ग़ाफिर · 15/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
رَفِيعُ الدَّرَجَاتِ ذُو الْعَرْشِ يُلْقِي الرُّوحَ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ لِيُنذِرَ يَوْمَ التَّلَاقِ ۝١٥
Rafee`ud darajaati zul `Arshi yulqir rooha min amrihee `alaa mai yashaaa`u min `ibaadihee liyunzira yawmat talaaq
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा तो बड़ा आली मरतबा अर्श का मालिक है, वह अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से 'वही' नाज़िल करता है ताकि (लोगों को) मुलाकात (क़यामत) के दिन से डराएं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रफ़ीउद्दरजात: ऊँचे दर्जों वाला, सर्वोच्च पदों वाला।
  • ज़ुल-अर्श: अर्श (सिंहासन) का स्वामी।
  • युल्क़िर्रूह: रूह (वही/प्रकाशना) को डालता है, अर्थात उतारता है।
  • यौमुत-तलाक़: मिलने का दिन, यानी क़ियामत का दिन।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी इन आयात में अपनी महानता और रहमत का वर्णन कर रहा है। वह रफ़ीउद्दरजात है, यानी उसके दर्जे इतने ऊँचे हैं कि उसकी कोई मिसाल नहीं, वह अपनी मख़लूक़ात (सृष्टि) से बिल्कुल अलग और बरतर है। वही अर्श का मालिक है, जो सबसे बड़ा सिंहासन है और उसकी अज़मत का प्रतीक है।

उसकी सबसे बड़ी रहमत यह है कि वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, उस पर रूह (वही) उतारता है। इस वही को 'रूह' (आत्मा) इसलिए कहा गया कि जिस तरह शरीर को आत्मा से ज़िंदगी मिलती है, उसी तरह दिलों को वही से ज़िंदगी मिलती है। यह वही नबियों और रसूलों पर उतारी जाती है, ताकि वे लोगों को सीधा रास्ता दिखाएँ और उन्हें यौमुत-तलाक़ (क़ियामत के दिन) से डराएँ।

उस दिन सभी पहले और आख़िरी लोग, ज़मीन और आसमान के सारे इंसान, फ़रिश्ते और जिन्नात — सब एक जगह इकट्ठा होंगे। यह मिलने का दिन होगा, जहाँ हर कोई अपने किए का हिसाब देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी रहमत पर ग़ौर करने की दावत देती है। अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि अपने नबियों के ज़रिए हिदायत भेजी, ताकि हम उस दिन की घबराहट से बच सकें। यह हमारे लिए कितनी बड़ी नेमत है कि हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत है, जो हमें उस दिन की तैयारी का रास्ता दिखाती है। आओ, हम इस नेमत का शुक्र अदा करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि उस दिन हमारी मुलाक़ात अपने रब से रहमत और मग़फ़िरत के साथ हो।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — ग़ाफिर

13هُوَ الَّذِي يُرِيكُمْ آيَاتِهِ وَيُنَزِّلُ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ رِزْقًا ۚ وَمَا يَتَذَكَّرُ إِلَّا مَن يُنِيبُ
वही तो है जो तुमको (अपनी कुदरत की) निशानियाँ दिखाता है और तुम्हारे लिए आसमान से रोज़ी नाज़िल करता है और नसीहत तो बस वही हासिल करता है जो (उसकी तरफ) रूज़ू करता है
14فَادْعُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ وَلَوْ كَرِهَ الْكَافِرُونَ
पस तुम लोग ख़ुदा की इबादत को ख़ालिस करके उसी को पुकारो अगरचे कुफ्फ़ार बुरा मानें
15رَفِيعُ الدَّرَجَاتِ ذُو الْعَرْشِ يُلْقِي الرُّوحَ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ لِيُنذِرَ يَوْمَ التَّلَاقِ
ख़ुदा तो बड़ा आली मरतबा अर्श का मालिक है, वह अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से 'वही' नाज़िल करता है ताकि (लोगों को) मुलाकात (क़यामत) के दिन से डराएं
16يَوْمَ هُم بَارِزُونَ ۖ لَا يَخْفَىٰ عَلَى اللَّهِ مِنْهُمْ شَيْءٌ ۚ لِّمَنِ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ۖ لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
जिस दिन वह लोग (क़ब्रों) से निकल पड़ेंगे (और) उनको कोई चीज़ ख़ुदा से पोशीदा नहीं रहेगी (और निदा आएगी) आज किसकी बादशाहत है ( फिर ख़ुदा ख़़ुद कहेगा ) ख़ास ख़ुदा की जो अकेला (और) ग़ालिब है
17الْيَوْمَ تُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ ۚ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
आज हर शख्स को उसके किए का बदला दिया जाएगा, आज किसी पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
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अनुवाद — ग़ाफिर 15

सूरा ग़ाफिर आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा तो बड़ा आली मरतबा अर्श का मालिक है, वह…

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Tuesday, August 18, 2026

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