ग़ाफिर · 39/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
يَا قَوْمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌ وَإِنَّ الْآخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ ۝٣٩
Yaa qawmi innamaa haazihil hayaatud dunyaa mataa`unw wa innal Aakhirata hiya daarul qaraar
📖 हिंदी अर्थ
भाईयों ये दुनियावी ज़िन्दगी तो बस (चन्द रोज़ा) फ़ायदा है और आखेरत ही हमेशा रहने का घर है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मताअ: अस्थायी सुख-सामग्री, वह चीज़ जिसका लाभ थोड़े समय के लिए उठाया जाए।
  • दारुल क़रार: स्थायी निवास का घर, वह घर जहाँ हमेशा रहना हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह दुनिया की ज़िंदगी जो तुम्हें इतनी प्यारी लगती है, यह तो केवल एक अस्थायी सुख-साधन है। जिस तरह एक मुसाफ़िर रास्ते में कुछ देर के लिए किसी साये में आराम करता है और फिर आगे बढ़ जाता है, उसी तरह यह दुनिया भी एक छोटा सा पड़ाव है। यहाँ के सुख, धन-दौलत, ओहदे और रिश्ते — सब कुछ कुछ ही दिनों का है। यह जीवन एक सीमित समय के लिए है, फिर यह ख़त्म हो जाता है। जिस तरह एक फूल कुछ दिन खिलता है और फिर मुरझा जाता है, उसी तरह दुनिया की खुशियाँ भी जल्दी ही समाप्त हो जाती हैं।

लेकिन आख़िरत (परलोक) का जीवन — वह है स्थायी निवास का घर। वह घर जहाँ से कभी निकलना नहीं है। वहाँ की ज़िंदगी हमेशा रहने वाली है। यदि वहाँ जन्नत मिली तो ऐसी नेमतें मिलेंगी जो कभी ख़त्म नहीं होंगी, और यदि जहन्नुम मिला तो वह अज़ाब भी कभी ख़त्म नहीं होगा। यही वह सच्चाई है जिसे समझने की ज़रूरत है।

प्यारे भाइयों! यह दुनिया एक परीक्षा का स्थान है, जबकि आख़िरत इनाम या सज़ा का स्थान है। जो व्यक्ति इस सच्चाई को समझ लेता है, वह दुनिया को अपना असली घर नहीं बनाता, बल्कि इसे एक पुल की तरह समझता है जिसे पार करके उसे अपने असली घर तक पहुँचना है। हमें चाहिए कि हम इस अस्थायी जीवन में उन अच्छे कामों को करें जो हमें उस स्थायी घर में सुख देंगे। अल्लाह की इबादत करें, उसकी बताई हुई राह पर चलें, लोगों के साथ भलाई करें — यही वह पूँजी है जो हमारे साथ उस स्थायी घर में जाएगी।

याद रखिए! दुनिया की मोहब्बत और उसके झूठे आकर्षण में खोकर हमें वह अनमोल ख़ज़ाना नहीं गँवाना चाहिए जो अल्लाह ने हमारे लिए तैयार किया है। आख़िरत की सफलता ही असली सफलता है, और उसी की तैयारी में हमें अपनी ज़िंदगी बितानी चाहिए। अल्लाह हम सबको यह समझ दे और अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — ग़ाफिर

37أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ كَاذِبًا ۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبِيلِ ۚ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ إِلَّا فِي تَبَابٍ
(यानि) आसमानों के रसतों पर फिर मूसा के ख़ुदा को झांक कर (देख) लूँ और मैं तो उसे यक़ीनी झूठा समझता हूँ, और इसी तरह फिरऔन की बदकिरदारयाँ उसको भली करके दिखा दी गयीं थीं और वह राहे रास्ता से रोक दिया गया था, और फिरऔन की तद्बीर तो बस बिल्कुल ग़ारत गुल ही थीं
38وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ أَهْدِكُمْ سَبِيلَ الرَّشَادِ
और जो शख्स (दर पर्दा) ईमानदार था कहने लगा भाईयों मेरा कहना मानों मैं तुम्हें हिदायत के रास्ते दिख दूंगा
39يَا قَوْمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌ وَإِنَّ الْآخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ
भाईयों ये दुनियावी ज़िन्दगी तो बस (चन्द रोज़ा) फ़ायदा है और आखेरत ही हमेशा रहने का घर है
40مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ فِيهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ
जो बुरा काम करेगा तो उसे बदला भी वैसा ही मिलेगा, और जो नेक काम करेगा मर्द हो या औरत मगर ईमानदार हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी मिलेगी
41۞ وَيَا قَوْمِ مَا لِي أَدْعُوكُمْ إِلَى النَّجَاةِ وَتَدْعُونَنِي إِلَى النَّارِ
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो
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अनुवाद — ग़ाफिर 39

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सूरा आयत 39/85 — ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ग़ाफिर सुनें, ग़ाफिर अनुवाद, ग़ाफिर mp3, ग़ाफिर pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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