अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- दअ्ब (دَأْب): आदत, तरीका, हालत या अंजाम।
- क़ौमे नूह (قَوْمِ نُوحٍ): हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की क़ौम।
- आद (عَادٍ): हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम।
- समूद (ثَمُودَ): हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम।
- ज़ुल्म (ظُلْمًا): किसी को उसके हक़ से महरूम करना या नाहक़ सज़ा देना।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन काफ़िरों को ख़तरनाक अंजाम से आगाह कर रहे हैं जो हक़ को झुठलाते हैं और रसूलों की दावत को नकारते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि इन मक्का के काफ़िरों का हाल बिल्कुल उन पिछली क़ौमों जैसा है — क़ौमे नूह, आद, समूद और उनके बाद आने वाली क़ौमें — जिन्होंने अपने नबियों को झुठलाया और कुफ़्र व इनकार पर अड़े रहे। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उन्हें उनके गुनाहों की वजह से पकड़ लिया और हलाक कर दिया। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है जो कभी नहीं बदलती।
फिर अल्लाह तआला अपनी पाक ज़ात की तरफ़ इशारा करते हुए फ़रमाता है: "और अल्लाह अपने बंदों पर ज़ुल्म करने का इरादा नहीं रखता।" यानी अल्लाह अद्ल और इंसाफ़ वाला है, वह कभी किसी को बग़ैर गुनाह के सज़ा नहीं देता, न ही किसी का हक़ मारता है। अगर वह किसी क़ौम को हलाक करता है तो सिर्फ़ उनके अपने कुकर्मों और ज़ुल्म की वजह से, क्योंकि उनके पास हुज्जत (सबूत) क़ायम हो चुकी थी और रसूल भेजे जा चुके थे। अल्लाह तआला हर ज़ुल्म से पाक है, और उसका अज़ाब हमेशा अद्ल पर मबनी होता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अद्ल और रहमत पर गहरा ईमान लाने की तरग़ीब देती है। अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि वह तो बंदों पर अपनी रहमत और मेहरबानी से पहले ही अपने रसूल भेजता है ताकि लोगों के पास कोई बहाना न रहे। यह अल्लाह की तरफ़ से इंसानियत पर सबसे बड़ा एहसान है कि उसने हिदायत के रास्ते खोल दिए और आगाह कर दिया। जो लोग इन नेअमतों का शुक्र अदा करते हैं और हक़ को क़बूल करते हैं, उनके लिए जन्नत और खुशहाली है। और जो सरकशी और इनकार पर अड़े रहते हैं, वह सिर्फ़ अपना ही नुक़सान करते हैं। अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं — तौबा करने वालों के लिए, माफ़ी मांगने वालों के लिए। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को अपनाएँ, रसूलों की सुन्नत पर चलें और उन क़ौमों के अंजाम से सबक़ लें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 29-33 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 31
सूरा ग़ाफिर आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (कहीं तुम्हारा भी वही हाल न हो) जैसा कि नूह…सूरा आयत 31/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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