Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- फ़िरऔन: मिस्र का शासक, जो अत्याचारी और घमंडी था।
- हामान: फ़िरऔन का प्रधानमंत्री और सबसे करीबी सलाहकार, जो उसके अत्याचारों में सहयोगी था।
- क़ारून: फ़िरऔन के दौर का एक बहुत धनी व्यक्ति, जिसके पास अपार धन-दौलत और खज़ाने थे। वह मूसा (अलैहिस्सलाम) की क़ौम में से था, लेकिन घमंड के कारण उनका विरोधी बन गया।
- साहिर: जादूगर, जो लोगों को अपने जादू से प्रभावित करता है।
- कज़्ज़ाब: बहुत झूठा, जो झूठ बोलने में मशहूर हो।
तफ़सीर:
यह आयत उस महान दृश्य को प्रस्तुत करती है जब अल्लाह ने अपने पैग़म्बर मूसा (अलैहिस्सलाम) को सच्चाई और स्पष्ट चमत्कारों के साथ भेजा। उन्हें भेजा गया तीन ऐसे लोगों की ओर जो अपने समय के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली व्यक्ति थे:
- फ़िरऔन: जो मिस्र का शासक था और स्वयं को भगवान कहता था। उसका अत्याचार और घमंड अपनी चरम सीमा पर था।
- हामान: जो फ़िरऔन का प्रधानमंत्री था और उसके ज़ुल्म का साथी था। वह फ़िरऔन के हर ग़लत फ़ैसले का समर्थन करता था।
- क़ारून: जो अत्यधिक धनवान था, उसके पास इतने खज़ाने थे कि उनकी चाबियाँ भी ताकतवर लोगों के लिए भारी थीं। वह अपने धन के घमंड में अंधा हो गया था और सच्चाई को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें अल्लाह का संदेश पहुँचाया और सच्चाई की ओर बुलाया, तो इन तीनों ने मिलकर एक ही जवाब दिया: "यह तो जादूगर है, बहुत झूठा है!" उन्होंने उनकी बात को जादू कहा और उन्हें झूठा ठहराया, जबकि वे जानते थे कि मूसा (अलैहिस्सलाम) सच्चे हैं। उनका यह कहना सिर्फ़ इसलिए था कि वे अपनी शक्ति और ठाठ-बाट को बनाए रखना चाहते थे, और सच्चाई को स्वीकार करने का मतलब था अपने अधिकार और सुख-सुविधाओं को खो देना।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब सच्चाई आती है, तो अत्याचारी और घमंडी लोग उसे अस्वीकार करने के लिए हर बहाना ढूंढते हैं। वे सच्चाई को जादू, झूठ या कोई और नाम देकर लोगों को उससे दूर करने की कोशिश करते हैं। लेकिन अल्लाह की मदद सच्चाई के साथ होती है, और अंततः सच्चाई ही विजयी होती है।
इस क़िस्से से हमें यह सबक मिलता है कि हमें कभी भी धन, शक्ति या पद के घमंड में नहीं आना चाहिए। ये सब चीज़ें अल्लाह की दी हुई हैं और ये हमें सच्चाई से दूर नहीं करनी चाहिए। सच्चाई को स्वीकार करना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है, चाहे वह कितनी भी कठिन क्यों न लगे।
अल्लाह हमें सच्चाई को स्वीकार करने और घमंड से बचने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 22-26 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 24
सूरा ग़ाफिर आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिरऔन और हामान और क़ारून के पास भेजा तो वह…सूरा आयत 24/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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