अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَوْمَ التَّنَادِ — वह दिन जब लोग एक-दूसरे को पुकारेंगे। यह क़ियामत का दिन है, जब हर इंसान अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को मदद के लिए पुकारेगा, लेकिन कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा।
तफ़सीर:
ऐ मेरी क़ौम के लोगों! मुझे तुम्हारे लिए उस दिन का भय है, जिस दिन लोग एक-दूसरे को पुकारेंगे। यह क़ियामत का वह भयानक दिन होगा जब हर व्यक्ति अपने रिश्तेदारों, भाई-बहनों, दोस्तों और अपने नेताओं को पुकारेगा, यह सोचते हुए कि शायद वे उसकी मदद कर सकें। लेकिन उस दिन कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा। कुछ लोग अपनी दुनियावी रिश्तेदारी या सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण दूसरों को पुकारेंगे, यह समझते हुए कि इससे उन्हें कुछ लाभ मिलेगा, परंतु उस दिन केवल अल्लाह का फ़ैसला ही चलेगा।
यह वह दिन है जब हर इंसान अपने कर्मों के साथ अकेला खड़ा होगा। न कोई सिफ़ारिश करने वाला होगा, न कोई मददगार। यही वह दिन है जिसके बारे में अल्लाह ने क़ुरआन में बार-बार चेतावनी दी है, ताकि लोग दुनिया में अच्छे कर्म करें और उस दिन की भयावहता से बचें।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में उस दिन की तैयारी करनी चाहिए। जिस दिन न तो धन-दौलत काम आएगी, न रिश्तेदार, न दोस्त। केवल अल्लाह पर भरोसा और अच्छे कर्म ही हमें उस दिन की मुसीबतों से बचा सकते हैं। हमें चाहिए कि हम अपने परिवार और समाज को भी इस दिन की चेतावनी दें और उन्हें नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा दें। यह आयत हमें याद दिलाती है कि इस दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है और असली ज़िंदगी आख़िरत की है, इसलिए हमें अपने आख़िरत को संवारने के लिए हर पल का सदुपयोग करना चाहिए। अल्लाह हम सभी को उस दिन की भयावहता से बचाए और हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 30-34 — ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 32
सूरा ग़ाफिर आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ हमारी क़ौम मुझे तो तुम्हारी निस्बत कयामत के…सूरा आयत 32/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








