ग़ाफिर · 32/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
وَيَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِ ۝٣٢
Wa yaa qawmi inneee akhaafu `alaikum yawmat tanaad
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ हमारी क़ौम मुझे तो तुम्हारी निस्बत कयामत के दिन का अन्देशा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَوْمَ التَّنَادِ — वह दिन जब लोग एक-दूसरे को पुकारेंगे। यह क़ियामत का दिन है, जब हर इंसान अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को मदद के लिए पुकारेगा, लेकिन कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा।

तफ़सीर:

ऐ मेरी क़ौम के लोगों! मुझे तुम्हारे लिए उस दिन का भय है, जिस दिन लोग एक-दूसरे को पुकारेंगे। यह क़ियामत का वह भयानक दिन होगा जब हर व्यक्ति अपने रिश्तेदारों, भाई-बहनों, दोस्तों और अपने नेताओं को पुकारेगा, यह सोचते हुए कि शायद वे उसकी मदद कर सकें। लेकिन उस दिन कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा। कुछ लोग अपनी दुनियावी रिश्तेदारी या सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण दूसरों को पुकारेंगे, यह समझते हुए कि इससे उन्हें कुछ लाभ मिलेगा, परंतु उस दिन केवल अल्लाह का फ़ैसला ही चलेगा।

यह वह दिन है जब हर इंसान अपने कर्मों के साथ अकेला खड़ा होगा। न कोई सिफ़ारिश करने वाला होगा, न कोई मददगार। यही वह दिन है जिसके बारे में अल्लाह ने क़ुरआन में बार-बार चेतावनी दी है, ताकि लोग दुनिया में अच्छे कर्म करें और उस दिन की भयावहता से बचें।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने जीवन में उस दिन की तैयारी करनी चाहिए। जिस दिन न तो धन-दौलत काम आएगी, न रिश्तेदार, न दोस्त। केवल अल्लाह पर भरोसा और अच्छे कर्म ही हमें उस दिन की मुसीबतों से बचा सकते हैं। हमें चाहिए कि हम अपने परिवार और समाज को भी इस दिन की चेतावनी दें और उन्हें नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा दें। यह आयत हमें याद दिलाती है कि इस दुनिया की ज़िंदगी अस्थायी है और असली ज़िंदगी आख़िरत की है, इसलिए हमें अपने आख़िरत को संवारने के लिए हर पल का सदुपयोग करना चाहिए। अल्लाह हम सभी को उस दिन की भयावहता से बचाए और हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — ग़ाफिर

30وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُم مِّثْلَ يَوْمِ الْأَحْزَابِ
तो जो शख्स (दर पर्दा) ईमान ला चुका था कहने लगा, भाईयों मुझे तो तुम्हारी निस्बत भी और उम्मतों की तरह रोज़ (बद) का अन्देशा है
31مِثْلَ دَأْبِ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَالَّذِينَ مِن بَعْدِهِمْ ۚ وَمَا اللَّهُ يُرِيدُ ظُلْمًا لِّلْعِبَادِ
(कहीं तुम्हारा भी वही हाल न हो) जैसा कि नूह की क़ौम और आद समूद और उनके बाद वाले लोगों का हाल हुआ और ख़ुदा तो बन्दों पर ज़ुल्म करना चाहता ही नहीं
32وَيَا قَوْمِ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ يَوْمَ التَّنَادِ
और ऐ हमारी क़ौम मुझे तो तुम्हारी निस्बत कयामत के दिन का अन्देशा है
33يَوْمَ تُوَلُّونَ مُدْبِرِينَ مَا لَكُم مِّنَ اللَّهِ مِنْ عَاصِمٍ ۗ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ
जिस दिन तुम पीठ फेर कर (जहन्नुम) की तरफ चल खड़े होगे तो ख़ुदा के (अज़ाब) से तुम्हारा बचाने वाला न होगा, और जिसको ख़ुदा गुमराही में छोड़ दे तो उसका कोई रूबराह करने वाला नहीं
34وَلَقَدْ جَاءَكُمْ يُوسُفُ مِن قَبْلُ بِالْبَيِّنَاتِ فَمَا زِلْتُمْ فِي شَكٍّ مِّمَّا جَاءَكُم بِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا هَلَكَ قُلْتُمْ لَن يَبْعَثَ اللَّهُ مِن بَعْدِهِ رَسُولًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ اللَّهُ مَنْ هُوَ مُسْرِفٌ مُّرْتَابٌ
और (इससे) पहले यूसुफ़ भी तुम्हारे पास मौजिज़े लेकर आए थे तो जो जो लाए थे तुम लोग उसमें बराबर शक ही करते रहे यहाँ तक कि जब उन्होने वफात पायी तो तुम कहने लगे कि अब उनके बाद ख़ुदा हरगिज़ कोई रसूल नहीं भेजेगा जो हद से गुज़रने वाला और शक करने वाला है ख़ुदा उसे यू हीं गुमराही में छोड़ देता है
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीRevelation
32आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 32

सूरा ग़ाफिर आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ हमारी क़ौम मुझे तो तुम्हारी निस्बत कयामत के…

सूरा आयत 32/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए