हारा काम अल्लाह को राज़ी करना है, न कि लोगों को खुश करना। अल्लाह की रज़ा (खुशी) ही तुम्हारा असली मक़सद होनी चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि इख़लास (ख़ालिस नीयत) ही इबादत की रूह है। बिना इख़लास के अमल बेकार है, चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो। और जब इंसान अपने अमल को ख़ालिस अल्लाह के लिए करता है, तो अल्लाह उसे ताक़त देता है, उसके दिल को सुकून देता है, और उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त अता करता है।

तो ऐ मुसलमान! तू अपने दीन को अल्लाह के लिए ख़ालिस कर, अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ बना, और काफ़िरों की नाराज़गी की परवाह न कर। क्योंकि अल्लाह ही तेरा रब है, अल्लाह ही तेरा मालिक है, और अल्लाह ही तेरी मदद करने वाला है। जब अल्लाह तेरे साथ हो, तो कौन तेरा कुछ बिगाड़ सकता है?

याद रखो — यही वह रास्ता है जिस पर चलकर अंबिया (नबी) गुज़रे हैं, यही वह रास्ता है जो जन्नत तक पहुँचाता है। दुनिया की ख्वाहिशों और लोगों की राय को अपने दीन पर हावी मत होने दो। अल्लाह से जुड़े रहो, उसी पर भरोसा रखो, और उसी की इबादत को अपनी ज़िंदगी का निशाना बनाओ। यही तो कामयाबी है — यही तो सच्ची फलाह है।



📜 आयत 12-16 — सूरा ग़ाफिर

12ذَٰلِكُم بِأَنَّهُ إِذَا دُعِيَ اللَّهُ وَحْدَهُ كَفَرْتُمْ ۖ وَإِن يُشْرَكْ بِهِ تُؤْمِنُوا ۚ فَالْحُكْمُ لِلَّهِ الْعَلِيِّ الْكَبِيرِ
ये इसलिए कि जब तन्हा ख़ुदा पुकारा जाता था तो तुम ईन्कार करते थे और अगर उसके साथ शिर्क किया जाता था तो तुम मान लेते थे तो (आज) ख़ुदा की हुकूमत है जो आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
13هُوَ الَّذِي يُرِيكُمْ آيَاتِهِ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ رِزْقًا ۚ وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ
वही तो है जो तुमको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है और तुम्हारे लिए आसमान से रोज़ी नाज़िल करता है और नसीहत तो बस वही हासिल करता है जो (उसकी तरफ) रूज़ू करता है
14فَادْعُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
पस तुम लोग ख़ुदा की इबादत को ख़ालिस करके उसी को पुकारो अगरचे कुफ्फ़ार बुरा मानें
15رَفِيعُ الدَّرَجَاتِ ذُو الْعَرْشِ يُلْقِي الرُّوحَ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ لِيُنذِرَ يَوْمَ التَّلَاقِ
ख़ुदा तो बड़ा आली मरतबा अर्श का मालिक है, वह अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से 'वही' नाज़िल करता है ताकि (लोगों को) मुलाकात (क़यामत) के दिन से डराएं
16يَوْمَ هُم بَارِزُونَ ۖ لَا يَخْفَىٰ عَلَى اللَّهِ مِنْهُمْ شَيْءٌ ۚ لِّمَنِ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ۖ لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
जिस दिन वह लोग (क़ब्रों) से निकल पड़ेंगे (और) उनको कोई चीज़ ख़ुदा से पोशीदा नहीं रहेगी (और निदा आएगी) आज किसकी बादशाहत है ( फिर ख़ुदा ख़़ुद कहेगा ) ख़ास ख़ुदा की जो अकेला (और) ग़ालिब है
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 14

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Thursday, October 1, 2026

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