ग़ाफिर · 23/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٢٣
Wa laqad arsalnaa Moosaa bi Aayaatinaa wa sultaanim mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलीलें देकर

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आयातिना: हमारी निशानियाँ, यानी वे चमत्कार जो अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को दिए।
  • सुल्तानिन मुबीन: स्पष्ट और प्रत्यक्ष प्रमाण, वह दलील जो सच्चाई को रोशन कर दे।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र फ़रमाया है, जो इस बात की दलील है कि अल्लाह ने अपने रसूलों को हमेशा स्पष्ट निशानियों और ठोस प्रमाणों के साथ भेजा है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने कई महान चमत्कार दिए — जैसे लाठी का साँप बन जाना, हाथ का चमकना, और अन्य निशानियाँ — ताकि वे फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने सच्चाई को साबित कर सकें। ये निशानियाँ सिर्फ़ दिखावे के लिए नहीं थीं, बल्कि वे अल्लाह की क़ुदरत और एकता की गवाह थीं।

"सुल्तानिन मुबीन" का मतलब है वह स्पष्ट प्रमाण और तर्क जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की सच्चाई पर गवाही देता था। यह प्रमाण इतना रोशन और साफ़ था कि किसी भी समझदार इंसान के लिए उसे झुठलाना मुमकिन नहीं था। अल्लाह ने अपने नबी को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें हर उस चीज़ से लैस किया जो उनके दावे को साबित करने के लिए ज़रूरी थी।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह कभी भी अपने बंदों पर ज़ुल्म नहीं करता और हिदायत का रास्ता दिखाने के लिए हमेशा साफ़ दलीलें और निशानियाँ भेजता है। जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को स्पष्ट चमत्कार दिए गए, उसी तरह अल्लाह ने हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को क़ुरआन जैसा अज़ीम चमत्कार दिया, जो आज तक क़ायम है। यह हमारे लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है।

प्यारे मुसलमानों! यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का दीन हमेशा सच्चाई और स्पष्ट प्रमाणों पर खड़ा है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ, क्योंकि यही वह रोशन रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह ने जो निशानियाँ और प्रमाण दिए हैं, उन पर ग़ौर करें और अपने ईमान को मज़बूत करें।



📜 आयत 21-25 — ग़ाफिर

21۞ أَوَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ كَانُوا مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَانُوا هُمْ أَشَدَّ مِنْهُمْ قُوَّةً وَآثَارًا فِي الْأَرْضِ فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ بِذُنُوبِهِمْ وَمَا كَانَ لَهُم مِّنَ اللَّهِ مِن وَاقٍ
क्या उन लोगों ने रूए ज़मीन पर चल फिर कर नहीं देखा कि जो लोग उनसे पहले थे उनका अन्जाम क्या हुआ (हालाँकि) वह लोग कुवत (शान और उम्र सब) में और ज़मीन पर अपनी निशानियाँ (यादगारें इमारतें) वग़ैरह छोड़ जाने में भी उनसे कहीं बढ़ चढ़ के थे तो ख़ुदा ने उनके गुनाहों की वजह से उनकी ले दे की, और ख़ुदा (के ग़ज़ब से) उनका कोई बचाने वाला भी न था
22ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانَت تَّأْتِيهِمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ فَكَفَرُوا فَأَخَذَهُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ قَوِيٌّ شَدِيدُ الْعِقَابِ
ये इस सबब से कि उनके पैग़म्बरान उनके पास वाज़ेए व रौशन मौजिज़े ले कर आए इस पर भी उन लोगों ने न माना तो ख़ुदा ने उन्हें ले डाला इसमें तो शक ही नहीं कि वह क़वी (और) सख्त अज़ाब वाला है
23وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलीलें देकर
24إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَقَارُونَ فَقَالُوا سَاحِرٌ كَذَّابٌ
फिरऔन और हामान और क़ारून के पास भेजा तो वह लोग कहने लगे कि (ये तो) एक बड़ा झूठा (और) जादूगर है
25فَلَمَّا جَاءَهُم بِالْحَقِّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا اقْتُلُوا أَبْنَاءَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ وَاسْتَحْيُوا نِسَاءَهُمْ ۚ وَمَا كَيْدُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
ग़रज़ जब मूसा उन लोगों के पास हमारी तरफ से सच्चा दीन ले कर आये तो वह बोले कि जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं उनके बेटों को तो मार डालों और उनकी औरतों को (लौन्डिया बनाने के लिए) ज़िन्दा रहने दो और काफ़िरों की तद्बीरें तो बे ठिकाना होती हैं
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अनुवाद — ग़ाफिर 23

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Tuesday, August 18, 2026

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