ग़ाफिर · 49/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَقَالَ الَّذِينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِّنَ الْعَذَابِ ۝٤٩
Wa qaalal lazena fin Naari likhazanati Jahannamad-`oo Rabbakum yukhaffif `annaa yawmam minal `azaab
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख्वास्त करेंगे कि अपने परवरदिगार से अर्ज़ करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में तख़फ़ीफ़ कर दें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَزَنَةِ جَهَنَّمَ: जहन्नम के दरोगा (पहरेदार)।
  • يُخَفِّفْ: हल्का कर दे।
  • يَوْمًا: एक दिन (थोड़ी सी अवधि)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने जहन्नम के अज़ाब का फ़ैसला सुना दिया और काफ़िरों को यक़ीन हो गया कि अब कोई राह-ए-फ़रार नहीं, न दुनिया में लौटना है और न तौबा का मौक़ा मिलेगा, तो उन पर अज़ाब की शिद्दत इस क़दर छा गई कि वे अपनी बेबसी और मजबूरी का इज़हार करते हुए जहन्नम के फ़रिश्तों (दरोगाओं) से गिड़गिड़ाकर कहने लगे: "तुम हमारी तरफ़ से अपने रब से दुआ करो कि वह हमारा अज़ाब एक दिन के लिए ही सही, हल्का कर दे।" यानी वे इतनी बड़ी मोहलत भी नहीं माँग रहे कि अज़ाब पूरी तरह ख़त्म हो जाए, बल्कि सिर्फ़ एक दिन की कमी चाहते हैं ताकि उन्हें थोड़ी सी राहत मिल सके।

यह आयत उस हालत का मंज़र दिखाती है जब अहले-दोज़ख़ अपने पीर-ओ-मुर्शिद, बड़ों और सरदारों के साथ मिलकर — चाहे वे मुस्तकबिर (बड़े) हों या कमज़ोर पैरोकार — सब एक साथ जहन्नम के फ़रिश्तों से यही दरख़्वास्त करेंगे। लेकिन यह दरख़्वास्त उनकी नादानी और पछतावे की दलील है, क्योंकि दुनिया में उन्हें हज़ारों मौक़े दिए गए थे, रसूल भेजे गए, किताबें उतारी गईं, लेकिन उन्होंने सुनने से इनकार किया। अब वहाँ उनकी फ़रियाद का कोई जवाब नहीं, बल्कि अज़ाब और बढ़ जाता है।

यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में रहते हुए तौबा और इस्तिग़फ़ार का दरवाज़ा खुला रखा है। हमें चाहिए कि इस मौक़े को ग़नीमत समझें, अपने गुनाहों से तौबा करें, नेक अमल करें और अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। क़ुरआन हमें आगाह करता है कि आज की एक रात की इबादत, एक सजदा, एक दुआ — क़यामत के दिन हमारे लिए कितनी बड़ी नजात का ज़रिया बन सकती है। अल्लाह हमें जहन्नम के अज़ाब से बचाए और अपनी जन्नत का मेहमान बनाए। आमीन।



📜 आयत 47-51 — सूरा ग़ाफिर

47وَإِذْ يَتَحَاجُّونَ فِي النَّارِ فَيَقُولُ الضُّعَفَاءُ لِلَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُنَّا لَكُمْ تَبَعًا فَهَلْ أَنتُم مُّغْنُونَ عَنَّا نَصِيبًا مِّنَ النَّارِ
और ये लोग जिस वक्त ज़हन्नुम में बाहम झगड़ेंगें तो कम हैसियत लोग बड़े आदमियों से कहेंगे कि हम तुम्हारे ताबे थे तो क्या तुम इस वक्त (दोज़ख़ की) आग का कुछ हिस्सा हमसे हटा सकते हो
48قَالَ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا إِنَّا كُلٌّ فِيهَا إِنَّ اللَّهَ قَدْ حَكَمَ بَيْنَ الْعِبَادِ
तो बड़े लोग कहेंगें (अब तो) हम (तुम) सबके सब आग में पड़े हैं ख़ुदा (को) तो बन्दों के बारे में (जो कुछ) फैसला (करना था) कर चुका
49وَقَالَ الَّذِينَ فِي النَّارِ لِخَزَنَةِ جَهَنَّمَ ادْعُوا رَبَّكُمْ يُخَفِّفْ عَنَّا يَوْمًا مِّنَ الْعَذَابِ
और जो लोग आग में (जल रहे) होंगे जहन्नुम के दरोग़ाओं से दरख्वास्त करेंगे कि अपने परवरदिगार से अर्ज़ करो कि एक दिन तो हमारे अज़ाब में तख़फ़ीफ़ कर दें
50قَالُوا أَوَلَمْ تَكُ تَأْتِيكُمْ رُسُلُكُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۚ قَالُوا فَادْعُوا ۗ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
वह जवाब देंगे कि क्या तुम्हारे पास तुम्हारे पैग़म्बर साफ व रौशन मौजिज़े लेकर नहीं आए थे वह कहेंगे (हाँ) आए तो थे, तब फरिश्ते तो कहेंगे फिर तुम ख़़ुद (क्यों) न दुआ करो, हालाँकि काफ़िरों की दुआ तो बस बेकार ही है
51إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَالَّذِينَ آمَنُوا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيَوْمَ يَقُومُ الْأَشْهَادُ
हम अपने पैग़म्बरों की और ईमान वालों की दुनिया की ज़िन्दगी में भी ज़रूर मदद करेंगे और जिस दिन गवाह (पैग़म्बर फरिश्ते गवाही को) उठ खड़े होंगे
ग़ाफिरकुरान सूची
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49आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 49

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Wednesday, September 30, 2026

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